समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को अयोध्या पहुँचे। वे वहाँ पूर्व मंत्री पवन पांडेय के यहाँ आयोजित भागवत कथा में शामिल हुए लेकिन जिस राम मंदिर को देखने देश-दुनिया से लोग आते हैं, उसके दर्शन के लिए नहीं गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने सपा प्रमुख पर जमकर निशाना साधा।
आज अयोध्या की पावन धरती पर कलियुग के ताप को हरकर इहलोक को संवारने वाली और परलोक को सुधारने वाली ‘भागवतकथा’ का अमृतपान करने के सौभाग्यशाली क्षण। बचपन में किसी ने बताया था कि ‘जो भव के बंधन से मुक्त कराए वही भागवत।’ और ‘जो व्यथा हरे, वही कथा’। आज का समय क्योंकि बंधनों और व्यथाओं से भरा है – अहंकार के बंधन, सत्ता के बंधन, जाति के बंधन, भेदभाव के बंधन, वैमनस्य के बंधन, ऊँच-नीच के बंधन, छुआछूत के बंधन, शुद्धि-अशुद्धि के बंधन और भी अनेक प्रकार के सामाजिक और मानसिक बंधन, इसीलिए भागवतकथा का महत्व और प्रासंगिकता आज और भी बढ़ गई है। कथा सिर्फ कहानी नहीं होती जो मनोरंजन करती है, कथा तो ‘मनोवर्द्धन’ करती है। कहानी मन को बहलाती है, कथा मन और मनोबल को बड़ा बनाती है। कहानी के अंत होने पर आनंद का क्षणिक अनुभव होता है, जबकि कथा खत्म होने पर उत्तरदायित्व की अमिट गहरी अनुभूति होती है। कथा के मूल संदेश को जीवन में उतारने से ही कथा सुनने का पुण्य प्राप्त होता है। भागवतकथा इसीलिए कथा है, कहानी नहीं। वो सिर्फ कृष्ण जी के बारे में नहीं बताती, वो हमें कृष्ण जी जैसा बनने के लिए हमें प्रेरित करती है। भागवतकथा वाचन-श्रवण से बढ़कर, व्यक्तिगत प्रेम और सामाजिक समानता का संविधान है। भागवतकथा सिखाती है – प्रेम ही सबसे बड़ा परमार्थ है। भागवतकथा दया और करुणा का पाठ पढ़ाती है। भागवतकथा भेदभाव मिटाकर समानता सिखाती है। भागवत कथा की अनंत सीखों में से एक विशेष सीख ये भी मिलती है कि ‘प्रेम, दया, अपनापन’ ही सबसे बड़ा मानव-धर्म है। मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से, भागवतकथा का सबसे बड़ा सबक यही है कि ‘भेदभाव मिटाओ, समानता लाओ’। कृष्ण जी ने सिखाया कि सत्ता आती-जाती आज के समय में, प्रेम और समानता के महाकाव्य को हम ‘संविधान’ कहते हैं। इसीलिए हमें संविधान की रक्षा करनी है। मुझे लगता है भागवतकथा ‘शोषित, पीड़ित, वंचित के उद्धार’ का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें ‘राज’ का मतलब शासन नहीं, सबको साथ लेकर चलना है। मेरे लिए भागवतकथा ‘सामाजिक न्याय के राज’ के उदाहरणों का एक संकलन है, जिसमें विदुर जी भी हैं, सुदामा जी भी हैं और कुब्जा भी। इन चरित्रों के माध्यम से मैंने तो यही सीखा कि किसी भी उपेक्षित, विपन्न व उपेक्षित को उसके तिरस्कृत होने या वंचित होने के भाव से मुक्त करना ही सामाजिक न्याय है। साथ ही जिस ‘बंधु-राष्ट्र’ बनाने का संकल्प हम लेकर चले हैं, भागवतकथा उसका प्रकाश स्तंभ बनकर हमें राह दिखाती है। भागवत कथा सदियों से चलती चली आ रही है और सदियों तक चलेगी क्योंकि नफ़रत और भेदभाव हर युग में होंगे, तो कृष्ण जी की चेतना भी प्रेम, दया और अपनापन से उनका अंत करने के लिए विविध रूप में सक्रिय होती रहेगी व मानवता को चिरायु होने का वरदान देती रहेगी। ‘भागवतकथा’ का यही है सार ’प्रेम’ ही है सबसे बड़ा संस्कार ’दया’ से ही पूर्ण होता ये संसार ’अपनापन’ जीवन का आधार ‘भागवतकथा’ का यही है सार ’सामाजिक-न्याय’ हो आधार! ’मिटें भेद सब, हो सबका उद्धार निर्मूल हो ‘पीड़ा, दुख, अपमान’ ’शोषित-वंचितों’ का हो उत्थान बनके ‘बंधु-राष्ट्र’ करें कल्याण ‘भागवतकथा’ का यही है सार अमर नहीं होता किसी का राज अंत में मारा ही जाता ‘अहंकार’ और होता है पापियों का संहार ‘भागवतकथा’ का यही है सार
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 8, 2026
‘अखिलेश की राम भक्ति पर सवाल’
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अयोध्या आकर भी रामलला के द्वार तक न जाना अखिलेश की राम भक्ति को संदेह के घेरे में डालता है। उनका कहना था कि प्रदेश की जनता और राम भक्त सब देख रहे हैं। मौर्य ने याद दिलाया कि दुनिया के कोने-कोने से लोग अयोध्या आकर रामलला के दर्शन करते हैं, पर सपा प्रमुख शहर में होकर भी मंदिर से दूरी बनाए रखे।
अखिलेश के हाल के बयान “राम और कृष्ण एक ही हैं” पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि अगर वाकई ऐसा है तो अखिलेश कृष्ण जन्मभूमि भी जाएँ, श्रीराम जन्मभूमि भी जाएँ और काशी विश्वनाथ भी जाएँ। डेप्यूटी सीएम मौर्य के मुताबिक उन्हें हर जगह अपने अल्पसंख्यक वोट बैंक खिसकने का डर सताएगा।
लखनऊ: केशव मौर्य ने अखिलेश के अयोध्या दौरे पर निशाना साधा 🔹 केशव मौर्य ने कहा कि अखिलेश ने राम मंदिर नहीं गया। 🔹 उन्होंने कहा कि अयोध्या जाने वालों का रामलला दर्शन करना जरूरी माना जाता है। 🔹 मौर्य ने अखिलेश की रामभक्ति की निष्ठा पर सवाल उठाए। 🔹 उन्होंने कहा कि वोटबैंक के डर से मंदिर जाने से बचते हैं। #Lucknow #KeshavPrasadMaurya #AkhileshYadav #Ayodhya #BreakingNews @kpmaurya1 @BJP4UP @myogiadityanath
— News India 24×7 (@newsindia24x7_) October 8, 2026
‘सपा नेताओं के हाथ कारसेवकों के खून से रंगे‘
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने और भी तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सपा को सनातन संस्कृति से कोई लेना-देना ही नहीं है। पाठक के अनुसार अखिलेश की पार्टी सिर्फ तुष्टीकरण और वोट की राजनीति करती है, इसीलिए राम मंदिर जाने से कतराती है।
उन्होंने कहा, “सपा नेताओं के हाथ कारसेवकों के खून से रंगे हैं, तो वे राम मंदिर किस मुँह से जाएँगे?” पाठक का दावा है कि अखिलेश को डर है कि मंदिर गए तो अल्पसंख्यक वोट छिटक जाएगा, इसलिए पूरा मामला वोट पॉलिटिक्स का है, आस्था का नहीं।
आगरा, उत्तर प्रदेश: उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर कहा, "समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अयोध्या धाम जाकर भी रामलला के दर्शन नहीं करेंगे, क्योंकि कारसेवकों के खून से समाजवादी पार्टी के हाथ रंगे हुए हैं। वे सनातन संस्कृति के घोर विरोधी हैं। ये केवल मुस्लिम तुष्टिकरण पर आधारित पार्टियां हैं। ये जातिवाद और मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण ही राजनीति में हैं। इनका सर्व समाज से कोई लेना-देना नहीं है। ये सनातन संस्कृति के घोर विरोधी हैं।"
— IANS Hindi (@IANSKhabar) October 8, 2026
‘जीतने पर चुनाव आयोग अच्छा, हारने के बाद बुरा’
एसआईटी को लेकर विपक्ष के शोर पर भी ब्रजेश पाठक ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि विपक्ष जीतता है तो चुनाव आयोग उसे अच्छा लगता है और हारता है तो सारी खीज आयोग पर निकाल देता है। उन्होंने याद दिलाया कि केरल, तमिलनाडु और हिमाचल में विपक्ष को जीत मिली, पर तब किसी ने आयोग पर सवाल नहीं उठाया। इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉन्ग्रेस के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को जवाब देश की जनता देगी।
2027 की हार का डर?
डेप्यूटी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा को भी पता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उसकी लुटिया डूबने वाली है। इसी वजह से विपक्ष अभी से षड्यंत्र रचकर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है, ताकि हार के बाद मुँह छिपाने की जगह मिल जाए।
आपको बता दें कि अखिलेश यादव का यह अयोध्या दौरा ऐसे समय हुआ है, जब प्रदेश में 2027 के चुनाव की तैयारियाँ जोरों पर हैं। ऐसे में वहाँ जाकर रामलला से दूरी बनाना सत्ता पक्ष को सपा के खिलाफ एक और मुद्दा थमा गया है। भाजपा नेताओं का साफ कहना है कि जनता सब देख रही है और जवाब वोट से देगी।

