एक दफा फिर सूर्य उदय हुआ। यह एक और नया दिन था। आज मेक्सिको, अमेरिका व कनाडा की भूमि में फीफा विश्व कप के ग्रुप स्टेज के कई मैच खेले जाने थे।
सर्वप्रथम, चेक रिपब्लिक का सामना दक्षिण अफ्रीका से होने जा रहा था। इस मैच में कुछ भी हो सकता था। मैच शुरू होते ही छठे मिनट में चेक रिपब्लिक के लिए 27 वर्षीय मिडफील्डर मिखाल सादिलेक गोल कर टीम को बढ़त दिला देते हैं। खैर, खेल आगे बढ़ता है। पहले हाफ की समाप्ति पर स्कोर 1-0 ही रहता है। दोनों टीमें गोल करने के प्रयास में लगी रहती हैं, परंतु धीरे-धीरे समय बीतता जाता है। अचानक, मैच के 82वें मिनट में अपने ही गोलपोस्ट के समीप एक फाउल कर चेक रिपब्लिक की टीम दक्षिण अफ्रीका को पेनाल्टी का सुनहरा अवसर दे देती है। इस मौके को भुनाने में मोकोएना कोई गलती नहीं करते और पेनाल्टी को सफलतापूर्वक गोल में तब्दील कर अंतिम क्षणों में दक्षिण अफ्रीका की मैच में वापसी करा देते हैं। गौरतलब है कि उम्मीदों के विपरीत इस मैच में 61 प्रतिशत समय गेंद दक्षिण अफ्रीका के पास रही। साथ ही उन्होंने विरोधी गोलपोस्ट पर 17 दफा हमले किए। परंतु मैच 1-1 की बराबरी पर समाप्त हो जाता है। एक दफा फिर इस टूर्नामेंट में एक और मैच ड्रॉ रहता है।
आगे, लॉस एंजेलिस स्टेडियम में स्विट्जरलैंड का मुकाबला बोस्निया एवं हर्ज़ेगोविना की टीम से था। बोस्निया की टीम उम्रदराज एडिन जेको के नेतृत्व में इस टूर्नामेंट में उतरी है। वहीं, कोबेल, अकांजी, झाका व एम्बोलो जैसे खिलाड़ियों से लैस स्विस खेमा जीत के लिए भूखा नजर आ रहा था। मैच के पहले हाफ में दोनों टीमें कोई गोल करने में नाकाम रहती हैं।
दोनों टीमें, खासकर स्विट्जरलैंड, प्रयास तो कर रही थीं, परंतु स्कोर अब भी 0-0 ही था। फिर, स्विस कोच मैच के 71वें मिनट में एक साथ तीन बदलाव करते हैं। यह देखकर कि बोस्निया के खिलाड़ी थक चुके हैं, वे 20 वर्षीय मनजाम्बी को भी मैदान में भेजते हैं। उनका यह फैसला मैच को बदलकर रख देता है। 74वें मिनट में ही मनजाम्बी विरोधी गोलपोस्ट से लगभग 15 मीटर की दूरी से पोस्ट की दाईं ओर निशाना लगाते हैं। वे गोल करने में सफल हो जाते हैं और इस गोल के साथ स्विट्जरलैंड को 1-0 की अहम बढ़त दिला देते हैं। थोड़ी देर बाद बोस्निया के मुहारेमोविक को फाउल करने पर रेफरी रेड कार्ड दिखा देते हैं। इसका लाभ स्विट्जरलैंड को मिलता है। एक अन्य स्थानापन्न खिलाड़ी वारगास, साथी खिलाड़ी एम्बोलो से असिस्ट पाकर, अपनी टीम के लिए गोल करने में सफल हो जाते हैं। स्कोर 2-0 हो जाता है।
फिर, 90वें मिनट में इस बार वारगास गेंद को गोलपोस्ट के समीप मनजाम्बी के लिए परोसते हैं, जो गोल करने में कोई गलती नहीं करते। स्कोर 3-0 हो जाता है। स्विस टीम अंतिम क्षणों में भी गोलों की बौछार कर रही थी। इसके बाद बोस्निया के कोच अरमिन माहमिक को मैदान में भेजते हैं, जो मैदान में उतरते ही बोस्निया के लिए एक गोल कर देते हैं। स्कोर 3-1 हो जाता है। मैच के 90+6वें मिनट में स्विस स्थानापन्न खिलाड़ी जिब्रिल सौ को विरोधी गोलपोस्ट के पास फाउल कर दिया जाता है। टीम को पेनाल्टी मिलती है, जिसे अनुभवी कप्तान ग्रानित झाका गोल में तब्दील कर स्कोर 4-1 कर देते हैं। मैच इसी स्कोरलाइन पर समाप्त हो जाता है।
फिर, कनाडा के खिलाड़ी अपने घरेलू दर्शकों के सामने वैंकूवर में कतर की टीम से मुकाबला करते नजर आए। इस मैच में अपनी टीम को खेलते देखने के लिए लगभग साढ़े बावन हजार दर्शक स्टेडियम में मौजूद थे। यह मैच शुरुआत से ही एकतरफा रहा। कनाडा के खिलाड़ियों ने मैच की शुरुआत से ही कतर को संभलने का मौका नहीं दिया। अपने स्टार स्ट्राइकर जोनाथन डेविड की हैट्रिक की बदौलत कनाडा यह मैच 6-0 से जीतकर अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान पर रहने की मजबूत दावेदारी पेश कर चुका है।
यह मात्र तीसरी बार है जब कनाडा फीफा विश्व कप का हिस्सा है और यह विश्व कप में उसकी पहली जीत भी है। अब लगभग निश्चित है कि पहली बार कनाडा ग्रुप स्टेज से आगे का सफर तय करेगा। यह निश्चित ही जश्न का समय होना चाहिए था। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं।
24 वर्षीय स्टार कनाडाई मिडफील्डर इस्माइल कोने को दूसरे हाफ की शुरुआत में विपक्षी खिलाड़ी के फाउल के चलते गंभीर चोट लग जाती है। उनकी टांग में मल्टिपल फ्रैक्चर हो जाते हैं। वे दर्द से कराह रहे थे।
रेफरी तुरंत खेल रोककर मेडिकल टीम को बुलाते हैं। टीम के इस अहम खिलाड़ी पर हुए गंभीर फाउल के चलते दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच झड़प हो जाती है। कोने को स्ट्रेचर पर मैदान से बाहर ले जाया जाता है। यह चोट इतनी गंभीर है कि अब उनका विश्व कप अभियान समाप्त हो गया है। दर्द से कराहते हुए भी इस्माइल कोने स्ट्रेचर से ही हाथ हिलाकर दर्शकों का अभिवादन स्वीकार करते हैं और जाते-जाते सभी को सांत्वना भी देते हैं। यह दृश्य सभी दर्शकों को भावुक कर देता है। नाथन सलीबा घायल इस्माइल कोने की जगह मैदान में आते हैं। और जैसे ही नाथन सलीबा मैच के 64वें मिनट में गोल दागकर घायल साथी खिलाड़ी इस्माइल कोने की जर्सी हाथों में लेकर हवा में लहराते हैं, कोच जेसी मार्श की आंखें भीग जाती हैं। यही तो इस खेल का जादू है, जिसकी हम अक्सर बात करते हैं। कहते हैं, फुटबॉल कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। यह एक पल आपको हंसाता है और अगले ही पल आपको रोने पर मजबूर कर देता है।
आगे, आज सुबह साढ़े छह बजे मेक्सिको की टीम अपने ही घर में दक्षिण कोरिया से दो-दो हाथ करती नजर आई। अपने घरेलू दर्शकों के अपार समर्थन के चलते मेक्सिको यह मैच 1-0 से जीतने में सफल रही और इस जीत के साथ ही वह ग्रुप ए की विजेता के तौर पर टूर्नामेंट के अगले दौर में जगह बनाने वाली पहली टीम बन गई है। क्योंकि दक्षिण कोरिया अपना पिछला मैच जीत चुकी थी, इसलिए उसके पास अभी भी अगले दौर में जगह बनाने का मौका है।
अब आगे, भारतीय समयानुसार आज रात साढ़े बारह बजे सिएटल स्टेडियम में घरेलू समर्थकों की सेना के साथ क्रिश्चियन पुलिसिक की अमेरिकी टीम का सामना होगा ऑस्ट्रेलिया से, जिसने इस टूर्नामेंट का एक बड़ा उलटफेर किया है। ऑस्ट्रेलिया अपने पिछले मैच में तुर्की की अनुभवी टीम को 2-0 से हरा चुकी है। वहीं, अमेरिका ने पैराग्वे को 4-1 से परास्त किया था। ऐसे में एक जोरदार मुकाबले की पूरी संभावना है।
वहीं, बोस्टन स्टेडियम में ग्रुप सी के मुकाबले में स्कॉटलैंड को मजबूत इरादों वाली मोरक्को की टीम से भिड़ना होगा। यह मैच आप दोनों टीमों के जज्बे और जिद के लिए देख सकते हैं।
और कल सुबह, भारतीय समयानुसार साढ़े छह बजे, फिलाडेल्फिया में ब्राजील अपेक्षाकृत कमजोर हैती की टीम के खिलाफ मैदान में उतरेगी। अगले दौर में जगह बनाने के लिए उसे यह मैच अच्छे अंतर से जीतना ही होगा। जहां तक खबर है, चोटिल नेमार एक बार फिर टीम का हिस्सा नहीं होंगे। एक दफा फिर ब्राजील को जिताने की जिम्मेदारी विनीसियस जूनियर के कंधों पर होगी। कोच कार्लो एंसेलोटी के विश्व कप दल में मेहनती युवा सेंटर फॉरवर्ड जाओ पेड्रो के स्थान पर चोटिल नेमार को तरजीह देने के फैसले की चारों ओर आलोचना हो रही है, क्योंकि पिछले मैच में हमने देखा कि इगोर थियागो पूरी तरह असफल रहे थे। इस मैच से पहले आज की रात निश्चित ही कोच कार्लो के लिए एक बड़ी रात होगी।
फिर, कल सुबह साढ़े आठ बजे, अपना पिछला मैच हार चुकी ग्रुप डी की दो टीमें, तुर्की और पैराग्वे, सांता क्लारा के सैन फ्रांसिस्को स्टेडियम में आमने-सामने होंगी। दोनों ही जीत के लिए लालायित रहेंगी। तुर्की के लिए युवा अर्दा गुलेर अहम भूमिका निभाएंगे।
आगे, जापान के विरुद्ध अपना पिछला मैच ड्रॉ खेलने वाली रोनाल्ड कोमान की नीदरलैंड्स का सामना होगा ट्यूनीशिया को 5-1 से रौंद चुकी स्वीडन की आक्रामक टीम से। एक दफा फिर ग्योकेरेस, इसाक और अयारी जैसे अटैकर्स से लैस स्वीडन मैच जीतकर अगले दौर में जगह बनाना चाहेगी। पिछला मैच ड्रॉ रहने के चलते नीदरलैंड्स पर निश्चित रूप से अतिरिक्त दबाव रहेगा। यह भी एक बेहतरीन मुकाबला होगा।
यूं ही कई महत्वपूर्ण मैच हमारा इंतजार कर रहे हैं। कई खूबसूरत कहानियां सदैव के लिए अमर होने का इंतजार कर रही हैं। बने रहिए साथ। फुटबॉल का सिलसिला जारी रहेगा।


