PoK में लोगों को दाना-पानी के लिए तरसा रही पाकिस्तानी सरकार, दवा- ईंधन सबकी आपूर्ति की बंद: प्रदर्शनकारियों पर ‘आतंकी’ का लेबल लगाया, अब तक 58+ की मौत

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के विरोध-प्रदर्शनों को कुचलने के लिए शहबाज सरकार ने इलाके में खाने-पीने की चीजों, दवाओं और ईंधन की आपूर्ति भी रोक दी है। आवागमन मार्गों पर नाकेबंदी के कारण मुजफ्फराबाद और रावलकोट जैसे शहरों में भी इसका असर देखा जा रहा है।

हालाँकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि अधिकारियों ने गैर-कानूनी रूप से कब्जे वाले इस इलाके में बढ़ते विरोध-प्रदर्शन को दबाने के लिए सप्लाई में रुकावट डाली है।

प्रदर्शनकारियों ने तब तक धरना जारी रखने और विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है, जब तक कि अधिकारी उनकी माँगों पर कार्रवाई नहीं करते। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, एमनेस्टी इंटरनेशनल, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विदेश में रहने वाले कश्मीरियों से भी अपील की है कि वे इस क्षेत्र के हालात की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित करें।

यह विरोध-प्रदर्शन पाकिस्तानी दमन नीति के खिलाफ है। स्थानीय लोगों का दावा है कि निहत्थे नागरिकों पर गोलियाँ चलाई गईं और मारे गए कुछ लोगों के शव अधिकारी अपने साथ ले गए।

एक स्थानीय कश्मीरी ने कहा, “निहत्थे लोगों को सीधी गोलियाँ मार दी जा रही है, जिससे वे शहीद हो रहे हैं।” उसने आरोप लगाया, “वे हमारे नौजवानों के शव भी ले गए हैं।”

यह अशांति उस इलाके की विधानसभा की 12 सीटों को लेकर हुए विवाद से शुरू हुई है, जो जम्मू-कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। स्थानीय समूहों का आरोप है कि इस्लामाबाद इन सीटों का इस्तेमाल चुनावों को प्रभावित करने और अपनी पसंद की सरकारें बनवाने के लिए करता है। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पाकिस्तान ने JAAC को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया और उसके समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी। खबरों के मुताबिक, इसके बाद हुई झड़पों में कम से कम 58 लोगों की मौत हो गई है।

PoK में आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। JAAC के विरोध प्रदर्शन की वजह से आवागमन पूरी तरह ठप है, सामान और सेवाओं की आवाजाही रुक गई है। बाजार और कारोबार बंद करने पड़े हैं। हालाँकि स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों का दावा है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस इलाके में भोजन, ईंधन और मेडिकल सप्लाई की आवाजाही को जानबूझकर रोक दिया है, जिससे संकट और भी गंभीर हो गया है।