‘मैं जिंदा हूँ और आप गवाह’: मौत की अफवाहों के बीच लाइव आए नेतन्याहू, कहा- अब मिसाइल नहीं बना पाएगा ईरान, हमने तोड़ दी है कमर

इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण टकराव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू गुरुवार (19 मार्च 2026) की रात अचानक लाइव सामने आए और अपनी मौत की अफवाहों पर विराम लगा दिया। उन्होंने साफ कहा कि वह सुरक्षित हैं और युद्ध की स्थिति पर जानकारी दी और ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को लेकर बड़े दावे भी किए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने अपनी मौत की खबरों को खारिज करते हुए कहा, “मैं कहना चाहता हूँ कि मैं जिंदा हूँ और आप इसके गवाह हैं। अब जब मैंने इस फेक खबर का खंडन कर दिया है तो मैं आपको एक अपडेट देना चाहता हूँ। इस अभियान का उद्देश्य ईरानी शासन से जुड़े उन अस्तित्वगत खतरों को खत्म करना है, जिसने अमेरिका, इजरायल और ईरान के लोगों के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर रखी है।”

ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता खत्म

नेतन्याहू ने दावा किया कि लगातार सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की ताकत काफी कमजोर हो चुकी है। उन्होंने कहा, “अब 20 दिनों के बाद मैं आपको यह घोषणा कर सकता हूँ कि ईरान के पास यूरेनियम को एनरिच करने की कोई क्षमता नहीं है और न ही बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोई क्षमता है।”

उन्होंने कहा, “अयातुल्ला अली खामेनेई ने मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को फिर से शुरू करने और उन्हें जमीन के बहुत नीचे दबाने का आदेश दिया था। हम न केवल बची हुई मिसाइलों को नष्ट करने के लिए काम कर रहे हैं, जो कि अब कुछ ही बची हैं, बल्कि उन उद्योगों को भी नष्ट करने का काम कर रहे हैं जो इन कार्यक्रमों के उत्पादन को संभव बनाते हैं।”

ट्रंप को कोई नहीं बता सकता कि उन्हें क्या करना चाहिए: नेतन्याहू

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ तालमेल पर बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ईरान के प्रमुख गैस क्षेत्र पर आगे हमला नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “क्या सचमुच किसी को ऐसा लगता है कि कोई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह बता सकता है कि उन्हें क्या करना चाहिए? नहीं, ऐसा नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “ट्रंप हमेशा अपने फैसले इस आधार पर लेते हैं कि उन्हें अमेरिका के लिए क्या सही लगता है और अगर मैं इसमें कुछ जोड़ना चाहूँ तो यह भी कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए क्या सही है।”

इसी बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं, जिससे खाड़ी देशों के तेल और गैस प्रतिष्ठान भी निशाने पर आ गए हैं। युद्ध के 20 दिन पूरे होने के बाद हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है।