गाजियाबाद में EX-मुस्लिम सलीम वास्तिक मामले में AIMIM नेता अजगर अली पर नामजद FIR, अशफाक समेत कई इस्लामी कट्टरपंथियों के भी नाम: बेटे उस्मान ने बताया घटनाक्रम

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित लोनी इलाके में शुक्रवार (27 फरवरी 2026) की सुबह सनसनी फैल गई, जब प्रसिद्ध यूट्यूब और ‘EX-मुस्लिम’ सलीम वास्तिक पर उनके घर में घुसकर जानलेवा हमला किया गया। दो अज्ञात हमलावरों ने उन पर चाकू और धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार किए, जिससे वे लहूलुहान होकर गिर पड़े।

गंभीर हालत में उन्हें दिल्ली के जीटीबी (GTB) अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ वे जीवन और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। सलीम के बेटे उस्मान ने AIMIM नेता सहित कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। इस FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

सुबह 6 बजे कार्यालय में घुसकर किया हमला

सलीम के बेटे उस्मान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, घटना शुक्रवार (27 फरवरी) सुबह करीब 6 बजे की है। सलीम अपने ‘अली गार्डन’ स्थित कार्यालय में बैठे थे, तभी दोपहिया वाहन पर सवार दो नकाबपोश हमलावर वहाँ पहुँचे। उन्होंने सीधे सलीम के गले और पेट पर वार करना शुरू कर दिया। हमलावरों का इरादा उनकी जान लेना था और जब सलीम बेहोश होकर गिर पड़े, तो हमलावर उन्हें मरा हुआ समझकर मौके से फरार हो गए।

बेटे उस्मान ने इस हमले के पीछे एक गहरी साजिश की आशंका जताई है। पुलिस को दी गई तहरीर में दो अज्ञात हमलावरों के अलावा स्थानीय AIMIM नेता अजगर अली, अशफाक, मेंबर सोनू, शाहरुख नेता और भाटी बिल्डर को नामजद किया गया है। उस्मान का आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर उसके अब्बू की हत्या की योजना बनाई थी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए FIR दर्ज कर ली है और आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी हैं।

दीनी तालीम से ‘EX-मुस्लिम’ बनने का सफर

सलीम वास्तिक लोनी के ही रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई आजाद स्कूल से दीनी तालीम के रूप में ली थी। एक समय वह सामान्य जीवन जी रहे थे, लेकिन समय के साथ उनके विचारों में क्रांतिकारी बदलाव आया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस्लाम छोड़ने का ऐलान किया और ‘सलीम वास्तिक 0007’ नाम से यूट्यूब चैनल शुरू किया। इस प्लेटफॉर्म के जरिए वे मदरसों की शिक्षा, सामाजिक कुरीतियों और मुस्लिम समाज की आर्थिक स्थिति पर बेबाकी से सवाल उठाने लगे।

कट्टरपंथियों के निशाने पर थे सलीम

सलीम लगातार हलाला जैसी प्रथाओं और समाज में फैली गलत परंपराओं के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उनका मानना था कि जब तक इन मुद्दों पर खुलकर चर्चा नहीं होगी, तब तक सुधार मुमकिन नहीं है। अपने इसी बेबाक अंदाज के कारण वे लंबे समय से कट्टरपंथी तत्वों के निशाने पर थे। उन्हें लगातार धमकियाँ और विरोध का सामना करना पड़ रहा था, जिसका नतीजा अंततः इस जानलेवा हमले के रूप में सामने आया। फिलहाल पुलिस इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।