भारतीय नौसेना ने 36 वर्षों तक अदम्य सेवा देने के बाद अपने प्रतिष्ठित सी किंग एमके-42बी (Sea King Mk 42B) ‘फ्लाइंग फ्रिगेट’ हेलिकॉप्टर स्क्वाड्रन (आईएनएएस 330 हारपून) को आधिकारिक तौर पर रिटायर कर दिया है।
मुंबई के कोलाबा स्थित नौसैनिक एयर स्टेशन ‘आईएनएस शिक्रा’ (INS Shikra) पर इस हेलिकॉप्टर को आधिकारिक तौर पर नंबर-प्लेटेड यानी निष्क्रिय किया गया। इससे पहले हेलिकॉप्टर ने अपनी अंतिम उड़ान भरी, उसे दो सी किंग चार्ली हेलिकॉप्टरों ने एस्कॉर्ट किया। जब हेलिकॉप्टर अपनी आखिरी उड़ान पर था, तो उसे फायर टेंडरों की ओर से वॉटर केनन सलामी दी गई।
एंटी सबमरीन और जहाज-रोधी (Anti-ship) अभियानों में इस हेलिकॉप्टर ने अहम भूमिका निभाई। इसे भारतीय सेना में 1989-90 में शामिल किया गया था। उस वक्त यह दुनिया के आधुनिकतम हेलिकॉप्टर में एक गिना जाता था।
इनके रिटायरमेंट के बाद नौसेना की ताकत को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए इनकी जगह अमेरिका से मँगाए गए अत्याधुनिक एमएच-60आर ‘रोमियो’ (MH-60R Romeo) हेलिकॉप्टरों को शामिल किया गया है। एमएच-60 रोमियो दुनिया के सबसे उन्नत मल्टी-रोल और पनडुब्बी-रोधी हेलिकॉप्टरों में से एक है।
यह हेलिकॉप्टर आधुनिक रडार, ‘डिबिंग सोनार’ और मिसाइलों से लैस है, जो पानी के नीचे छिपी पनडुब्बियों को आसानी से खोजकर नष्ट कर सकता है। नौसेना ने अपनी मारक क्षमता को बढ़ाते हुए इसे गोवा के ‘आईएनएस हंसा’ बेस पर तैनात किया है।

