‘प्रदर्शन में महिलाओं-छात्रों को रखा आगे, खुद पीछे छिपे’: कॉकरोच जनता पार्टी के पूर्व समर्थक ने खोली सारी पोल, बताया- CJP आम आदमी पार्टी की B-टीम है

वो कहावत है ना… देर आए, दुरुस्त आए। ये ही कहावत अब कॉकरोच जनता पार्टी में देखने को मिल रही है। जी हाँ, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग का मुद्दा अब कहीं भटकता दिखाई दे रहा है। तिलचट्टों के ग्रुप में अब कलह पैदा होती दिख रही है। सीजेपी में अब उनके ही प्रदर्शनकारी पार्टी पर आरोप लगाते दिखाई नजर आ रहे हैं। आंदोलन में लंबे समय से सक्रिय रहे पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने संगठन और उसके AAP नेताओं की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स से बातचीत में वीरू भाई ने खुलासा किया कि वह करीब एक महीने तक इस आंदोलन से जुड़े रहे, लेकिन अब उन्होंने खुद को कॉकरोच जनता पार्टी के इस प्रदर्शन से अलग कर लिया है। उनका सीधा आरोप है कि खुद को गैर-राजनीतिक बताने वाली सीजेपी असल में आम आदमी पार्टी (AAP) की ‘बी-टीम’ की तरह काम कर रही है। उन्होंने आंदोलन में असामाजिक तत्वों के घुसने का भी दावा किया है।

टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि वे एक महीने पहले बिहार में अपना घर छोड़कर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने आए थे। उनके परिवार ने बार-बार उन्हें इसमें शामिल न होने की सलाह दी थी और कहा था कि सीजेपी ‘केवल नाटक कर रही है’, लेकिन वे इस उम्मीद में अड़े रहे कि सीजेपी शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए संघर्ष कर रही है।

आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स से बातचीत के दौरान वीरू भाई ने बताया कि आंदोलन से जुड़े सभी प्रदर्शनकारियों को काफी उम्मीदें थीं। उन्हें लगता था कि आम आदमी पार्टी के बड़े नेता इस प्रदर्शन में उनका साथ देंगे। लोगों को उम्मीद थी कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे दिग्गज नेता मार्च में समर्थन करने जरूर आएँगे।

लेकिन ऐन मौके पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कोई भी बड़ा नेता वहाँ नहीं पहुँचा। पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने गद्दार पार्टी AAP से सवाल किया कि अगर आम आदमी पार्टी सच में इस आंदोलन का समर्थन कर रही थी, तो फिर उसका कोई भी सांसद प्रदर्शन में शामिल होने क्यों नहीं आया।

छात्रों और महिलाओं को आगे कर खुद पीछे छुपे सीजेपी वाले

पूर्व प्रदर्शनकारी वीरू भाई ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और अन्य मुख्य नेताओं पर आंदोलनकारियों को गुमराह करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस के साथ झड़प के समय कोई भी बड़ा नेता आगे नहीं आया। आयोजकों ने खुद पीछे रहकर महिला प्रदर्शनकारियों को सबसे आगे धकेल दिया।

इसी कारण भटके नौजवानों और युवाओं ने पहली बार आंदोलन में भाग लिया और अंत में उन्हें परेशानी का सामना खुद करना पड़ा। सही नेतृत्व न मिलने के कारण छात्रों को पुलिस की कड़ी कार्रवाई झेलनी पड़ी। नेताओं की इस रणनीति से कई युवा छात्र जख्मी हो गए।

संसद मार्च की अनुमति न होने के बावजूद जोखिम लेने पर सवाल

पूर्व प्रदर्शनकारी ने पुलिस कार्रवाई के दौरान नेताओं की भूमिका पर भी उंगली उठाई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने पहले ही साफ कर दिया था कि ‘संसद चलो’ मार्च की कोई अनुमति नहीं है। पुलिस ने रास्तों पर मजबूत बैरिकेडिंग भी कर रखी थी।

इसके बावजूद आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने के लिए उकसाया। जब सब जानते थे कि आगे खतरा है, तब भी आम लोगों को बैरिकेड्स तोड़ने के लिए आगे क्यों भेजा गया। नेताओं की इस लापरवाही के कारण ही स्थिति इतनी खराब हुई।

20 जुलाई के संसद मार्च में हुई हिंसा का पूरा लेखा-जोखा

यह पूरा विवाद 20 जुलाई 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा निकाले गए ‘संसद चलो’ मार्च के बाद शुरू हुआ है। सीजेपी के कार्यकर्ता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर सड़क पर उतरे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई थी।

दिल्ली पुलिस के अनुसार इस हिंसा में कुल 178 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 118 पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना पड़ा था।