मिडिल ईस्ट युद्ध: जमीनी कार्रवाई की तैयारी में US, 3500 अतिरिक्त सैनिक किए तैनात; ईरान बोला- इलाके में मौजूद अमेरिका की यूनिवर्सिटीज को उड़ा देंगे

मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को बड़े स्तर पर बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, करीब 3500 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक क्षेत्र में तैनात किए गए हैं, जो 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के साथ 27 मार्च 2026 को USS त्रिपोली के जरिए पहुँचे।

इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, स्ट्राइक फाइटर जेट और उन्नत एम्फिबियस (amphibious) सैन्य संसाधन भी तैनात किए गए हैं, जिससे साफ है कि क्षेत्र में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं।

ईरान की अमेरिकी यूनिवर्सिटीज को धमकी, IRGC का अलर्ट

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी यूनिवर्सिटीज को निशाना बनाने की धमकी दी है। ईरानी मीडिया में जारी बयान में कहा गया कि अगर अमेरिका ने ईरान के विश्वविद्यालयों पर हुए हमलों की आधिकारिक निंदा नहीं की, तो क्षेत्र में स्थित अमेरिकी शैक्षणिक संस्थान जवाबी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

साथ ही छात्रों, शिक्षकों और आसपास रहने वाले लोगों को कैंपस से कम से कम एक किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी गई है। कतर में टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी और यूएई में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी जैसे कई अमेरिकी संस्थान इस क्षेत्र में संचालित हैं।

वहीं ईरान के तेहरान स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर हालिया हमलों में इमारतों को नुकसान पहुँचा, हालाँकि कोई हताहत नहीं हुआ।

बढ़ती सैन्य गतिविधि और हमलों का दायरा

अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सैन्य अभियान को भी तेज कर दिया है। 28 फरवरी से शुरू हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अब तक 11,000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है। USS त्रिपोली जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत, जिसमें करीब 2500 मरीन तैनात हैं, अब अपने ऑपरेशनल जोन में पहुँच चुका है।

यह जहाज F-35 स्टील्थ फाइटर जेट और ओस्प्रे जैसे एडवांस एयरक्राफ्ट ऑपरेट करने में सक्षम है। इसके अलावा USS Boxer और सैन डिएगो से अन्य नौसैनिक यूनिट्स को भी क्षेत्र में भेजा जा रहा है। इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इस संघर्ष में कूदते हुए इजरायल की ओर मिसाइल दागने का दावा किया है।

इससे बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य और स्वेज नहर जैसे अहम समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है, जबकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद होने से वैश्विक व्यापार और हवाई मार्गों पर भी असर दिखने लगा है।

कूटनीति नाकाम, जमीनी ऑपरेशन की तैयारी

हालाँकि अमेरिका की ओर से कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने सीजफायर का प्रस्ताव दिया था, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक और समुद्री रास्ते खोलने की बात शामिल थी, लेकिन ईरान ने इसे खारिज करते हुए मुआवजे और अपनी संप्रभुता की मान्यता की माँग रखी।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि अमेरिका बिना जमीनी सैनिक उतारे अपने लक्ष्य हासिल करना चाहता है लेकिन बदलते हालात में सभी विकल्प खुले रखे गए हैं।

वहीं  रिपोर्ट्स के मुताबिक पेंटागन ईरान में सीमित जमीनी ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है, जिसमें खार्ग द्वीप और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास के ठिकानों पर स्पेशल फोर्सेज के जरिए छापेमारी शामिल हो सकती है। हालाँकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इस तरह की कार्रवाई को मंजूरी नहीं दी है लेकिन तैयारियाँ काफी आगे बढ़ चुकी हैं।