कॉकरोचों को समर्थन, जानवरों की चिंता और सोनम वांगचुक की तारीफ: CJP के प्रदर्शन में पहुँची मेनका गाँधी की बहन अंबिका शुक्ला, जानिए कैसे दी वामपंथी प्रोपगेंडे को हवा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रोटेस्ट में अब पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गाँधी की बहन और पशु अधिकार कार्यकर्ता अंबिका शुक्ला पहुँचीं है। इस दैरान उन्होंने कहा कि देश को सोनम वांगचुक जैसे शिक्षा मंत्री की जरुरत है और वो CJP और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके को पूरी तरह सपोर्ट करेंगी।

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश ये है कि एक ऐसा भारत खड़ा हो जो इमानदार और कंपैशिनेट हो सबके लिए, वीकर सेक्शन के लिए, जानवरों के लिए, विकलांगो के लिए। जो भी वीक सेक्शन हैं, जो देश अपने जानवर को देखता है, वो वीक को भी देखता है। महात्मा गाँधी कहते थे कि कोई राष्ट्र वह अपने यहाँ जानवरों को कैसे ट्रीट करता है, उसे इसी से जज किया जाता है।”

उन्होंने कहा, “हमें खुशी है कि हमारे जो यूथ हैं यहाँ, दिपके जी और उनके साथी। जो खड़े हुए हैं ओवरनाइट, इन्होंने ये दिखाया है कि आज का यूथ लड़ने के लिए तैयार है। वसूलों के लिए खड़े होने के लिए तैयार हैं, और सही रास्ते पर देश को लाने के लिए जंग में तैयार हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “भारत खुशकिस्मत है कि उसके पास सोनम वांगचुक जैसा है कोई। हम सब ने वो पिक्चर देखी थी थ्री इडियट्स, वो पिक्चर इन्हीं पर बनाई गई थी। ये फिल्म ने पूरे हिंदुस्तान को इंस्पायर किया था और आज अगर ऐसे सोच के आदमी हमारे एजुकेशन मिनिस्टर होते तो आप सोच सकते थे कि ये देश कितना आगे बढ़ता।”

जैसे कॉकरोच मैल हटाता है, CJP हटाएगी सिस्टम का मैल: अंबिका शुक्ला

अंबिका शुक्ला ने कहा, “हमारा ये मैसेज है कि जिस सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों को जो सवाल पूछते हैं, जो सच ढूँढते हैं, जो RTI लिखते हैं, उनको उन्होंने कॉकरोच बोला है, अब कॉकरोच भी एक जीव है और एक बहुत उपयोगी जीव है। कॉकरोच का काम है मैल हटाना। हमारी उम्मीद है कि ये सिस्टम से मैल को पूरा हटा दे।”

उन्होंने कहा, “कॉकरोच बोल कर हमको सच में पहचाना है। हम सच में कॉकरोच हैं और जो कॉकरोच से उनको चिढ़ है, वहीं चिढ़ उनको हर चीच से लगता है। कुत्तों से चिढ़ है, कबूतर से चिढ़ है, पता नहीं कौन-कौन से जीव से चिढ़ लगती है उनको। निठारी के किलर्स जिन्होंने बच्चों का रेप किया, मर्डर किया और खाया भी, उनको आप ने बाईज्जत बरी कर दिया और कुत्तों को आप ने उम्रकैद की सजा सुना दी। ये कैसा उच्च न्यायालय है।”

अंबिका ने कहा, “हमारा जो एजुकेशन सिस्टम है, उसमे बहुत सारी कमजोरियाँ हैं। हमको एनिमल वेलफेयर एक हिस्सा बनाना है, सिलेबस का, ताकि जो हमारी पीढ़ियाँ आई है वो जानवरों के प्रति करुणा का भाव सीखें। हमको पूरी उन्मीद है कि पूरा हिंदुस्तान उठ कर इनका साथ देगा।”

CJP के लिए अंबिका शुक्ला जैसे लोगों द्वारा प्रदर्शन के नाम पर केवल राजनीतिक और सामाजिक रोटियाँ सेंकने का प्रयास किया जा रहा है और वामपंथियों के प्रोपगेंडे को हवा दी, जिसके लिए एक महीने से माहौल बनाया जा रहा है। समाज के कमजोर वर्गों का नाम लेकर किए जा रहे इन प्रदर्शनों का जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है, बल्कि यह सिर्फ एक खास एजेंडे को बढ़ावा देने की कोशिश है, जिसे जनता अब नकार रही है। यह भी गौर करने वाली बात है कि जो भी लाइम-लाइट में आना चाह रहा है, वो सबसे आसान रास्ता अपनाते हुए CJP के प्रोटेस्ट में चला जा रहा है।