इंग्लिश क्लब आर्सेनल के लीजेंड, मशहूर खिलाड़ी व, डेनिस बर्जकेंप ने कभी कहा था – When you start supporting a football club, you don’t support it because of the trophies, or a player, or history, you support it because you found yourself somewhere there; found a place where you belong.
कहते हैं एकबार आप किसी फुटबॉल टीम से मोहब्बत कर बैठते हैं तो अपनी अंतिम सांसों तक भी उसका मोह, उसका दामन नहीं छोड़ पाते। यही तो है फुटबॉल का जादू।
खैर, बात करते हैं फीफा विश्व कप के बारे में।
बीती, देर रात ढाई बजे, टूर्नामेंट के तीसरे क्वार्टर फाइनल मुकाबले में, नॉर्वे के खिलाड़ी इंग्लैंड की टीम के विरुद्ध मैदान में उतरे। अर्लिंग हालांड के नेतृत्व में नॉर्वे एक बड़ा उलटफेर करने के इरादे से मैदान में उतरी थी। वहीं, कप्तान हैरी केन व साथी खिलाड़ियों के शानदार फॉर्म के दम पर इंग्लैंड इस मैच को जीत कर विश्व कप के सेमीफाइनल की ओर कदम बढ़ाना चाहती थी। नॉर्वे की कोशिश थी कि वह ब्राजील के खिलाफ किए शानदार प्रदर्शन को दुबारा दोहराते हुए एक बड़ा उलटफेर कर दे।
मियामी के स्टेडियम में मैच का आगाज़ होता है। नॉर्वे ने थ्री लाएंस को तब चौंका दिया था जब मैच के छत्तीसवें मिनट में युवा खिलाड़ी आंद्रेस सैल्देरुप एक जबरदस्त गोल दाग कर तीसरे क्वार्टर फाइनल मैच में इंग्लैंड के विरुद्ध अपनी टीम को बढ़त दिला देते हैं। सारा स्टेडियम वाइकिंग क्लैप्स से गूंज उठता है। इंग्लिश टीम थोड़ा परेशानियों में नजर आने लगती है।
मगर पहले हाफ के स्टॉपेज टाइम में ज्यूड बेलिंघम एक गोल दागते हुए चिंता के बादलों को कहीं दूर भेज देते हैं। मैच के 45+2 मिनट पर बांई फ्लैंक से एंथोनी गोर्डन नॉर्वे के चार खिलाड़ियों के बीच से एक सटीक पास अपने साथी खिलाड़ी के लिए बढ़ाते हैं। ज्यूड बेलिंघम कोई ग़लती नहीं करते और स्कोर को 1-1 कर देते हैं।
दूसरे हाफ का खेल शुरू होता है। दोनों ही टीमें गोल स्कोर करने की कोशिशें करती रहती हैं। मगर, ना नॉर्वे कोई गोल कर सकी थी ना ही इंग्लैंड। विरोधी बॉक्स के करीब आकर अक्सर नॉर्वे के खिलाड़ी अपने स्टार स्ट्राइकर अर्लिंग हालांड को नजरअंदाज करते दिखे। कई दफा अर्लिंग हालांड खुद को बेहतरीन पोजीशन में लेकर जा रहे थे पर गेंद उनकी ओर नहीं बढ़ाई जा रही थी। इंग्लिश टीम भी तमाम प्रयासों के बावजूद गोल स्कोर नहीं कर पा रही थी। एक बार फिर ओर्हान नायलांड गोल पर नॉर्वे के लिए बेहतरीन रक्षण करते नजर आए। नब्बे मिनट तक स्कोर बराबरी पर रहने के चलते मैच एक्स्ट्रा टाइम में चला जाता है।
यहाँ 90+3 मिनट में एक बार फिर ज्यूड बेलिंघम ही एक संकटमोचक की भांति इंग्लैंड के लिए एक शानदार गोल स्कोर कर देते हैं। अंतिम समय पर बेलिंघम के इस गोल के चलते इंग्लैंड इस क्वार्टर फाइनल मुकाबले में 2-1 से बेहद अहम बढ़त ले लेता है।
नॉर्वे वापसी के कई प्रयास करता है परन्तु वापसी करने की उसकी तमाम कोशिशें निर्रथक ही रह जाती हैं। मैच समाप्ति पर स्कोर 2-1 ही रहता है। इंग्लैंड सेमीफाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित कर लेती है।
मेक्सिको के ख़िलाफ़ दो गोल मारने के पाँच दिन बाद ही बीती रात ज्यूड बेलिंघम ने फिर दो बेहद अहम गोल दाग आज खेल का रुख इंग्लैंड की ओर मोड़ दिया। तेईस वर्षीय ज्यूड बेलिंघम कप्तान हैरी केन की भांति अबतक इस विश्व कप में कुल छह गोल दाग चुके हैं। इंग्लिश टीम अपने इतिहास में चौथी दफा विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बना चुकी है।
इसके बाद सुबह साढ़े छह बजे, कन्सास सिटी स्टेडियम में कतर विश्व कप के विजेता, अर्जेंटीना, के समक्ष स्विट्जरलैंड की टीम थी। अर्जेंटीना ने पिछले मैच में अंतिम बारह मिनटों में करिश्माई खेल दिखाते हुए, मैच में 2-0 से पिछड़ने के बावजूद, 3-2 से मिस्र के खिलाफ अपना मैच जीता था। वहीं, स्विट्जरलैंड की टीम अपना पिछला मैच जीतने के बाद से ही इस मुकाबले के लिए जोरदार तैयारी में लगी हुई थी। ग्रानित झ़ाका के नेतृत्व में आज सुबह स्विस खिलाड़ी कुछ बड़ा करना चाहते थे। हालाँकि जब तक उनतालीस वर्षीय लियोनेल मेस्सी एक बीस वर्षीय मेस्सी के जज्बे के साथ खेलते रहेंगे, अर्जेंटीना को हराना कोई आसान काम नहीं होने वाला था।
अल्बीसेलेस्त के कोच लियोनेल स्कालोनी जरूर काफी चिंताओं से घिरे हुए हैं। उनकी परेशानी का कारण है कि वह अपने अनुभवी खिलाड़ियों के साथ आगे बढ़ें या फिर बेंच पर मौजूद खुद को साबित करने के लिए भूखे युवा खिलाड़ियों जैसे वैलेंटीन बार्को, नीको पाज़ व सीमिओनी को मैदान पर उतारें।
दोनों ही टीमें मैदान पर आती हैं। अर्जेंटीना अपनी पारंपरिक अल्बीसेलेस्त ( हल्की नीली व सफेद धारियां) जर्सी पहने मैदान में उतरती है। सामने थी बेहद प्यारी लाल रंग की अपनी जर्सी में स्विट्जरलैंड की टीम, जिसके पास आज खोने को कुछ भी न था। दोनों ही टीमों के समर्थकों का हुजूम स्टेडियम में उमड़ा हुआ था। लोगों में खुशी का माहौल था।
निर्धारित समय पर रेफरी होआओ पेड्रो पिन्हियेरो से इशारा मिलते ही टूर्नामेंट के आखिरी क्वार्टर फाइनल की शुरुआत होती है। स्विट्जरलैंड की टीम बेहद शानदार अंदाज में मैच की शुरुआत करते हैं। लेकिन मैच के दसवें मिनट में वह अर्जेंटीनी टीम को कॉर्नर प्रदान कर देते हैं। लियोनेल मेस्सी कॉर्नर लेने आगे आते हैं। वो एक बेहतरीन गेंद स्विस बॉक्स में भेजते हैं। वहां लीवरपूल के लिए क्लब फुटबॉल खेलने वाले एलिक्सिस मैक एलिस्टर मौका मिलते ही जोरदार हेडर से गेंद को गोलपोस्ट के भीतर भेज देते हैं। अर्जेंटीना इस गोल के साथ मैच में बढ़त ले लेती है। दर्शक दीर्घा में बैठे हजारों अर्जेंटीनी समर्थक उन्माद से पगलाए नजर आने लगते हैं।
खैर, मैच आगे बढ़ता है। पहले हाफ की समाप्ति तक स्कोर 1-0 ही रहता है। अगर अंत तक यही स्कोर रहे तो आज स्विट्जरलैंड की वापसी तय थी। वह लगातार अटैकिंग मूव्स बनाते रहते हैं। स्विस फॉरवर्ड लाइन बारम्बार अर्जेंटीनी रक्षापंक्ति को भेदने की कोशिशें करती रहती है। लेकिन लिसांद्रो मार्टिनेज़ आज बेहद शानदार रक्षण कर रहे थे। वह कई जरूरी टैकल्स करते जा रहे थे।
मगर सड़सठवें मिनट में दान न्दोऐ बांई छोर से गेंद लेकर आगे बढ़ते हैं। वह गेंद साथी खिलाड़ी की ओर सरका कर अपने लिए रिक्त स्थान बनाते हैं और तुरंत गेंद वापस पा कर गोलपोस्ट की दिशा में तीव्र शॉट लगाते हैं। गोलकीपर एमिलियानो मार्तिनेज़ का दुर्ग भेदा जा चुका था। स्कोर बराबर हो चुका था। इस बार खुशियां मनाने की बारी स्विस समर्थकों की थी।
लेकिन पाँच मिनट पश्चात ही खेल में एक मोड़ आता है जब पहले ही एक येलो कार्ड पाए ब्रील एम्बोलो को फाउल करने के चलते रेफरी द्वारा रेड कार्ड दिखा दिया जाता है। इतने बड़े मौके पर यह एक बेहद बचकानी गलती थी, जो आगे चलकर टीम के लिए बहुत महँगी भी साबित हो सकती थी।
स्विट्जरलैंड की टीम अब दस खिलाड़ियों के संग खेलने के लिए अभिशप्त हो गई थी। खेल आगे बढ़ता है। अर्जेंटीना बढ़त लेने की फिराक में कई हमले करती है। मगर उनके यह मंसूबे सफल नहीं रहते। दस खिलाड़ियों के साथ भी स्विस टीम का रक्षण काबिले-तारीफ था। मैच अब धीरे-धीरे एक्स्ट्रा-टाइम की दिशा में सरकता दिख रहा था।
नब्बे मिनट की समाप्ति तक स्विट्जरलैंड विपक्षी टीम को बढ़त लेने से वंचित रखते हैं। मैच अब एक्स्ट्रा-टाइम में जा चुका था। स्विस टीम अब तक काफी थक चुकी थी। दोनों ही टीमें कुछ जरूरी परिवर्तन भी करती हैं। मैच के 112 मिनट में होसे़ मैनुएल लोपेज़ तीन स्विस डिफेंडरों को अपनी ओर खींचते हुए गेंद को साथी खिलाड़ी हूलियन अल्वारेज़ की ओर बढ़ाते हैं। हूलियन अल्वारेज़ बॉक्स के बाहर से ही एक बेहतरीन कर्लिंग शॉट कोबेल के पोस्ट की और लगाते हैं। गोलकीपर कोबेल इस जादुई शॉट के आगे बेबस नजर आते हैं। अल्वारेज़ एक ऐसे समय में, जब मैच पेनाल्टी शूटआउट की ओर बढ़ रहा था, यह गोल दाग कर अर्जेंटीना को मैच में आगे कर देते हैं।
आठ मिनट पश्चात अर्जेंटीना फिर एकबार मौका पाते ही तेज काउंटर अटैक करती है। अल्माडा स्विस गोलपोस्ट पर निशाना साधते हैं। गेंद गोलकीपर से छिटक जाती है। लाउतारो मार्टिनेज तुरंत आगे बढ़ कर गेंद को जाल के भीतर भेज देते हैं। अर्जेंटीना 3-1 से यह मैच जीत जाता है।
तीन नॉकआउट मैचों में तीन-तीन गोल दागते हुए तीनों दफा पिछड़ने के बावजूद वापसी करते हुए गत विजेता सेमीफाइनल में पहुंच चुके हैं। अब अपने इतिहास का छठा सेमीफाइनल खेलने जा रही अर्जेंटीना का सामना होगा शानदार फुटबॉल खेल रही थॉमस टुकेल की इंग्लिश टीम से।
सेमीफाइनल मुकाबलों की बिसात सज चुकी है। अब पहले तो पंद्रह जुलाई को जबरदस्त अटैकिंग फुटबॉल खेल रही, इस टूर्नामेंट की सबसे संतुलित टीम फ्रांस का सामना होगा उनके हालिया वर्षों के चिर प्रतिद्वंद्वी स्पेन से। स्पेन की रक्षापंक्ति ने पूरे टूर्नामेंट में अबतक मात्र एक गोल खाया है। लेकिन वो गोल दागने के लिए भी संघर्षरत नजर आए हैं। डलास स्टेडियम में मजबूत अटैकिंग फोर्स एक बेहद मजबूत रक्षापंक्ति की परिक्षा लेती दिखेगी। कई पुराने हिसाब भी चुकता किए जाने हैं। यह बेहद शानदार मैच रहने वाला है।
फिर सोलह जुलाई को अटलांटा स्टेडियम में गत विजेता का सामना होगा शानदार फार्म में चल रही इंग्लिश टीम से। दोनों ही टीमें कैसे भी यह मैच जीत फाइनल में जगह बनाने का प्रयास करेंगी। अर्जेंटीनी टीम अबतक चंद खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन के चलते तीन नॉकआउट मुकाबलों में किसी तरह अपेक्षाकृत छोटी टीमों के खिलाफ जूझते हुए अंतिम क्षणों में बढ़त लेकर यहाँ तक पहुँची है। उनके पास बेंच पर नीको पाज, सिमियोनी व वैलेंटीन बार्को सरीखे तेजतर्रार युवा खिलाड़ी मौजूद हैं।
मगर कोच लियोनेल स्कालोनी ने अभी तक उम्रदराज खिलाड़ियों के अनुभव पर ही दाँव खेला है। अब सेमीफाइनल के बड़े मौके पर वह कुछ अलग करने का जोखिम शायद ही उठाएँ। इंग्लैंड की टीम के पास युवा व अनुभवी खिलाड़ियों की बेहतरीन फौज है जो अंत तक हार नहीं मानती। उनके पास अच्छा अटैक और शानदार डिफेंस है। इंग्लिश टीम के खिलाफ अर्जेंटीना के लिए मुकाबला बिल्कुल भी आसान नहीं होगा। यह एक और जबरदस्त टक्कर होगी।
फुटबॉल की खबरें जारी रहेंगी। बने रहिएगा साथ।
वीवा ला फुटबॉल।


