बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) पेपर लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एमबीबीएस डॉक्टर मनीष कुमार को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 06/2024 के तहत की गई है और इस बहुचर्चित मामले में अब तक कुल 296 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
जाँच एजेंसी का दावा है कि डॉ. मनीष पेपर लीक नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था और मुख्य आरोपित संजीव मुखिया के बेटे डॉ. शिव का करीबी दोस्त होने के कारण इस पूरे गिरोह से जुड़ा था। EOU के अनुसार, शिक्षक भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले पहुँचाने की साजिश में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है।
ईओयू की जाँच के अनुसार, जहानाबाद जिले के परसबिगहा थाना क्षेत्र के नेहालपुर गाँव निवासी डॉ. मनीष कुमार ने वर्ष 2021 में पटना के एनएमसीएच से MBBS की पढ़ाई पूरी की थी। वह कैमूर जिले में सरकारी चिकित्सक के रूप में कार्य कर चुका है लेकिन बाद में सरकारी सेवा से इस्तीफा देकर पटना में नीट-पीजी की तैयारी कर रहा था।
प्रति अभ्यर्थी ₹50000 तय, 30 अभ्यर्थियों को ले गया था हजारीबाग होटल
EOU के मुताबिक, मनीष को प्रत्येक अभ्यर्थी की ‘सेटिंग’ कराने के बदले 50 हजार रुपए देने की बात तय हुई थी। 15 मार्च 2024 को आयोजित टीआरई-3 परीक्षा से दो से तीन दिन पहले वह करीब 30 अभ्यर्थियों को पटना से झारखंड के हजारीबाग स्थित कोहिनूर होटल लेकर गया था। वहाँ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले लीक प्रश्नपत्र और उसके उत्तर उपलब्ध कराए गए ताकि वे उन्हें याद कर परीक्षा में सफल हो सकें। अभ्यर्थियों को होटल में छोड़ने के बाद डॉ. मनीष वापस पटना लौट आया था।
जाँच एजेंसी के अनुसार, इसी नेटवर्क के माध्यम से शिक्षक भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध कराने की पूरी साजिश रची गई थी। EOU का आरोप है कि इस गिरोह ने अभ्यर्थियों को भर्ती दिलाने के नाम पर संगठित तरीके से पेपर लीक कराया। सूत्रों के मुताबिक, मनीष और उसके नेटवर्क पर करीब 30 अभ्यर्थियों से लगभग 1.20 करोड़ रुपए वसूलने का भी आरोप है।
जाँच में यह भी सामने आया है कि 14 मार्च 2024 को स्थानीय पुलिस ने हजारीबाग के कोहिनूर होटल में छापेमारी की थी लेकिन उस समय मनीष वहाँ से फरार होने में कामयाब रहा था। बाद में होटल के सीसीटीवी फुटेज, साक्ष्यों और पीएमसीएच तथा एनएमसीएच के छात्रों से जुड़े डेटा की जाँच के दौरान ईओयू उस तक पहुँची। पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. मनीष अपने सहयोगियों डॉ. शिव और डॉ. शुभम के साथ मिलकर पेपर लीक गिरोह का संचालन कर रहा था। मनीष को प्रश्नपत्र के सीलबंद बक्से को बिना नुकसान पहुँचाए खोलने और दोबारा सील करने में विशेषज्ञ माना जाता था।
आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने वाले गिरोहों, उनसे आर्थिक लाभ लेने वाले व्यक्तियों और पूरे नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। एजेंसी फिलहाल मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जाँच कर रही है।

