बांग्लादेशी महमूदा बेगम ने ‘भारतीय’ ID बनाने के लिए ग्राम प्रधान के फर्जी लैटरपैड का किया इस्तेमाल, पोल खुली तो मियाँ और बच्चों समेत हुई फरार: हापुड़ का मामला

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ के गढ़मुक्तेश्वर इलाके में महमूदा बेगम नाम की महिला अपनी पहचान छिपाकर और फर्जी दस्तावेज बनवाकर सालों से रह रही थी।

पुलिस ने महमूदा बेगम और उसके शौहर मोहम्मद मशरूफ के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है। जैसे ही पुलिस को इस अवैध प्रवास की भनक लगी और छापेमारी की गई, दोनों आरोपित अपने तीन बच्चों के साथ फरार हो गए। फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियाँ इनकी तलाश में जुट गई हैं।

सऊदी में प्यार, दिल्ली में निकाह और फिर अवैध एंट्री

मामले की जड़ें सऊदी अरब से जुड़ी हैं। बताया जा रहा है कि आरोपित मोहम्मद मशरूफ 2020 में सऊदी की एक कंपनी में काम करता था, जहाँ उसकी मुलाकात बांग्लादेश के नरायणगंज की रहने वाली महमूदा से हुई।

दोनों ने 2021 में दिल्ली की निजामुद्दीन दरगाह में निकाह किया। 2022 में मोहम्मद मशरूफ अपनी बीवी को टूरिस्ट वीजा पर भारत लेकर आया। वीजा खत्म होने के बाद भी महमूदा वापस नहीं गई और हापुड़ के दौताई गाँव में छिपकर रहने लगी। पहचान छिपाने के लिए उसने अपना नाम बदलकर ‘रानी’ रख लिया था।

फर्जी लेटरपैड से बनवाया वोटर ID कार्ड

महमूदा ने खुद को भारतीय साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया। आरोप है कि ग्राम प्रधान के नाम का फर्जी लेटरपैड तैयार कर उसने अपना वोटर ID कार्ड तक बनवा लिया। हालाँकि, ग्राम प्रधान ने किसी भी तरह का पत्र देने से साफ इनकार किया है और इसे फर्जीवाड़ा बताया है। इस खेल में कुछ सरकारी कड़ियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है, जिसकी जाँच जारी है।

पासपोर्ट, वीजा और विदेशी मुद्रा बरामद

फरार होने से पहले ये लोग अपने घर में कई सबूत छोड़ गए हैं। पुलिस की छापेमारी के दौरान घर से महमूदा का बांग्लादेशी पासपोर्ट, एक्सपायर हो चुका वीजा, बांग्लादेशी मुद्रा (टका), दो सिम कार्ड और कई संदिग्ध कागजात बरामद हुए हैं। पुलिस अब इन दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घुसपैठ के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा है।