जॉर्डन पर ईरानी हमले का जवाब-ट्रंप
दरअसल ईरान ने जॉर्डन के अमेरिकी ठिकानों पर गोलाबारी की थी। जॉर्डन के मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर मिसाइल हमले की जिम्मेदारी भी ली थी। यह अमेरिकी सेना का अहम ठिकाना माना जाता है। जॉर्डन ने 5 मिसाइले दागने का दावा किया था।
जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने ईरान की पाँच मिसाइलों को हवा में नष्ट कर दिया है और इससे जान-माल को कोई नुकसान नहीं हुआ है। वहीं अमेरिकी हमले में ईरान के केशम द्वीप के आवासीय क्षेत्र में एक दंपति और उसके दो साल के बच्चे की मौत की खबर सामने आई है।
इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि ‘हम इसका करारा जवाब देंगे’। अमेरिकी सेना के मुताबिक, हमला 29 जुलाई को रात करीब 8 बजे से 10 बजे तक चला। इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स यानी आईआरजीसी के दर्जनों ठिकानों पर बम बरसाए गए। इसमें मिसाइल और ड्रोन के केन्द्र और समुद्री ठिकाने, बंदरगाह में लगे डिफेंस सिस्टम आदि अहम थे।
अमेरिकी हमलों के बीच वाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ राष्ट्रपति ट्रंप की बंद कमरे में बैठक हुई। बताया जाता है कि ईरान वार ही इनका मुख्य एजेंडा था। हाल ही में अमेरिका ने ईरान पर हमला रोका था। इसके बाद ईरान ने पड़ोसी देशों पर मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले नहीं करने की बात कही थी। बेंजामिन और ट्रंप की मुलाकात के बाद ही ईरान ने जॉर्डन पर बम बरसाए, इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
ईरान के पास तीन विकल्प
राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन ने ईरान को तीन विकल्प देने पर सहमति बनी है। पहला कूटनीतिक समाधान है। जानकारी के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और कुशनर अभी भी ईरान के अधिकारियों के साथ सीजफायर पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन कई मुद्दों पर गतिरोध बनी हुई है।
दूसरा विकल्प होर्मुज की नाकेबंदी और आर्थिक दबाव बनाना है। इसके तहत ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने पर दोनों नेताओं ने चर्चा की। इजरायल का मानना है कि ईरान पर दबाव बनाने के लिए अब होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी ही सबसे बड़ा हथियार है। आर्थिक प्रतिबंध कड़े कर ईरान के आर्थिक स्रोत को चोट करने पर वह दबाव में आ सकता है।
तीसरा विकल्प ईरान पर जबरदस्त हमला है। राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का मानना है कि अगर वार्ता से बात नहीं बनती है तो आर्थिक प्रतिबंध का सहारा लेना चाहिए। इसके अलावा सैन्य हमले का विकल्प तो हमेशा खुला है। ऐसी स्थिति में इजरायल अमेरिका मिलकर दोबारा ईरान पर बम बरसा सकते हैं। बैठक में विकल्पों पर विचार के बाद अंतिम फैसला करने का हक राष्ट्रपति ट्रंप को दे दिया गया।

