ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने देश और पूरी दुनिया के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अब ईरान की बागडोर किसके हाथों में जाएगी। लगभग 37 वर्षों तक कठोर शासन चलाने वाले खामेनेई की मौत की पुष्टि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सरकारी मीडिया ने की है।
इसके साथ ही ईरान में 40 दिनों के आधिकारिक शोक और सात दिनों की राष्ट्रीय छुट्टी की घोषणा कर दी गई है। ऐसे समय में जब हाल के वर्षों में ईरान को इजरायल के साथ 12-दिवसीय युद्ध और अंतरराष्ट्रीय दबावों का सामना करना पड़ा है, यह सत्ता परिवर्तन देश की आंतरिक राजनीति, क्षेत्रीय संतुलन और वैश्विक समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है।
सर्वोच्च नेता का चयन: असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की निर्णायक भूमिका
ईरान के संविधान के अनुसार, नए सर्वोच्च नेता का चुनाव 88 वरिष्ठ शिया मौलवियों की परिषद (असेमंबली ऑफ एक्सपर्ट्स) द्वारा किया जाता है। यही परिषद सर्वोच्च नेता को हटाने की शक्ति भी रखती है, हालाँकि अब तक ऐसा कभी नहीं हुआ।
इन सदस्यों का चुनाव हर आठ साल में होता है, लेकिन उनकी उम्मीदवारी पर अंतिम मुहर ईरान की संवैधानिक निगरानी संस्था गार्डियन काउंसिल (Guardian Council) लगाती है, जो अक्सर कई उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराती रही है।
मार्च 2024 में इसी परिषद ने पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी को असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के चुनाव से बाहर कर दिया था। इस वजह से उत्तराधिकार की प्रक्रिया अत्यंत नियंत्रित, जटिल और राजनीतिक संतुलनों से भरी होती है।
अंतरिम नेतृत्व परिषद: सत्ता में अस्थायी व्यवस्था
अगर नए सर्वोच्च नेता के चयन में देरी होती है, तो ईरानी कानून के तहत एक अंतरिम नेतृत्व परिषद सत्ता संभाल सकती है। इसमें देश के वर्तमान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian), न्यायपालिका प्रमुख गोलाम हुसैन मोहसेनी एजेई (Gholamhossein Mohseni Ejei) और गार्जियन काउंसिल का एक सदस्य शामिल होता है, जिसे एक्सपीडिएंसी काउंसिल नामित करती है।
यह परिषद अस्थायी रूप से सर्वोच्च नेता की सभी जिम्मेदारियाँ निभाती है, जिससे सत्ता का शून्य न बने और शासन व्यवस्था सुचारु बनी रहे। लंबे समय से यह अटकलें थीं कि खामेनेई के करीबी और पूर्व राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी उनके उत्तराधिकारी हो सकते हैं, लेकिन मई 2024 में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत ने यह संभावना समाप्त कर दी।
इसके बाद खामेनेई के बेटे मोजतबा खामनेई (Mojtaba Khamenei) का नाम चर्चा में आया। हालाँकि मोजतबा शिया मौलवी हैं, लेकिन उन्होंने कभी कोई सरकारी पद नहीं संभाला और न ही वे उच्च-स्तरीय मजहबी पद पर हैं। खुद खामेनेई भी कई बार यह कह चुके थे कि वे सत्ता को वंशानुगत नहीं बनाना चाहते।
शिया परंपरा में अब्बू से बेटे को सर्वोच्च पद सौंपना न केवल अलोकप्रिय माना जाता है, बल्कि इससे जनता और धार्मिक प्रतिष्ठान दोनों में असंतोष फैल सकता है। ईरान में सर्वोच्च नेता का अब तक केवल एक बार सत्ता हस्तांतरण हुआ है। 1989 में इस्लामी क्रांति के नेता रूहोल्लाह खुमैनी की मौत के बाद अयातुल्लाह अली खामेनेई इस पद पर पहुँचे थे।
अब दूसरी बार यह ऐतिहासिक बदलाव ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान हालिया युद्ध, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनावों से जूझ रहा है। इससे नए नेतृत्व पर देश को स्थिरता देने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर संतुलन साधने की भारी जिम्मेदारी होगी।
संभावित उत्तराधिकारी: पाँच नाम सबसे आगे
अमेरिकी मीडिया और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई ने अपने जीवनकाल में तीन नाम सुझाए थे, न्यायपालिका प्रमुख घोलाम-होसैन मोहसनी एजई, अपने चीफ ऑफ स्टाफ अली असगर हेजाजी और क्रांति के संस्थापक के पोते हसन खुमैनी (Hassan Khomeini) इसके अलावा विश्लेषकों ने कुल पाँच संभावित दावेदारों की सूची तैयार की थी:
अलीरेजा आराफी: असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष, गार्जियन काउंसिल के पूर्व सदस्य और ईरान की सेमिनरी प्रणाली के प्रमुख। मजहबी रूप से मजबूत, लेकिन सुरक्षा प्रतिष्ठान में सीमित प्रभाव।
मोहम्मद मेहदी मीरबागेरी: कट्टरपंथी विचारधारा के नेता, पश्चिम विरोधी और क़ुम स्थित इस्लामिक साइंसेज अकादमी के प्रमुख।
हसन खोमैनी: क्रांतिकारी विरासत के प्रतीक, अपेक्षाकृत उदार माने जाते हैं, लेकिन सुरक्षा तंत्र में सीमित पकड़।
हाशेम होसेनी बुशेहरी: असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के प्रथम उपाध्यक्ष, खामेनेई के करीबी, परंतु सार्वजनिक रूप से कम चर्चित।
मोजतबा खामेनेई: सर्वोच्च नेता के बेटे, पर धार्मिक पद और राजनीतिक अनुभव की कमी उनके लिए बड़ी चुनौती है।
सर्वोच्च नेता का चयन न केवल देश की आंतरिक राजनीति की दिशा तय करेगा, बल्कि मध्य पूर्व की भू-राजनीति और अमेरिका-ईरान संबंधों पर भी गहरा असर डालेगा।

