जेएनयू एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वजह है एक कार्यक्रम में UAPA के तहत देश के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर जेल में बंद ‘उमर खालिद की रिहाई की माँग’। दरअसल यूनिवर्सिटी कैंपस में उमर खालिद की किताब ‘फ्रैक्चर्ड कम्यूनिटी’ पर चर्चा के लिए कार्यक्रम आयोजित की गई थी। इसी दिन किताब पर चर्चा के दौरान ‘जेल के ताले टूटेंगे, सारे साथी छूटेंगे’ और ‘उमर खालिद को छोड़ दो’ जैसे नारे लगे। ये कार्यक्रम जेएनयू छात्र संघ ने आयोजित किया था। इसके जवाब में एबीवीपी ने उमर खालिद के खिलाफ नारे लगाए।
दो छात्र संघों की नारेबाजी की वजह से कार्यक्रम स्थल पर तनाव का माहौल बन गया। कार्यक्रम पहले ऑडिटोरियम में आयोजित की गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने पर जेएनयू छात्र संघ ने एसएसएस-2 कैंपस में कार्यक्रम किया।
मुंबई में TISS के दो छात्रों की नहीं मिली थी जमानत
उमर खालिद पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज है इसलिए मुंबई में 12 अक्टूबर 2025 को इसी तरह उमर खालिद और शरजील इमाम के पक्ष में नारे लगाने पर TISS के दो छात्रों को कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था।
ये लोग माओवादी जीएन साईबाबा की बरसी पर कार्यक्रम कर रहे थे। दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर को 2017 में माओवादियों से संबंध रखने का दोषी ठहराया गया था, हालाँकि 2024 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट ने बरी कर दिया।
पुलिस ने इस मामले में 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी, जिसे बाद में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्राँच को ट्रांसफर कर दिया गया। आरोपों के मुताबिक, छात्रों ने सभा के दौरान उमर खालिद और शरजील इमाम को जेल से रिहा करने की माँग वाले नारे भी लगाए।
अतिरिक्त सत्र जज वीबी बोहरा ने दोनों छात्रों को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि जीएन साईबाबा को लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया गया था और इसलिए उन्हें श्रद्धांजलि देना गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि दोनों पर उमर खालिद और शरजील इमाम की जेल से रिहाई के समर्थन में नारे लगाने का आरोप है, जबकि दोनों पर UAPA के तहत देश के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियों से संबंधित मुकदमा चल रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि नारे किसी सार्वजनिक आंदोलन या जुलूस के दौरान नहीं लगाए गए थे। जज ने कहा कि छात्र होने के नाते आरोपितों से कानून की मर्यादा का सम्मान करने की अपेक्षा की जाती है। इसी आधार पर कोर्ट ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिकाएँ खारिज कर दीं थी।

