जिस पादरी के ‘ईसाइयत एकमात्र धर्म है’ वाले बयान से हुए हिंदू आहत, उसे सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत: आपराधिक कार्रवाई पर लगी रोक, UP सरकार को भी नोटिस जारी

ईसाई धर्म को एकमात्र सच्चा धर्म बताने वाले एक पादरी के खिलाफ दर्ज मामले में शुक्रवार (10 अप्रैल 2026) को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए रेवरेंड फादर विनीत विंसेंट परेरा के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी है और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें पादरी ने अपने खिलाफ दर्ज केस, दाखिल चार्जशीट और ट्रायल कोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले में सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक निचली अदालत में चल रही ट्रायल प्रक्रिया स्थगित रहेगी।

पादरी पर आरोप है कि उसने अपने प्रार्थना सभा के दौरान बार-बार कहा था कि केवल ईसाई धर्म ही सच्चा धर्म है, जिससे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। इसी आधार पर उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295ए के तहत केस दर्ज हुआ था। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पादरी के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहाँ किसी भी धर्म को यह कहने का अधिकार नहीं है कि वही एकमात्र सच्चा धर्म है। ऐसा कहना अन्य धर्मों का अपमान करने के बराबर माना जा सकता है।