अयोध्या जाकर भी अखिलेश यादव ने नहीं किया रामलला का दर्शन… अल्पसंख्यक वोट बैंक खिसकने का डर?

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को अयोध्या पहुँचे। वे वहाँ पूर्व मंत्री पवन पांडेय के यहाँ आयोजित भागवत कथा में शामिल हुए लेकिन जिस राम मंदिर को देखने देश-दुनिया से लोग आते हैं, उसके दर्शन के लिए नहीं गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने सपा प्रमुख पर जमकर निशाना साधा।

‘अखिलेश की राम भक्ति पर सवाल’

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अयोध्या आकर भी रामलला के द्वार तक न जाना अखिलेश की राम भक्ति को संदेह के घेरे में डालता है। उनका कहना था कि प्रदेश की जनता और राम भक्त सब देख रहे हैं। मौर्य ने याद दिलाया कि दुनिया के कोने-कोने से लोग अयोध्या आकर रामलला के दर्शन करते हैं, पर सपा प्रमुख शहर में होकर भी मंदिर से दूरी बनाए रखे।

अखिलेश के हाल के बयान “राम और कृष्ण एक ही हैं” पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि अगर वाकई ऐसा है तो अखिलेश कृष्ण जन्मभूमि भी जाएँ, श्रीराम जन्मभूमि भी जाएँ और काशी विश्वनाथ भी जाएँ। डेप्यूटी सीएम मौर्य के मुताबिक उन्हें हर जगह अपने अल्पसंख्यक वोट बैंक खिसकने का डर सताएगा।

‘सपा नेताओं के हाथ कारसेवकों के खून से रंगे‘

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने और भी तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सपा को सनातन संस्कृति से कोई लेना-देना ही नहीं है। पाठक के अनुसार अखिलेश की पार्टी सिर्फ तुष्टीकरण और वोट की राजनीति करती है, इसीलिए राम मंदिर जाने से कतराती है।

उन्होंने कहा, “सपा नेताओं के हाथ कारसेवकों के खून से रंगे हैं, तो वे राम मंदिर किस मुँह से जाएँगे?” पाठक का दावा है कि अखिलेश को डर है कि मंदिर गए तो अल्पसंख्यक वोट छिटक जाएगा, इसलिए पूरा मामला वोट पॉलिटिक्स का है, आस्था का नहीं।

‘जीतने पर चुनाव आयोग अच्छा, हारने के बाद बुरा’

एसआईटी को लेकर विपक्ष के शोर पर भी ब्रजेश पाठक ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि विपक्ष जीतता है तो चुनाव आयोग उसे अच्छा लगता है और हारता है तो सारी खीज आयोग पर निकाल देता है। उन्होंने याद दिलाया कि केरल, तमिलनाडु और हिमाचल में विपक्ष को जीत मिली, पर तब किसी ने आयोग पर सवाल नहीं उठाया। इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉन्ग्रेस के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को जवाब देश की जनता देगी।

2027 की हार का डर?

डेप्यूटी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा को भी पता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उसकी लुटिया डूबने वाली है। इसी वजह से विपक्ष अभी से षड्यंत्र रचकर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहा है, ताकि हार के बाद मुँह छिपाने की जगह मिल जाए।

आपको बता दें कि अखिलेश यादव का यह अयोध्या दौरा ऐसे समय हुआ है, जब प्रदेश में 2027 के चुनाव की तैयारियाँ जोरों पर हैं। ऐसे में वहाँ जाकर रामलला से दूरी बनाना सत्ता पक्ष को सपा के खिलाफ एक और मुद्दा थमा गया है। भाजपा नेताओं का साफ कहना है कि जनता सब देख रही है और जवाब वोट से देगी।