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जो कभी AIMIM-कॉन्ग्रेस का रहा था प्रचार, उसके पोस्टर अब CJP के प्रदर्शन में चमके: जानिए कौन है US से युवाओं को भड़काने और पुलिस को धमकाने वाला उस्मान अली?

जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में अमेरिका के उस्मान अली के पोस्टर दिखाई दिए। वही उस्मान अली, जो विदेश में बैठकर भारत के युवाओं को भड़का रहा है। उसके सोशल मीडिया हिस्ट्री से पता चलता है कि वह AIMIM और कॉन्ग्रेस सपोर्टर भी है।

जैसा कि 20 जून 2026 को दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर विवादित NEET मुद्दे पर नए विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन गया, तो इसी बीच ऑपइंडिया ने अमेरिका में रहने वाले सोशल मीडिया ‘एक्टिविस्ट’ की प्रदर्शनों में छाप का पता लगाया। इसमें पता चला कि उसका असर सिर्फ डिजिटल दुनिया तक ही सीमित नहीं था बल्कि दिल्ली की सड़कों तक भी फैला हुआ था।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का यह प्रदर्शन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सरकार के खिलाफ NEET से जुड़ी शिकायतों को लेकर युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित कर एक आंदोलन की तरह पेश किया गया। लेकिन ग्राउंड रिपोर्टिंग में ऐसे सबूत मिले कि इस आंदोलन को ऐसे लोग हवा दे रहे थे जिनका इसमें कोई सीधा मतलब भी नहीं निकलता था औऱ हजारों मील दूर से युवाओं को उकसा रहे थे।

ऐसा ही एक व्यक्ति उस्मान फैजान अली का नाम सामने आया, जो अमेरिका में रहता है और खुद को सोशल मीडिया एक्टिविस्ट बताता है। वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारतीय युवाओं को भड़काने, उन्हें संगठित करने और अधिकारियों के साथ टकराव के लिए भावनात्मक रूप से प्रेरित करने का काम कर रहा था।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कई लोग ऐसे पोस्टर और प्लेकार्ड लिए हुए दिखाई दिए, जिन पर सोशल मीडिया कमेंटेटर ध्रुव राठी, एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके और अभिनेत्री राखी सावंत की तस्वीरें लगी थीं। लेकिन इन पोस्टरों को ध्यान से देखने पर एक खास बात सामने आई। कई पोस्टरों पर एक दाढ़ी वाले व्यक्ति की तस्वीर भी प्रमुखता से छपी हुई थी, जिसकी पहचान ‘इंडियन उस्मान फैजान अली- फ्रॉम USA’ के रूप में की गई थी।

इस खुलासे के बाद कई सवाल खड़े हो गए। सबसे बड़ा सवाल यह था कि जिस प्रदर्शन को छात्रों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का आंदोलन बताया जा रहा था, उसमें विदेश में रहने वाले एक ‘एक्टिविस्ट’ की तस्वीर वाले पोस्टर आखिर क्यों दिखाई दे रहे थे? और उससे भी जरूरी बात यह है कि उन पोस्टरों को लेकर चल रहे लोगों में से कितने लोग वास्तव में जानते थे कि उस्मान फैजान अली कौन हैं?

जब ऑपइंडिया ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कई प्रदर्शनकारियों से बात की, तो उनके जवाब चौंकाने वाले थे। कई लोगों ने माना कि उन्हें उस्मान फैजान अली के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। एक युवा प्रदर्शनकारी ने खुलकर बताया कि उसे यह पोस्टर आयोजकों की तरफ से दिया गया था और उसे यह भी नहीं पता था कि पोस्टर पर जिसकी तस्वीर लगी है, वह कौन है। अन्य प्रदर्शनकारियों से भी इसी तरह के जवाब मिले।

यह विरोधाभास एक व्यापक रणनीति की ओर इशारा करता है। अली किसी आंदोलन को स्वाभाविक रूप से खड़ा करने के बजाए उसे हाईजैक करने की कोशिश करते दिख रहे हैं, आक्रोश पैदा कर रहे हैं और जमीनी स्तर पर आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं को सुनियोजित प्रचार सामग्री वितरित करके जनता के गुस्से को निर्देशित कर रहे हैं।

उनकी सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर डालने से भी ऐसा ही पैटर्न दिखाई देता है। उस्मान अली मुख्य रूप से @bbm_india_ नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए सक्रिय हैं और पिछले कई हफ्तों से CJP के प्रदर्शनों से जुड़ी बेहद भावनात्मक और उग्र कंटेन्ट साझा कर रहे हैं। उस्मान के वीडियो सिर्फ प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने तक सीमित नहीं हैं। इनमें बार-बार यह माहौल बनाने की कोशिश की जाती है कि यह आंदोलन नाराज युवाओं और भारतीय सरकार के बीच एक बड़ी लड़ाई है।

उस्मान के कंटेंट में भावनात्मक भाषा, आक्रामक संदेश और युवाओं को यह विश्वास दिलाने की कोशिश बार-बार दिखाई देती है कि वे किसी ऐतिहासिक आंदोलन का हिस्सा हैं। इसका उद्देश्य साफ नजर आता है। किसी सार्वजनिक मुद्दे को लेकर लोगों की नाराजगी को बड़े पैमाने पर ऐसे आंदोलन में बदलना, जो गुस्से और टकराव से प्रेरित हो।

इसका एक प्रमुख उदाहरण 1 जून 2026 को देखने को मिला, जब उस्मान अली ने दिल्ली पुलिस को संबोधित करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया। इस वीडियो में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील करने के बजाय चेतावनी जैसा लहजा दिखाई दिया। उन्होंने दिल्ली पुलिस से कहा कि CJP कार्यकर्ताओं और अभिजीत दिपके के समर्थकों को जंतर-मंतर पर जुटने की अनुमति देने से पहले बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाए।

वीडियो में उन्होंने बार-बार लोगों की ऐसी ‘सुनामी’ आने की बात कही, जिसे रोकना या नियंत्रित करना अधिकारियों के लिए मुश्किल होगा। उस्मान अली के बयान में यह संदेश देने की कोशिश दिखाई दी कि भीड़ इतनी बड़ी होगी कि प्रशासन के किसी भी प्रयास को पीछे छोड़ सकती है।

यहाँ उस्मान की भाषा काफी ध्यान देने वाली थी। शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देने के बजाय, उस्मान अली ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है कि जिससे टकराव पैदा हो। CJP के समर्थकों तक यह संदेश पहुँचाने की कोशिश की गई कि वे एक ऐसी ताकत का हिस्सा हैं जो सरकार को चुनौती देने की क्षमता रखती है।

इस तरह की भावनात्मक और आक्रामक भाषा का इस्तेमाल अक्सर वे लोग करते हैं जो भीड़ को भावनात्मक रूप से भड़काना चाहते हैं और समर्थकों को धीरे-धीरे अधिक आक्रामक रवैया अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।

स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि ये संदेश विदेश में बैठे एक व्यक्ति की ओर से दिए जा रहे थे। एक तरफ भारतीय युवाओं को सड़कों पर उतरने, पुलिस कार्रवाई का सामना करने और कानूनी जोखिम उठाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ इन संदेशों को देने वाला व्यक्ति खुद विदेश में सुरक्षित माहौल में मौजूद था और किसी भी संभावित परिणाम से दूर था।

उस्मान अली का चिट्ठा सिर्फ इतना ही नहीं है। जब से CJP को सोशल मीडिया पर पहचान और समर्थन मिलने लगा, तब से वह ‘कॉकरोचेज’ को संगठित और सक्रिय करने के लिए लगातार ऐसे भड़काऊ पोस्ट साझा कर रहा है। बीते दिन भी उस्मान ने एक नया वीडियो पोस्ट किया, जिसमें जमीन पर चल रही घटनाओं को प्रभावित करने की कोशिश दिखाई दी। इस बार उन्होंने सार्वजनिक रूप से दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से प्रदर्शन की अनुमति देने की अपील की। हालाँकि इस अपील के साथ एक अप्रत्यक्ष चेतावनी जैसा संदेश भी जुड़ा हुआ था।

वीडियो में बार-बार यह संकेत दिया गया कि अगर प्रदर्शनकारियों को रोका गया, तो इससे अशांति और अस्थिरता की स्थिति पैदा हो सकती है। इस तरह के संदेशों के जरिए उस्मान ने प्रशासन पर दबाव बनाने और समर्थकों के बीच तनावपूर्ण माहौल तैयार करने की कोशिश की।

यह अली का ऐसा तरीका है जिससे वह खुद को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराए जाने से बचा लेता है, लेकिन लोगों की भावनाओं को भड़काता भी रहता है। वह खुलकर हिंसा की बात नहीं करता, लेकिन बार-बार ऐसा माहौल बनाता है कि अगर प्रशासन कोई कार्रवाई करेगा तो टकराव होना तय है। इसका असर यह होता है कि लोगों में तनाव बढ़ता है, पुलिस और प्रशासन पर भरोसा कम होता है और उसके समर्थक हर सरकारी कार्रवाई को अपने ऊपर अत्याचार की तरह देखने लगते हैं। और यह सब वह अमेरिका में बैठकर कर रहा है, जबकि खुद को भारत में लोकतंत्र बचाने की लड़ाई लड़ने वाला बताता है।

अली की सोशल मीडिया गतिविधियों को देखने पर लगता है कि यह कोई एक-दो बार की बात नहीं है, बल्कि काफी समय से चला आ रहा उसका तरीका है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ज्यादातर पोस्ट लोगों के गुस्से को बढ़ाने, विपक्षी विचारों को ज्यादा से ज्यादा फैलाने और राजनीतिक मतभेदों को संघर्ष और विरोध की नजर से दिखाने पर केंद्रित रहती हैं।

उसका यूट्यूब चैनल “Button Ballot Movement by Osman Faizan Ali” भी उसके राजनीतिक मकसदों की झलक देता है। हालाँकि आज यह चैनल ज्यादा सक्रिय नहीं है, लेकिन पुराने वीडियो और सामग्री से पता चलता है कि वह लंबे समय से विदेश में रहते हुए भी भारतीय राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश करता रहा है।

13 मई 2024 को अपलोड की गई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में उस्मान अली ने हैदराबाद और सिकंदराबाद के मतदाताओं से सीधे अपील की थी। इस रिकॉर्डिंग में उसने लोगों से कहा कि वे रणनीतिक तरीके से AIMIM और कॉन्ग्रेस उम्मीदवारों को वोट दें, ताकि भाजपा को हराया जा सके। उसके संदेश का फोकस किसी खास नीति, योजना या विकास के मुद्दे पर नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को संगठित वोटिंग के जरिए हराने पर था।

यह ऑडियो रिकॉर्डिंग दिखाती है कि उस्मान अली का ‘एक्टिविज्म’ केवल छात्र मुद्दों या सामाजिक अभियानों तक सीमित नहीं हैं। इसके बजाय यह एक ऐसे पैटर्न की ओर इशारा करती है, जिसमें वह विदेश में रहते हुए भारत की राजनीतिक बहस और चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश करते दिखाई देते हैं।

आज के समय में उस्मान का CJP के प्रति समर्थन किसी पुराने वैचारिक जुड़ाव या लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता का परिणाम नहीं लगता। बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह युवाओं के एक वर्ग के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे इस वायरल इंटरनेट ट्रेंड का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। समय और हालात के साथ उसकी राजनीतिक स्थिति और रुख भी बदलते रहे हैं।

जैसा कि 2024 में देखा गया था, उस्मान अली हैदराबाद और सिकंदराबाद के मतदाताओं से AIMIM और कॉन्ग्रेस उम्मीदवारों का समर्थन करने की खुलकर अपील कर रहे थे, ताकि भाजपा को हराया जा सके। ऐसे में CJP के प्रति उनका मौजूदा समर्थन किसी ठोस वैचारिक प्रतिबद्धता से अधिक राजनीतिक अवसरवाद जैसा प्रतीत होता है। ऐसा लगता है कि उसकी सक्रियता किसी तय विचारधारा या सिद्धांतों पर आधारित नहीं है। बल्कि वह उन आंदोलनों और मुद्दों के साथ जुड़ता दिखाई देता है, जिनसे उसे सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान और समर्थन मिलने की संभावना होती है। 2024 तक अली AIMIM और कॉन्ग्रेस के समर्थन में प्रचार कर रहा था और भाजपा को चुनावी तौर पर चुनौती देने की बात कर रहा था। वहीं आज वह CJP के नेतृत्व वाले आंदोलन का खुलकर समर्थन करता नजर आ रहा है।

जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं से पता चलता है कि सोशल मीडिया ने राजनीतिक लामबंदी के तरीके को कैसे बदल दिया है। पहले विरोध प्रदर्शनों का संचालन मुख्य रूप से जमीन पर मौजूद लोग करते थे और वे अपने कामों के लिए जवाबदेह होते थे। लेकिन आज, हज़ारों किलोमीटर दूर बैठे एक्टिविस्ट एक बटन दबाकर नैरेटिव बना सकते हैं, प्रोपेगैंडा तैयार कर सकते हैं, कैंपेन का मैटीरियल बाँट सकते हैं और बड़ी भीड़ के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

इस मामले की सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है, उनमें से कई को पूरी जानकारी भी नहीं है। जंतर-मंतर पर उस्मान अली के पोस्टर लेकर चल रहे कई प्रदर्शनकारियों को यह तक नहीं पता था कि वह कौन हैं। इसके बावजूद वे अनजाने में उस्मान की छवि और संदेश को आगे बढ़ाने का काम कर रहे थे।

इसी वजह से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कितने युवा ऐसे कंटेंट को देख रहे हैं, बिना यह समझे कि उसके पीछे की मंशा क्या है? कितनों को संस्थाओं के साथ टकराव को एक सकारात्मक या वांछनीय परिणाम के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है? और कितने लोग यह समझते हैं कि उन्हें जोखिम उठाने के लिए प्रोत्साहित करने वाले लोग अक्सर खुद उन परिणामों का सामना नहीं करते?

जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन एक नए तरह की राजनीति की तस्वीर दिखाता है, जहाँ विदेश में बैठे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्थानीय मुद्दों और लोगों की नाराजगी का इस्तेमाल अपने बड़े राजनीतिक मकसदों के लिए करने की कोशिश करते हैं। लगातार भड़काऊ कंटेंट दिखाकर, सरकारी संस्थाओं को दुश्मन की तरह पेश करके और प्रदर्शनों को सरकार के साथ सीधी लड़ाई बताकर, उस्मान फैजान अली जैसे लोग लोगों की नाराजगी को संगठित विरोध में बदलने की कोशिश करते हैं।

जबकि धरने-प्रदर्शन में शामिल लोगों को गिरफ्तारी, कानूनी कार्रवाई या हालात बिगड़ने पर हिंसा जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, वहीं विदेश में बैठकर लोगों को उकसाने वाले लोग इन खतरों से दूर रहते हैं। ऐसे में जोखिम युवाओं को उठाना पड़ता है, जबकि पहचान और राजनीतिक फायदा सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों को मिलता है।

इसलिए जंतर-मंतर प्रदर्शन में उस्मान फैजान अली की तस्वीर का प्रमुखता से दिखना सिर्फ एक सामान्य बात नहीं है। यह दिखाता है कि विदेश में बैठा एक सोशल मीडिया एक्टिविस्ट किस तरह भारत के एक आंदोलन से खुद को जोड़ने, युवाओं में गुस्सा बढ़ाने और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उन्हें टकराव की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा है।

यह घटना याद दिलाती है कि सोशल मीडिया के दौर में राजनीतिक हलचल सिर्फ सड़कों पर मौजूद लोगों से नहीं बनती। अब ऐसे लोग भी उस पर असर डाल रहे हैं, जो हजारों किलोमीटर दूर बैठे हैं, लेकिन इंटरनेट के जरिए लोगों को प्रभावित करने, संगठित करने और आंदोलनों को दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।

(मूलरूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है, जिसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

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Jinit Jain
Jinit Jain
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