‘दुनिया ने हमेशा मत-मजहब के नाम पर टकराव देखा’: गुजरात में PM मोदी ने किया सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन, देशवासियों के सामने रखे 10 संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (31 मार्च 2026) महावीर जयंती के पावन अवसर पर अपने गृह राज्य गुजरात के गांधीनगर (कोबा) में ‘सम्राट संप्रति संग्रहालय’ का उद्घाटन किया। PM मोदी ने देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह म्यूजियम जैन दर्शन और भारतीय संस्कृति का एक ऐसा केंद्र है, जो हमारी प्राचीन धरोहरों को नई पीढ़ी तक आधुनिक रूप में पहुँचाएगा।

सम्राट अशोक के पोते सम्राट संप्रति को याद करते हुए PM ने कहा कि जहाँ दुनिया में कई शासकों ने हिंसा को हथियार बनाया, वहीं सम्राट संप्रति ने राजसिंहासन पर बैठकर भी अहिंसा और सत्य का विस्तार किया। PM मोदी ने बताया कि दुनिया ने हमेशा मत, मजहब और आस्था के नाम पर टकराव देखे हैं लेकिन इस म्यूज़ियम में भारत के सभी धर्मों के गौरवशाली दर्शन होते हैं।

विरासत को बचाने के लिए ‘ज्ञान भारतम मिशन’

PM मोदी ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले की सरकारों ने प्राचीन पांडुलिपियों (Manuscripts) को सहेजने में लापरवाही बरती। इसे सुधारने के लिए अब ‘ज्ञान भारतम मिशन’ शुरू किया गया है।

आधुनिक टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक तरीकों से पुरानी पांडुलिपियों को डिजिटल बनाया जा रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़ी रहें। पीएम ने कहा कि भारत में ज्ञान का प्रवाह हमेशा से मुक्त रहा है और इसे सहेजना हमारा कर्तव्य है।

PM मोदी के 10 संकल्प

इस खास मौके पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों के सामने 10 संकल्प रखे, जिनमें पानी बचाना, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ लगाना, स्वच्छता, वोकल फॉर लोकल, देश दर्शन (टूरिज्म), प्राकृतिक खेती, स्वस्थ जीवनशैली, योग/खेल, गरीबों की मदद और भारत की विरासत को सहेजना शामिल है।

जैन संतों ने की PM की जमकर तारीफ

इस मौके पर जैनाचार्य श्री पद्मसागर सूरीश्वर जी महाराज ने प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि कोरोना काल से लेकर युद्ध के समय तक, PM मोदी ने हमेशा देशवासियों की फिक्र की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की गद्दी पर कई लोगों ने राज किया, लेकिन पीएम मोदी की कार्यशैली सबसे अलग है।

क्या खास है इस संग्रहालय में?

सम्राट संप्रति संग्रहालय में सदियों पुरानी दुर्लभ कलाकृतियों को सहेज कर रखा गया है। यहाँ पत्थर और धातुओं से बनी बारीक नक्काशी वाली मूर्तियाँ, प्राचीन सिक्के, चाँदी के रथ और दुर्लभ पांडुलिपियाँ (पुरानी किताबें) मौजूद हैं। यह स्थान आने वाले समय में ज्ञान और शोध का एक बड़ा केंद्र बनेगा, जहाँ लोग भारत की प्राचीन विरासत को करीब से देख सकेंगे।