दुनिया के सबसे पुराने मेडिकल संस्थान ने भी माना महर्षि सुश्रुत को ‘सर्जरी का जनक’: ब्रिटेन के कॉलेज में लगी 90 किलो की भव्य मूर्ति, युवाओं के लिए स्कॉलरशिप का भी ऐलान

‘मॉडर्न प्लास्टिक सर्जरी के पायनियर’ और ‘सर्जरी के जनक’ महर्षि सुश्रुत की 90 किलोग्राम की काँसे की मूर्ति का हाल ही में यूनाइटेड किंगडम में अनावरण किया गया। यह अनावरण भारत की प्राचीन चिकित्सा विरासत और ‘सुश्रुत संहिता’ को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने की दिशा में अहम पहल कहा जा रहा है।

शुक्रवार (20 जून 2026) को दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े सर्जिकल इंस्टीट्यूशन ‘रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग’ (RCSEd) के ऐतिहासिक प्लेफेयर ऑडिटोरियम में स्थापित की गई है। ब्रिटेन में 1505 ईस्वी में इस संस्थान की स्थापना की गई थी। इसके 140 से ज्यादा देशों में 33000 से ज्यादा सदस्य हैं।

यह इवेंट UK में रहने वाले तेलुगु मूल के सर्जन प्रोफेसर चंद्र चेरुवु की अगुवाई में आयोजित किया गया था। उनकी कोशिशों की वजह से दुनिया भर में अब महर्षि सुश्रुत को ‘सर्जरी के जनक’ के तौर पर जाना जाता है।

कार्यक्रम के दौरान ‘चेरुवु फैमिली लीगेस ग्रांट’ ने ट्रैवलिंग सर्जिकल स्कॉलरशिप की भी घोषणा की। इसका मकसद युवा सर्जनों को वैश्विक स्तर पर उनकी पहचान बनाने में मदद करना और उनकी क्षमता को निखारना है।

प्रोफेसर चेरुवु और उनके परिवार के अलावा, इस इवेंट में सिद्धार्थ मलिक (एडिनबर्ग में भारत के कॉन्सुल जनरल), प्रोफेसर रोवन पार्क्स (पूर्व प्रेसिडेंट), प्रोफेसर क्लेयर मैकनॉट (रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग के प्रेसिडेंट), और प्रोफेसर मार्क हैल्पर्न (कैलिफ़ोर्निया कॉलेज ऑफ आयुर्वेद के फाउंडर) के साथ-साथ USA, भारत और UK के कई जाने-माने लोग शामिल हुए।

मूर्ति के अनावरण के मौके पर प्रोफेसर चेरुवु ने स्वलिखित ‘महर्षि सुश्रुत: ए कम्पेंडियम – फादर ऑफ़ सर्जरी’ नाम की साक्ष्य पर आधारित किताब को रिलीज किया। मूर्ति और किताब दोनों को स्वीकार करके, रॉयल कॉलेज ऑफ़ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग ने एक तरह से मान्यता दे दी कि महर्षि सुश्रुत ही सच में ‘सर्जरी के फादर’ हैं।

महर्षि सुश्रुत प्राचीन भारत के महान चिकित्सा शास्त्री और शल्य चिकित्सक थे। उनकी लिखी सुश्रुत संहिता में शल्य चिकित्सा पद्धति का वर्णन है। इसमें प्लास्टिक सर्जरी की जानकारी भी मिलती है। उन्होंने इसे 2500 साल पहले 600 ईसा पूर्व में लिखा था। सुश्रुत संहिता आयुर्वेद और शल्य चिकित्सा का एक विश्व प्रसिद्ध और प्रामाणिक ग्रंथ है। इसमें 1100 से अधिक बीमारियों और 300 से अधिक सर्जरी प्रक्रिया का विस्तार से उल्लेख है। इसलिए उन्हें ‘सर्जरी का पितामह’ और ‘प्लास्टिक सर्जरी का जनक’ भी कहा जाता है।