₹16 लाख करोड़ का टैरिफ लौटाना पड़ सकता है ट्रंप प्रशासन को, जज ने दिया आदेश: वसूली को कोर्ट ने बताया था अवैध

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को एक और कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने बुधवार (4 मार्च 2026) को फैसला सुनाते हुए कहा कि जिन कंपनियों ने ट्रंप प्रशासन द्वारा 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ का भुगतान किया था, उन्हें अब वह राशि वापस की जाएगी।

यह आदेश तब आया है जब पहले ही अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने इन टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है और साफ कर चुकी है कि टैक्स लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कॉन्ग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।

न्यूयॉर्क में तैनात जज रिचर्ड ईटन ने कहा कि सभी इम्पोर्टर्स ऑफ रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लाभ पाने के हकदार हैं और वे सरकार से रिफंड का दावा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि IEEPA के तहत वसूले गए टैरिफ की वापसी से जुड़े मामलों की सुनवाई अब उनका ही कोर्ट करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में रिफंड की प्रक्रिया साफ नहीं की थी, जिसे अब ट्रेड कोर्ट ने स्पष्ट किया है। यह मामला टेनेसी के नैशविल स्थित कंपनी एटमस फिल्ट्रेशन से जुड़ा था, जिसने पहले से चुकाए गए आयात शुल्क की वापसी की माँग की थी।

सामान्य प्रक्रिया के तहत अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) आयातित सामान पर अंतिम शुल्क तय करता है, जिसे ‘लिक्विडेशन’ प्रक्रिया कहा जाता है। आयातकों को 180 दिनों के भीतर इस पर आपत्ति दर्ज करने का अधिकार होता है।

कोर्ट ने आदेश दिया है कि जिन उत्पादों की यह प्रक्रिया अभी जारी है, उन पर IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ की वसूली तुरंत रोकी जाए, जबकि जिन मामलों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनमें दोबारा गणना कर यह शुल्क हटाया जाए।

पेन व्हार्टन बजट मॉडल के आंकड़ों के अनुसार, इन अब-अवैध घोषित टैरिफ से अमेरिकी सरकार ने दिसंबर मध्य तक 130 अरब डॉलर से अधिक की वसूली की थी और कुल रिफंड लगभग 175 अरब डॉलर(16 लाख करोड़ रुपए) तक पहुँच सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि लौटाना प्रशासनिक रूप से बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि अमेरिकी कस्टम्स सिस्टम इतने बड़े पैमाने पर रिफंड के लिए तैयार नहीं है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन इस फैसले को चुनौती दे सकता है या अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय मांग सकता है।

कोर्ट के एक पुराने फैसले में ट्रंप के टैरिफ को गैर-कानूनी बताया गया था

एक अन्य मामले में भी ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका लगा था, जब अमेरिकी कोर्ट ऑफ पाइल्स फॉर द फेडरल सर्किट ने आपातकाल के दौरान लगाए गए अधिकांश टैरिफ को अवैध करार दिया।

इस मामले में 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया था। ट्रंप प्रशासन ने इसी कानून के तहत लगभग हर देश से आने वाले सामान पर व्यापक टैरिफ लगाए थे। कोर्ट ने यह जाँचा कि क्या यह कानून वास्तव में राष्ट्रपति को इस तरह के टैक्स या शुल्क लगाने का अधिकार देता है।

7-4 के बहुमत से दिए गए फैसले में कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर टैरिफ लागू करना राष्ट्रपति के अधिकारों से परे है। जजों ने माना कि आपात स्थिति में राष्ट्रपति को व्यापक शक्तियाँ मिलती हैं, लेकिन कानून में कहीं भी स्पष्ट रूप से टैरिफ, ड्यूटी या इसी तरह के टैक्स लगाने की अनुमति नहीं दी गई है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि IEEPA का उद्देश्य विदेशी खतरों के दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करना था, जैसे प्रतिबंध लगाना या संपत्तियाँ फ्रीज करना न कि बड़े पैमाने पर टैरिफ थोपना।

फैसले के बाद डॉनल ट्रम्प ने कहा कि टैरिफ हटाना देश के लिए विनाशकारी होगा। हालाँकि कोर्ट ने तुरंत टैरिफ रद्द नहीं किए और प्रशासन को अमेरिका सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए समय दिया।

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