बंगाल में SIR प्रक्रिया के बाद 66 लाख वोटर लिस्ट से बाहर, 60 लाख अभी भी विचाराधीन: अब राज्य में कुल 7.04 करोड़ मतदाता

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच शनिवार को जारी हुई नई मतदाता सूची ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। चुनाव आयोग के आँकड़ों के मुताबिक, राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या अब 7.04 करोड़ से अधिक है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 66 लाख नाम सूची से हटा दिए गए हैं।

इसके अलावा, लगभग 60.06 लाख मतदाता अभी ‘अंडर एडजुडिकेशन‘ यानी विचाराधीन श्रेणी में हैं। इसका मतलब है कि इन लोगों के वोट देने पर अभी आखिरी फैसला होना बाकी है।

क्यों और कैसे हुआ नामों का सफाया?

चुनाव आयोग के मुताबिक, यह 2002 के बाद की सबसे बड़ी सफाई प्रक्रिया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि इस दौरान करीब 58 लाख ऐसे फॉर्म मिले जिनके मतदाता या तो मर चुके हैं, या दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं, या फिर उनके नाम दो बार दर्ज थे। करीब 116 दिनों तक चली इस घर-घर जाँच के बाद सूची को ‘शुद्ध’ करने का दावा किया गया है। प्रक्रिया के दौरान 5.46 लाख नाम फॉर्म-7 के जरिए हटाए गए, जबकि 1.82 लाख नए नाम जोड़े भी गए हैं।

इन जिलों में मचा सबसे ज्यादा हड़कंप

मतदाता सूची में हुए इस बदलाव का असर पूरे राज्य में दिख रहा है। नदिया जिले में करीब 2.73 लाख और बांकुड़ा में 1.18 लाख नाम कटे हैं। उत्तर कोलकाता की सात सीटों पर तो 4.07 लाख नाम गायब हो गए हैं।

हुगली में 3.34 लाख नाम हटाए गए, जबकि अलीपुरद्वार में यह संख्या 1 लाख से ऊपर है। बंगाल में कई सीटें ऐसी हैं जहाँ हार-जीत का अंतर महज 2 से 3 हजार वोटों का होता है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना चुनावी नतीजों को पूरी तरह पलट सकता है।

ममता का विरोध और राजनीतिक घमासान

इस लिस्ट के आते ही बंगाल की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि यह बंगालियों को परेशान करने की साजिश है और संख्या 80 लाख तक जा सकती है। TMC नेता तन्मय घोष ने इसे लेकर कानूनी और राजनीतिक आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं, बीजेपी का कहना है कि दलों का काम केवल सही लिस्ट पर चुनाव लड़ना है, फायदा या नुकसान देखना नहीं। फिलहाल, लोग अपनी स्थिति जानने के लिए बीडीओ दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं क्योंकि पोर्टल पर अभी सॉफ्ट कॉपी अपडेट नहीं हुई है।