शिक्षाविदों ने पत्र में क्या कहा
पत्र में कहा गया है कि किसी भी शिक्षाविद पर सार्वजनिक टिप्पणी करते वक्त मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। उनके काम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है। एजुकेशन और एकेडमिक करियर में उनका लंबा अनुभव रहा है। किसी के विचारों से असहमति हो सकती है लेकिन गरिमामय तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए, न की मजाक उड़ाकर।
पत्र में आईआईटी प्रोफेसर कामकोटि को प्रियंका गाँधी ने सदन में ‘गौमूत्र विशेषज्ञ’ कहा था। इसका जिक्र करते हुए पत्र में कहा गया है कि चाहे यह कटाक्ष हो या राजनीतिक बयानबाजी। इसका प्रभाव पड़ता है।
कामकोटि भारत के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ हैं और उन्हें भी अपनी सोच और ज्ञान पर चर्चा करने और वैज्ञानिक संवाद में चर्चा करने का हक है। उनके विचारों पर चर्चा करने के बजाए उसे खारिज कर देना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के खिलाफ है।
इतिहास गवाह है कि अविश्वसनीय आविष्कार और विचार ऐसे ही सामने आते हैं और वैज्ञानिक तरीके से प्रमाणित भी होते रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि अगर आप उनके विचारों से सहमत नहीं है तो उनके तर्कों की आलोचना करें। उनके साक्ष्यों को चुनौती दें। इस तरह से उपहास कर देश के रिसर्च और एजुकेशन सिस्टम को क्या संदेश देना चाहते हैं।
दरअसल प्रियंका गाँधी वाड्रा ने 28 जुलाई को एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रोफेसर कामकोटि को मुस्कुराते हुए कटाक्ष करते हुए ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ (Gaumutra Expert) कहा था। उनकी चर्चा इसलिए संसद में हो रही थी, क्योंकि पीएम मोदी ने परीक्षा में सुधार के लिए एक हाई पॉवर्ड कमेटी बनाने का ऐलान किया, जिसकी कमान उन्होंने नंदन नीलकेणि को सौंपी। इस कमेटी में प्रोफेसर कामकोटि का भी नाम है।
इसी बात को लेकर लोकसभा में कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा ने तंज कसा था। उन्होंने कमेटी में शामिल प्रोफेसर कामकोटि को गौमूत्र विशेषज्ञ कह कर उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की।
कौन हैं प्रोफेसर वी. कामकोटि?
प्रोफेसर वी. कामकोटि का पूरा नाम वेझिनाथन कामकोटि है। वे भारत के अग्रणी और सबसे सम्मानित कंप्यूटर वैज्ञानिकों में से एक गिने जाते हैं। वर्तमान में वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) के डायरेक्टर (Director) के पद पर कार्यरत हैं। जनवरी 2022 में उन्होंने आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर के रूप में कमान संभाली थी।
आईआईटी मद्रास देश का वह संस्थान है जो शिक्षा मंत्रालय की एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग में लगातार कई सालों से भारत का नंबर वन इंजीनियरिंग और ओवरऑल शैक्षणिक संस्थान बना हुआ है। ऐसे विश्वस्तरीय संस्थान का नेतृत्व करना अपने आप में यह साबित करता है कि प्रोफेसर कामकोटि की क्षमताएँ और उनका अनुभव कितना ऊँचा है।
वे न केवल कंप्यूटर साइंस के विद्वान हैं, बल्कि भारत सरकार की कई महत्वपूर्ण नीतियों, राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतियों और डिजिटल पहलों में सलाहकार के रूप में भी जुड़े रहे हैं।
प्रोफेसर कामकोटि की पूरी शैक्षणिक यात्रा असाधारण योग्यताओं और शोध से भरी रही है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग (Computer Science and Engineering) विषय में अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
आइए उनके शैक्षणिक सफर को संक्षेप में जानते हैं-
एम.एस. (M.S.) और पीएचडी (Ph.D.): प्रोफेसर कामकोटि ने आईआईटी मद्रास से ही कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में अपनी एम.एस. और पीएचडी की डिग्रियाँ हासिल कीं। उनका शोध मुख्य रूप से जटिल गणनाओं, कंप्यूटर आर्किटेक्चर और सिस्टम सुरक्षा पर आधारित था।
फैकल्टी के रूप में शुरुआत: वर्ष 2001 में वे आईआईटी मद्रास के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बतौर फैकल्टी सदस्य शामिल हुए।
प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ: डायरेक्टर बनने से पहले उन्होंने आईआईटी मद्रास में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और शैक्षणिक पदों को संभाला। वे जेईई (JEE) के चेयरमैन रह चुके हैं, जिसके तहत देशभर के लाखों छात्रों के लिए आईआईटी में प्रवेश की परीक्षा आयोजित की जाती है। इसके अलावा उन्होंने इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी एंड स्पॉन्सर्ड रिसर्च (ICSR) के एसोसिएट डीन के रूप में भी काम किया।
कंप्यूटर आर्किटेक्चर और ‘शक्ति’ माइक्रोप्रोसेसर के जनक
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रोफेसर कामकोटि का सबसे बड़ा योगदान भारत को सेमीकंडक्टर और माइक्रोप्रोसेसर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना माना जाता है।
माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम: प्रोफेसर कामकोटि आईआईटी मद्रास के ‘माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम’ का नेतृत्व करते हैं।
स्वदेशी ‘शक्ति’ (SHAKTI) प्रोसेसर: उनके ही मार्गदर्शन में भारत का पहला व्यावसायिक स्तर का स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ विकसित किया गया था। इस सफलता ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में ला खड़ा किया जो खुद का माइक्रोप्रोसेसर डिजाइन करने में सक्षम हैं।
- इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी: वे कंप्यूटर आर्किटेक्चर के साथ-साथ इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी (सूचना सुरक्षा) और वीएलएसआई (VLSI) डिजाइन के विशेषज्ञ हैं। वे आईआईटी मद्रास में ‘इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी एजुकेशन एंड अवेयरनेस प्रोग्राम’ का भी नेतृत्व कर रहे हैं।

