पसमांदा मुस्लिमों को OBC में शामिल करने की माँग पर SC में याचिका, कोर्ट ने नोट तैयार करने को कहा: अब 6 अप्रैल को सुनवाई

पसमांदा मुसलमानों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल करके आरक्षण देने की माँग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। सोमवार (23 फरवरी 2026) को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता मोहम्मद वसीम सैफी की याचिका पर संक्षिप्त सुनवाई की। याचिका में OBC को सब-कैटेगरी में बाँटकर पसमांदा मुसलमानों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की माँग की गई है। रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट के आधार पर यह माँग रखी गई है।

सीनियर एडवोकेट अंजना प्रकाश ने पीठ को बताया कि भारत में मुसलमानों के तीन वर्ग हैं-आशरफ (ऊपरी वर्ग) और बाकी दो निचले वर्ग।

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत ने सवाल किया, “क्या आप अन्य गरीब मुसलमानों की कीमत पर सिर्फ एक वर्ग को प्रमोट करना चाहते हैं? कुल कितने मुसलमान पिछड़े हैं, इसका होमवर्क कहां है?” उन्होंने आगे कहा, “आप कह रहे हैं कि मुसलमानों की एक कैटेगरी पिछड़ी है और दूसरी नहीं, हम इसे कैसे तय करें?” कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक संक्षिप्त नोट दाखिल करने की अनुमति दी और मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को तय की है।

याचिका में 2006 की सच्चर कमिटी रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत की मुस्लिम आबादी का करीब 80-85 प्रतिशत पसमांदा वर्ग है जो शिक्षा, रोजगार, राजनीति और धार्मिक संस्थानों में बेहद कम प्रतिनिधित्व रखता है जबकि आशरफ वर्ग प्रभावशाली पदों पर हावी है। याचिका में मुस्लिम समाज के तीन समूहों- आशरफ, अजलाफ और अरजाल का जिक्र करते हुए कहा गया कि अजलाफ को हिंदू OBC की तरह अतिरिक्त ध्यान और अरजाल को अनुसूचित जातियों की तरह मोस्ट बैकवर्ड क्लास (MBC) का दर्जा दिया जाए।

एडवोकेट अंजना प्रकाश ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले को आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को दिए गए आरक्षण से जुड़े लंबित मामले के साथ जोड़कर सुना जाए। उस मामले में संवैधानिक पीठ यह तय करेगी कि क्या किसी धार्मिक समुदाय को पिछड़ा वर्ग माना जा सकता है। 2005 में आंध्र प्रदेश सरकार ने मुसलमानों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग मानकर शिक्षा और नौकरियों में 5 प्रतिशत आरक्षण दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मुद्दे पर गहराई से विचार कर रहा है।

कौन हैं पसमांदा मुस्लिम और क्या है उनकी माँग?

पसमांदा मुस्लिम उन जातियों और समुदायों का समूह हैं, जिन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा माना जाता है। लंबे समय से यह वर्ग मुख्यधारा के आरक्षण का लाभ दिए जाने की माँग करता रहा है। उनका तर्क है कि कई कारणों से वे शिक्षा, रोजगार और आर्थिक विकास में पिछड़े रह गए हैं और उन्हें OBC की श्रेणी में शामिल कर विशेष सुविधाएँ मिलनी चाहिए।