गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में आपराधिक मामला खारिज, कोर्ट ने DOJ की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

अमेरिका की एक संघीय अदालत ने सोमवार (10 अगस्त 2026) को भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को खारिज कर दिया। ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला जज निकोलस गारौफिस ने संघीय अभियोजकों को यह मामला खारिज करने की अनुमति दे दी।

हालाँकि मामले को खारिज करने की मंजूरी देने वाले जज ने इस बात पर कई सवाल उठाए कि अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोपों को वापस लेने का फैसला कैसे किया। जज निकोलस गारौफिस ने संघीय अभियोजकों को मामला खारिज करने की अनुमति दी, लेकिन उनसे यह बताने को कहा कि वे आरोप वापस क्यों लेना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि न्याय विभाग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया असामान्य और चिंता पैदा करने वाली थी। जज ने विशेष रूप से प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल ट्रेंट मैककॉट्टर की भूमिका पर सवाल उठाया। मैककॉट्टर ने यह तय करने की प्रक्रिया में अडानी के बचाव पक्ष के वकीलों के साथ काम किया था कि मामले को खारिज किया जाना चाहिए या नहीं।

गारौफिस ने कहा कि ऐसा लगता है कि मैककॉट्टर ने मामले पर काम कर चुके कई संघीय अधिकारियों और जाँचकर्ताओं की राय को नजरअंदाज किया और इसके बजाय अपने फैसले पर भरोसा किया।

10 अरब डॉलर के निवेश को लेकर उठे सवाल

कोर्ट के सामने मुख्य मुद्दों में से एक अमेरिका में 10 अरब डॉलर का निवेश करने का अडानी का वादा था। अडानी ने नवंबर 2024 में यह निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई थी।
अप्रैल 2026 में अडानी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील रॉबर्ट जे गिउफ्रा जूनियर के नेतृत्व में एक कानूनी टीम ने न्याय विभाग (DoJ) के मुख्यालय में हुई एक बैठक में हिस्सा लिया।

इस बैठक में गिउफ्रा ने यह तर्क देते हुए अडानी का बचाव किया कि पर्याप्त सबूत नहीं हैं और अमेरिका का इस मामले पर अधिकार क्षेत्र भी नहीं बनता, क्योंकि कथित गतिविधियाँ पूरी तरह भारत में हुई थीं और बॉन्ड अमेरिकी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध नहीं थे। साथ ही निवेशकों को उनका पूरा पैसा वापस कर दिया गया था, इसलिए किसी निवेशक को नुकसान नहीं हुआ।

बैठक के दौरान गिउफ्रा ने 100 स्लाइड का एक प्रेजेंटेशन दिया, इनमें से एक स्लाइड में नवंबर 2024 में अडानी द्वारा किए गए 10 अरब डॉलर के निवेश के वादे का जिक्र था, जिससे लगभग 15,000 नौकरियाँ पैदा होने की बात कही गई थी।

100 स्लाइड के इस प्रेजेंटेशन में मुख्य रूप से यह बताया गया था कि अभियोजकों के पास अडानी के खिलाफ पर्याप्त सबूत क्यों नहीं थे। जज ने इससे पहले पूछा था कि क्या इस निवेश के वादे ने न्याय विभाग के आपराधिक मामले को खत्म करने के फैसले में कोई भूमिका निभाई थी।

मैककॉट्टर ने इससे इनकार किया और कहा कि निवेश के वादे ने उनके फैसले को प्रभावित नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि इसके विपरीत संकेत देने वाली मीडिया रिपोर्ट गलत थीं।हालाँकि 15 जुलाई को दाखिल किए गए एक शपथपत्र में अडानी ने 10 अरब डॉलर के निवेश के वादे को स्वीकार किया।

उन्होंने कहा कि उनके वकीलों ने न्याय विभाग के साथ हुई बैठकों के दौरान बताया था कि यह निवेश मामले के ‘समाधान का हिस्सा’ हो सकता है। अडानी के वकील रॉबर्ट गिउफ्रा ने भी कहा कि आरोपित पक्ष ने न्याय विभाग को बताया था कि अडानी समूह मामले के समाधान के हिस्से के रूप में निवेश के वादे को पूरा करने के लिए तैयार था।

गारौफिस ने कहा कि वह यह फैसला नहीं कर रहे हैं कि इस तरह के प्रस्ताव उचित थे या नहीं। उन्होंने कहा कि जनता को यह तय करना होगा कि इस तरह के प्रस्ताव समान न्याय और कानून के शासन पर क्या प्रभाव डाल सकते हैं।

न्याय विभाग ने आरोप क्यों हटाए?

अडानी पर 2024 में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने एक अडानी ग्रुप की सहायक कंपनी को सौर ऊर्जा परियोजना की मंजूरी दिलाने में मदद करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने पर सहमति जताई थी। अमेरिकी अभियोजकों ने उन पर अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की भ्रष्टाचार-विरोधी नीतियों के बारे में गुमराह करने वाली जानकारी देने का भी आरोप लगाया था।

अडानी ग्रुप ने लगातार किसी भी गलत काम से इनकार किया है। गौतम अडानी भी आरोपों का जवाब देने के लिए अमेरिका की किसी अदालत में पेश नहीं हुए हैं। 4 जुलाई को दाखिल एक दस्तावेज में मैककॉट्टर ने कहा कि मामला मुख्य रूप से विदेशी प्रकृति का था, इसे साबित करना मुश्किल था और यह न्याय विभाग की मौजूदा प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं था।

उन्होंने कहा कि उन्होंने बचाव पक्ष के वकीलों से मुलाकात करने, न्याय विभाग के वकीलों से सलाह लेने और खुद शोध व विश्लेषण करने के बाद यह फैसला लिया। न्याय विभाग के सामने अडानी परिवार और ग्रुप की कंपनियों से जुड़े अलग-अलग घटनाक्रम भी हैं।

अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा दायर एक दीवानी मामले में गौतम अडानी 60 लाख डॉलर और उनके भतीजे सागर अडानी 1.2 करोड़ डॉलर का भुगतान करने पर सहमत हुए। अलग से अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों से जुड़े उल्लंघनों को निपटाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को 27.5 करोड़ डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई।

अडानी ने कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

फैसले के बाद गौतम अडानी ने कहा कि वह न्यायिक प्रक्रिया के प्रति ‘विनम्रता और गहरे सम्मान’ के साथ कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।