उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक साथ कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगा दी। दिवाली से ठीक पहले उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए मुफ्त गैस सिलेंडर की व्यवस्था जारी रखी गई है।
भदोही जिले के नाम में संत रविदास का नाम दोबारा जोड़ने का फैसला हुआ है। पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलेगा, आंगनबाड़ी कर्मियों को साल में तीन साड़ियाँ दी जाएँगी, और किसानों से धान व मोटे अनाज की खरीद की नीति भी तय हो गई।
लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता… https://t.co/Q7UzpNLHJu
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 9, 2026
उज्ज्वला के लाभार्थियों को फिर मिलेंगे 2 मुफ्त सिलेंडर
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को दिवाली और होली पर एक-एक मुफ्त एलपीजी रिफिल देने की योजना जारी रखने को मंजूरी मिल गई। वित्त वर्ष 2026-27 में पात्र परिवारों को दो सिलेंडर रिफिल मुफ्त मिलेंगे। इस पर राज्य सरकार ₹2142.78 करोड़ खर्च करेगी।
खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि पहला रिफिल अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच दिवाली के मौके पर मिलेगा। दूसरा जनवरी से मार्च 2027 के बीच होली पर दिया जाएगा। शर्त यह है कि लाभार्थी का बैंक खाता आधार से जुड़ा हो और आधार प्रमाणीकरण पूरा हो चुका हो।
जिनका प्रमाणीकरण बाकी है, उन्हें लाभ के लिए यह काम निपटाना होगा। सरकार का कहना है कि पिछले वित्तीय वर्षों में भी यही व्यवस्था चल रही थी। उसके मुताबिक इससे गरीब परिवारों में स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल बढ़ेगा और महिलाओं व बच्चों को पारंपरिक ईंधन के धुएँ से होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी।
भदोही का नाम होगा ‘संत रविदासनगर भदोही’
कैबिनेट ने भदोही जिले का नाम बदलकर ‘संत रविदासनगर भदोही’ करने का प्रस्ताव पास कर दिया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि इस फैसले का आधार भारतीय संत परंपरा और सामाजिक सुधार में संत रविदास का योगदान है। नए नाम में उनके सम्मान के साथ भदोही की पहचान भी बनी रहेगी।
इस नाम का इतिहास सियासी उठापटक से जुड़ा है। 1997 में मायावती सरकार ने जिले का नाम संत रविदास नगर रखा था। 2014 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ने इसे बदलकर सिर्फ भदोही कर दिया। अब योगी सरकार ने रविदास का नाम वापस जोड़ा है पर भदोही को भी नाम से हटाया नहीं है।

आंगनबाड़ी कर्मियों को मिलेगी तीसरी साड़ी
प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अब साल में दो की जगह तीन साड़ियाँ मिलेंगी। अभी केंद्र और राज्य की 60:40 की हिस्सेदारी वाली योजना के तहत दो साड़ियाँ दी जाती हैं। तीसरी साड़ी का पूरा खर्च राज्य सरकार अपने बजट से उठाएगी।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के अनुसार प्रदेश में 190145 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं और इतनी ही कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के पद हैं। यानी कुल 380290 कर्मियों को अतिरिक्त साड़ी का फायदा होगा। हर साड़ी के लिए ₹500 तय किए गए हैं और कुल अनुमानित खर्च ₹19.02 करोड़ आएगा।
आंगनबाड़ी कर्मियों को ड्यूटी पर तय वेशभूषा में रहना होता है। रोज के इस्तेमाल, धुलाई, खराब मौसम या साड़ी अचानक गंदी-खराब हो जाने जैसी दिक्कतों को देखते हुए यह फैसला हुआ। ये केंद्र छह माह से छह साल तक के बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को पूरक पोषाहार देते हैं। आकांक्षात्मक जिलों में 14 से 18 साल की किशोरियाँ भी इसके दायरे में हैं।
पूर्व अग्निवीरों को चार विभागों में 20 प्रतिशत आरक्षण
कैबिनेट ने पूर्व अग्निवीरों की भर्ती से जुड़ी नियमावली में संशोधन को हरी झंडी दे दी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अग्निवीर योजना के तहत भर्ती 2022 में शुरू हुई थी, इसी को देखते हुए नियम बदले गए हैं। नए प्रावधानों के मुताबिक:
- पुलिस, वन, कारागार और परिवहन विभाग की भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों को 20% आरक्षण मिलेगा। अभ्यर्थियों को उनकी मूल श्रेणी के हिसाब से लाभ दिया जाएगा।
- अधिकतम आयु सीमा 25 से बढ़ाकर 28 वर्ष की गई है, यानी तीन साल की छूट।
- लिखित और शारीरिक परीक्षा से छूट रहेगी। उन्हें सिर्फ मेडिकल जाँच से गुजरना होगा।
सरकार का तर्क है कि सेवा अवधि पूरी करने के बाद अग्निवीरों के लिए रोजगार बड़ा सवाल है और सैन्य प्रशिक्षण व अनुशासन वाले युवाओं को राज्य की सेवाओं में जगह मिलने से यह राह आसान होगी।
मोटे अनाज की खरीद: 2.85 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य
कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए मक्का, बाजरा और ज्वार की क्रय नीति को मंजूरी दी। खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि किसानों से केंद्र सरकार के तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद होगी। खरीद की अवधि 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक है।
कुल 2.85 लाख मीट्रिक टन का कार्यकारी लक्ष्य रखा गया है। इसमें बाजरा 2.20 लाख मीट्रिक टन, ज्वार 50 हजार मीट्रिक टन और मक्का 15 हजार मीट्रिक टन है। खरीद के लिए 455 केंद्र खोलने का प्रस्ताव है: बाजरे के 300, ज्वार के 80 और मक्का के 75। केंद्र उन इलाकों में बनेंगे, जहाँ संबंधित फसल की अच्छी आवक होती है।
दाम इस तरह रहेंगे:
- बाजरा: ₹2775 से बढ़कर ₹2900 प्रति क्विंटल
- मक्का: ₹2410 प्रति क्विंटल
- हाइब्रिड ज्वार: ₹3699 से बढ़कर ₹4023 प्रति क्विंटल
- ज्वार मालदांडी: ₹4073 प्रति क्विंटल
किसानों को खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट www.fcs.up.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। केंद्र पर कंप्यूटरीकृत सत्यापित खतौनी, फोटो पहचान पत्र और आधार कार्ड के आधार पर खरीद होगी। ई-पॉप मशीन से बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया एनआईसी के बनाए सॉफ्टवेयर पर ऑनलाइन चलेगी। भुगतान आधार से जुड़े और एनपीसीआई से मैप बैंक खातों में पीएफएमएस पोर्टल के जरिए होगा। खाते के सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे में पैसा किसान तक पहुँचाने की बात कही गई है।
धान खरीद: पिछले साल का 62 लाख टन का रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी
कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान क्रय नीति को भी मंजूरी दे दी। मनोज पांडेय ने बताया कि पिछले साल उत्तर प्रदेश ने 62 लाख मीट्रिक टन धान खरीदकर देश में पहला स्थान पाया था। इस बार लक्ष्य 65 लाख मीट्रिक टन का है, यानी तीन लाख टन ज्यादा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खरीद 15 अक्टूबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक चलेगी, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक। सामान्य धान 2441 रुपये और ग्रेड-ए धान 2461 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदा जाएगा। पिछले साल के मुकाबले एमएसपी में करीब तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
खरीद 8 एजेंसियाँ करेंगी: खाद्य विभाग, पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस, मंडी परिषद और उससे जुड़े एफपीओ-एफपीसी, एनसीसीएफ, नैफेड और भारतीय खाद्य निगम। कुल 4500 क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं। हर जिले में केंद्रों का स्थान जिलाधिकारी पैदावार, आवक और स्थानीय हालात देखकर एजेंसियों के बीच तय करेंगे।
पारदर्शिता के लिए क्रय केंद्रों से चावल मिलों तक धान ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस अनिवार्य कर दिया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत चुने गए जिलों में चावल के बोरों पर क्यूआर कोड लगाकर माल की आवाजाही और बिलिंग पर नजर रखी जाएगी। बोरों की कमी न हो, इसके लिए भी इंतजाम हैं: 80 हजार बोरे पहले ही उपलब्ध करा दिए गए हैं और कुल 12.25 लाख बोरे जुटाने की तैयारी है।
बैठक में ये फैसले भी
- आयुष छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता दोगुना: बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस छात्रों का रोटेटिंग इंटर्नशिप भत्ता ₹7500 से बढ़ाकर ₹15000 कर दिया गया।
- 1725 नई इलेक्ट्रिक बसें: 18 नगर निगम क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन सुधार के लिए 1725 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जाएँगी।
- लखनऊ में इंटीग्रेटेड बस टर्मिनल: वृंदावन विहार योजना क्षेत्र में पीपीपी मॉडल (ओमेक्स लिमिटेड के साथ) पर नया बस टर्मिनल (लागत करीब ₹265 करोड़)।
- उत्तर प्रदेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन (UP-AIM) की स्थापना: सभी 75 जिलों में एआई केंद्र खोले जाएँगे, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शीर्ष समिति सहित तीन समितियाँ बनेंगी।
- उत्तर प्रदेश स्टार्टअप क्रय योजना-2026।
- उत्तर प्रदेश ब्याज माफी योजना-2026 (राज्यकर/जीएसटी ब्याज माफी)।
- औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल भवन विनियम-2026।
- मैनपुरी में शिकोहाबाद-भोगाँव राज्य मार्ग के चौड़ीकरण आदि अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रस्ताव।

