165 sq km का इलाका, 94 कॉलोनियाँ और डर में 15 लाख परिवार: समझिए- क्या है दिल्ली का O-Zone, जिसमें बुलडोजर एक्शन की तैयारी

दिल्ली में यमुना के किनारे बसे ओ-जोन (O-Zone) की कॉलोनियों को लेकर खतरा मंडरा रहा है। यहाँ 94 कॉलोनियों में रहने वाले 15 लाख परिवारों के मकानों पर कभी भी बुलडोजर चल सकता है। इसके लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) कई बार अदालत का रुख भी कर चुकी है।

दिल्ली के गढ़ी मांडू, ओल्ड उस्मानपुर, सोनिया विहार जगतपुर वजीराबाद और कई अन्य इलाकों में ओ-जोन के बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिससे लोग डरे हुए हैं कि कहीं DDA की कार्रवाई उनके मकानों तक न पहुँच जाए। इसीलिए अब यह विवाद राजनीतिक मोड़ भी ले रहा है।

AAP ने दिल्ली की BJP सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ मौखिक आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि संसद में कानून बनाकर इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को कानूनी सुरक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने माँग की कि BJP की केंद्र सरकार संसद में विशेष कानून लाकर साफ करे कि ओ-जोन की इन बस्तियों को कोई नहीं उजाड़ेगा। उनका कहना है कि जब तक कानून नहीं बनेगा, तब तक लोगों को राहत नहीं मिलेगी।

क्या है ओ-जोन?

दरअसल, ओ-जोन यमुना नदी और उसके आसपास का वह इलाका है, जिसे पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के तहत वजीराबाद से ओखला तक करीब 165 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इस श्रेणी में रखा गया था और यहाँ निर्माण गतिविधियों पर कई तरह की पाबंदियाँ लागू हैं। इसी वजह से समय-समय पर इन कॉलोनियों पर कार्रवाई की आशंका जताई जाती रही है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इन 91 से 94 कॉलोनियों में रहने वाले करीब 15 लाख परिवार इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं उनके घरों पर बुलडोजर न चल जाए। लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ रह रहे हैं, उनके पास बिजली-पानी के कनेक्शन हैं और उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई से ये मकान बनाए हैं। ऐसे में अगर इन्हें हटाने की कार्रवाई होती है तो लाखों लोगों के सामने रहने का संकट खड़ा हो जाएगा।