जम्मू-कश्मीर के कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम अब आधिकारिक तौर पर बदल दिया गया है। अब इस स्टेशन का नया नाम ‘शहीद कैप्टन सुनील कुमार चौधरी रेलवे स्टेशन, कठुआ’ होगा।
रेल मंत्रालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है और स्टेशन का नया कोड MSKT तय किया गया है। केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह फैसला जनता और बलिदानी अफसर के परिवार की लंबे समय से चली आ रही माँग के बाद लिया गया है।
लंबे समय से उठ रही थी नाम बदलने की माँग
स्थानीय लोग और कैप्टन सुनील कुमार चौधरी के परिजन काफी समय से कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम उनके नाम पर रखने की माँग कर रहे थे। लोगों का कहना था कि जिस तरह उधमपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बलिदानी कैप्टन तुषार महाजन के नाम पर रखा गया, उसी तरह कठुआ स्टेशन का नाम भी कैप्टन सुनील कुमार चौधरी के नाम पर होना चाहिए।
उनका मानना था कि जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को इस वीर सपूत का नाम याद रहना चाहिए। अब सरकार ने इस माँग को स्वीकार करते हुए स्टेशन का नाम बदल दिया है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी जानकारी
केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने X पर पोस्ट करते हुए बताया कि जनता की माँग पर कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘शहीद कैप्टन सुनील कुमार चौधरी रेलवे स्टेशन, कठुआ’ कर दिया गया है।
Good news for #Kathua:
— Dr Jitendra Singh (@DrJitendraSingh) July 18, 2026
On popular public demand, the Kathua Railway Station has been named as “Martyr Captain Sunil Kumar Choudhary Railway Station Kathua”. pic.twitter.com/DgXEWYXmik
उन्होंने कहा कि कैप्टन सुनील ने देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था और उनके सम्मान में यह फैसला लिया गया है। रेल मंत्रालय ने भी इस बदलाव की अधिसूचना जारी कर दी है।
कौन थे कैप्टन सुनील कुमार चौधरी?
कैप्टन सुनील कुमार चौधरी का जन्म 22 जून 1980 को जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के गोविंदसर गाँव में हुआ था। उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल पी एल चौधरी भारतीय सेना में अधिकारी थे, इसलिए बचपन से ही उन्हें अनुशासन और देशसेवा का माहौल मिला।
वे तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से की। इसके बाद पुणे के गरवारे कॉलेज ऑफ कॉमर्स से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से MBA की पढ़ाई शुरू की।
कैप्टन मनोज पांडेय से मिली सेना में जाने की प्रेरणा
MBA की पढ़ाई के दौरान उनके छोटे भाई अंकुर चौधरी का चयन नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में हुआ। भाई से मिलने के दौरान सुनील चौधरी ने परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडेय की वीरता की कहानी जानी।
कैप्टन मनोज भी 11 गोरखा राइफल्स से जुड़े थे। उनकी बहादुरी से प्रभावित होकर सुनील ने एमबीए बीच में छोड़ दिया और 1 जुलाई 2003 को इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) में दाखिला ले लिया।
बाद में 10 दिसंबर 2004 को उन्हें 11 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट की 7/11 गोरखा राइफल्स बटालियन में कमीशन मिला। उनकी पहली पोस्टिंग कोलकाता के फोर्ट विलियम में हुई।
असम में आतंकियों के खिलाफ कई बड़े अभियान
फरवरी 2005 में गोरखा राइफल्स में शामिल होने के बाद मई 2006 में उनकी तैनाती असम के तिनसुकिया जिले में ULFA आतंकियों के खिलाफ चल रहे काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन में हुई।
इस दौरान उन्होंने कई सफल अभियानों का नेतृत्व किया और दो ULFA कमांडरों को मार गिराया। उनकी बहादुरी और नेतृत्व क्षमता के लिए उन्हें 26 जनवरी 2008 को सेना मेडल से सम्मानित किया गया।
सम्मान मिलने के 24 घंटे बाद हो गए शहीद
सेना मेडल मिलने के अगले ही दिन यानी 27 जनवरी 2008 को कैप्टन सुनील कुमार चौधरी को रंगागढ़ गाँव में 7 से 9 ULFA आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली।
वह लेफ्टिनेंट वरुण राठौर और जवानों की टीम के साथ तुरंत ऑपरेशन के लिए निकल पड़े। ऑपरेशन के दौरान उन्होंने आतंकियों की घेराबंदी की और खुद आगे बढ़कर मोर्चा संभाला।
मुठभेड़ में उनकी छाती में गोली लगी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने लगातार लड़ाई जारी रखी और दो आतंकियों को मार गिराया।
इसके बाद जंगल की ओर भाग रहे एक अन्य आतंकी का पीछा कर उसे भी ढेर कर दिया। हालाँकि इस दौरान लगी गंभीर चोटों के कारण उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया।
कीर्ति चक्र और सेना मेडल से किया गया सम्मानित
कैप्टन सुनील कुमार चौधरी की अदम्य वीरता और साहस को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।
इससे पहले उन्हें सेना मेडल भी मिल चुका था। सेना में करीब तीन साल की सेवा के दौरान उन्होंने अपने साहस, नेतृत्व और देशभक्ति से एक ऐसी मिसाल कायम की, जिसे आज भी याद किया जाता है।


