दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के दौरान एक बेहद चिंताजनक और निंदनीय घटना सामने आई है। प्रदर्शन कवर करने पहुंचे ‘ऑपइंडिया’ (OpIndia) के पत्रकार अनुराग मिश्रा के साथ वहाँ मौजूद कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े गुंडों द्वारा न सिर्फ बदसलूकी की गई, बल्कि उन पर शारीरिक हमला भी किया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रदर्शन के ‘शांतिपूर्ण’ होने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के अनुसार, अनुराग मिश्रा जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से सामान्य सवाल पूछ रहे थे। इसी दौरान वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और उनके काम में बाधा डालनी शुरू कर दी। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई और पत्रकार पर हमला कर दिया गया।
जंतर मंतर पर सामने आई कॉकरोचों की गुंडागर्दी, OpIndia के पत्रकार @Anurragmishra पर किया हमला
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) July 18, 2026
क्या यही है अभिजीत दिपके के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की सच्चाई? क्या अब सवाल भी नहीं पूछ सकते पत्रकार?
कौन हैं ये अराजक तत्व? क्या इनकी गुंडागर्दी की जिम्मेदारी लेंगे सोनम वांगचुक, विजेता… pic.twitter.com/VzzT8kROx4
पत्रकार अनुराग मिश्रा ने घटना के बावजूद अपना काम नहीं रोका और बेखौफ होकर अपना काम करते रहे। उन्होंने कहा, “हम वहाँ सिर्फ अपना काम कर रहे थे और निष्पक्षता से सवाल पूछ रहे थे। लेकिन कुछ लोगों को सवाल पसंद नहीं आए। उन्होंने मुझे घेरा, धक्का-मुक्की की और मुझ पर हमला कर दिया। अगर देश की राजधानी में पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं और सवाल पूछने पर उन पर हमले होंगे, तो लोकतंत्र और प्रेस की आजादी का क्या मतलब रह जाता है?”
इस घटना के बाद प्रदर्शन के मुख्य चेहरों और आयोजकों पर उंगलियाँ उठने लगी हैं। सोशल मीडिया पर लोग सोनम वांगचुक, विजेता दहिया, अभिजीत दिपके और सौरव दास जैसे नेताओं को टैग करके सवाल पूछ रहे हैं कि क्या यही उनके तथाकथित शांतिपूर्ण आंदोलन की सच्चाई है? क्या वे अपने प्रदर्शन में शामिल इन अराजक तत्वों की गुंडागर्दी की जिम्मेदारी लेंगे? आलोचकों का कहना है कि असहमति की आवाज को हिंसा के दम पर दबाना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।
इस हमले ने एक बार फिर फील्ड पर काम करने वाले ग्राउंड पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। लोगों ने दिल्ली पुलिस से माँग की है कि वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी पत्रकार के साथ ऐसी हरकत न हो सके।

