दिल्ली की अदालत ने साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में सोमवार (13 जुलाई) को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पाँच अन्य आरोपितों कासिम, अनस, नाजिम और जावेद को इस जघन्य हत्याकांड का दोषी पाया है।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 147, 148, 149 (दंगा भड़काना), 153A (धर्म के आधार पर शत्रुता बढ़ाना), 188 और 365 के तहत दोषी ठहराया है, जबकि धारा 120B और 129 के आरोपों से बरी कर दिया। दोषियों को सजा सुनाए जाने के लिए अदालत अलग से सुनवाई करेगी।
यह पूरा मामला दयालपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) संख्या 65/2020 से जुड़ा है, जो मृतक अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर दर्ज की गई थी। कानूनी प्रक्रिया के दौरान इस केस में ताहिर हुसैन, नाजिम और कासिम को छोड़कर अन्य सभी सह-आरोपितों को अदालत से जमानत मिल गई थी, जबकि ताहिर हुसैन की जमानत याचिका को पिछले साल सितंबर में हाई कोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया था।
दिल्ली पुलिस की जाँच में यह साफ हुआ था कि दंगों के दौरान हिंसक भीड़ ने ताहिर हुसैन के घर का इस्तेमाल हथियारों, पत्थरों और पेट्रोल बमों को इकट्ठा करने तथा सुनियोजित हमलों को अंजाम देने के लिए एक मुख्य ठिकाने के रूप में किया था।
गौरतलब है कि अंकित शर्मा की हत्या 25 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान की गई थी। शिकायतकर्ता पिता के अनुसार, “मेरा बेटा अंकित शर्मा आईबी में तैनात था। वह घटना वाले दिन शाम करीब 5 बजे घर से किराने और घरेलू सामान खरीदने के लिए निकला था। लेकिन कई घंटे बीत जाने के बाद भी जब वह घर नहीं लौटा, तो हमने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में उसका शव चाँद बाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ। उसके सिर, चेहरे, छाती, पीठ और कमर पर धारदार हथियारों के कई गहरे घाव थे। मुझे पूरा यकीन और गहरा संदेह है कि मेरे बेटे की हत्या मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन और उसके साथियों ने मिलकर की है।”

