मिडिल ईस्ट में इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग लगातार खतरनाक होती जा रही है। अब तक ईरान के करीब 1000 सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं और 2000 से ज्यादा बम गिराए जा चुके हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि करते हुए साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लेंगे। इस युद्ध ने पूरे क्षेत्र में तबाही, राजनीतिक उथल-पुथल और वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है।
तेहरान समेत 10 शहरों पर भीषण हमले, ईरान में 200 से ज्यादा मौतें
इजरायल और अमेरिका ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कम से कम 10 बड़े शहरों को निशाना बनाया है। अब तक इन हमलों में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 740 से अधिक लोग घायल हुए हैं। सबसे दर्दनाक घटना एक स्कूल पर मिसाइल गिरने की रही, जिसमें 180 छात्राओं की जान चली गई और 45 गंभीर रूप से घायल हो गईं।
इजरायली सेना के मुताबिक, पहले 30 घंटों में ही 700 से अधिक फाइटर जेट उड़ानें भरी गईं और भारी मात्रा में बमबारी की गई। इस दौरान ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल अड्डों, संचार केंद्रों और भूमिगत बंकरों को नष्ट किया गया।
ईरान ने 9 देशों में अमेरिकी बेस पर किए हमले
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल समेत 9 देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इनमें कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, यूएई और जॉर्डन जैसे देश शामिल हैं। इन हमलों में 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई और 5 गंभीर रूप से घायल हुए।
इसके बाद ट्रम्प ने ऐलान किया कि ईरान को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी और सैन्य अभियान कई हफ्तों तक चल सकता है। अमेरिका और कई अरब देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की और इसे क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बताया।
पाकिस्तान में उबाल, विरोध प्रदर्शनों में 20 की मौत
खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। कराची, स्कर्दू और इस्लामाबाद में हुए प्रदर्शनों के दौरान 20 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए। हालात काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल करना पड़ा।
इस्लामाबाद में हजारों प्रदर्शनकारी संसद, सरकारी दफ्तरों और विदेशी दूतावासों के बाहर जमा हो गए। नारेबाजी, हिंसा और झड़पों ने पूरे इलाके को तनावपूर्ण बना दिया है। इधर वैश्विक स्तर पर इस युद्ध के चलते तेल बाजार, हवाई यातायात, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा है।
अमेरिकी सर्वे में भी बड़ी संख्या में लोगों ने इस युद्ध का विरोध किया है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच यह जंग अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गई है बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। हजारों हमले, सैकड़ों मौतें, सत्ता परिवर्तन और बढ़ता वैश्विक तनाव संकेत दे रहा है कि आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

