उत्तर प्रदेश के बरेली में ‘ऑल इंडिया मुस्लिम जमात’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड की जमीनों में गड़बड़ी और अरबों रुपए के घोटाले का आरोप लगाया हैं। मौलाना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान जमीनों की खरीद-बिक्री का गलत कारोबार सबसे ज्यादा बढ़ा।
उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इन दिनों राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर सबसे ज्यादा बोल रहे हैं, जबकि हकीकत ये है कि उनकी जब-जब सरकार रही, तब वक्फ बोर्ड में सबसे बड़ा घोटाला किया गया।” मौलाना ने पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भी भेजा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने कहा, “यदि वक्फ बोर्ड की सही दिशा में जाँच हुई, तो राम मंदिर चढ़ावा चोरी से भी बहुत बड़ा घोटाला सामने आएगा।” उनका कहना था कि केवल बरेली ही नहीं बल्कि प्रदेश के कई हिस्सों में वक्फ की जमीनों से जुड़े करोड़ों और अरबों रुपए के लेन-देन की जाँच होना जरूरी है।
सपा सरकार, आजम खान और वक्फ बोर्ड की नियुक्तियों पर उठाए सवाल, सीएम योगी से जाँच की माँग
मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने आरोप लगाया कि वक्फ की जमीनों में सबसे ज्यादा गड़बड़ियाँ समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान हुईं। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव 1989 से 1991, 1993 से 1995 और 2003 से 2007 तक मुख्यमंत्री रहे, जबकि अखिलेश यादव ने 2012 से 2017 तक प्रदेश की कमान संभाली।
मौलाना का दावा है कि इन चारों कार्यकाल में अधिकांश समय अल्पसंख्यक, वक्फ और हज मंत्रालय की जिम्मेदारी आजम खान के पास रही। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान की पसंद के लोगों को ही सुन्नी वक्फ बोर्ड का चेयरमैन और सदस्य बनाया गया।
उनके अनुसार, जुफर अहमद फारूकी वर्ष 2000-2001 तक, अमीर आलम 2001-2003 तक, हाफिज उस्मान 2004-2009 तक और फिर जुफर अहमद फारूकी 2010 से 2026 तक सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे। मौलाना का आरोप है कि इन कार्यकालों में बोर्ड के भीतर मनमाने तरीके से फैसले लिए गए और गड़बड़ियाँ की गईं।
उनका यह भी कहना है कि जो भी व्यक्ति बोर्ड में सदस्य या पदाधिकारी बना, उसने अपने क्षेत्र में वक्फ की जमीनों का बंटवारा किया और संपत्तियों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया।मौलाना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से माँग की कि सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड द्वारा की गई सभी जमीनों की खरीद-बिक्री और आवंटन की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।

