‘राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी की जाँच के लिए नई SIT बनाओ, IPS के हाथ में हो कमान’: SC ने योगी सरकार को दिए निर्देश, कहा- राजनीति न की जाए

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद के लिए बनाई SIT ने रविवार (19 जुलाई 2026) को स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद कर सुप्रीम कोर्ट (SC) को सौंपी। सोमवार (20 जुलाई 2026) को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने उन याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में कथित गड़बड़ी की कोर्ट की निगरानी में जाँच कराने की माँग की गई है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नई SIT बनाने का आदेश दिया। CJI सू्र्यकांत ने कहा कि नई SIT की अगुवाई एक IPS अधिकारी करे। उन्होंने यह भी कहा कि नई जाँच टीम बनने के बाद राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जाँच किसी ठोस नतीजे तक पहुँच सकती है।

कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि वे नई SIT के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से अधिकारियों के नाम मँगवाएँ। यह आदेश ऐसे समय में आया है, जब मौजूदा SIT अपनी स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर चुकी है और अब तक 8 आऱोपितों को गिरफ्तार भी कर चुकी है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को इस मामले में राजनीति करने से भी मना किया। CJI सूर्यकांत ने कहा, “इस मामले को राजनीति का मुद्दा मत बनाइए। कोर्ट राजनीति करने की जगह नहीं है। यह एक अपराध की जाँच का मामला है और हमारा काम सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि जाँच सही तरीके से हो।”

गौरतलब है कि जून 2026 में राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। इसके बाद ऑडिट में भी कुछ अनियमितताएँ मिलीं, जिसके बाद योगी सरकार ने इस मामले की जाँच के लिए SIT बनाई थी।

जाँच के दौरान 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपितों के पास से करीब ₹79.85 लाख नकद भी बरामद किए गए हैं। इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम भी सामने आया। इसके बाद चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।