गोरखनाथ मंदिर में कन्या पूजन कर बोले योगी- नारी गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं; सदन में पिछली सरकार से महिला भागीदारी में बड़ा अंतर; पुलिस में भी 4 गुना ज्यादा बेटियॉं

महानवमी पर गोरखनाथ मंदिर में कन्याओं के पॉंव पखारने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि जो समाज जगत जननी का उपासक है, वहॉं नारी गरिमा के खिलाफ आचरण की कोई जगह नहीं। 

सोमवार (19 अक्टूबर, 2026) को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा ने मातृशक्ति को हमेशा सबसे ऊपर रखा है और सरकार ने इसे सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शासन के कामकाज का हिस्सा बनाया है। मिशन शक्ति अभियान इसी सोच से निकला है।

मंदिर की परंपरा के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कुंवारी कन्याओं के पैर धोए, तिलक लगाया, माला पहनाई और चुनरी ओढ़ाकर पूजन किया। बटुकों का भी पूजन हुआ। फिर योगी ने अपने हाथों से कन्याओं को भोजन परोसा और विदाई में दक्षिणा व उपहार दिए। साधु-संत और कई श्रद्धालु इस मौके पर मौजूद रहे।

सदन में महिलाओं की भागीदारी में आया बड़ा अंतर

नारी सम्मान की बातें हर सरकार करती है। असली पैमाना यह है कि सत्ता और सदन में महिलाओं को कितनी जगह मिली। इस पैमाने पर अखिलेश यादव का दौर और योगी का दौर आमने-सामने रखें तो फर्क साफ दिखता है। 2012 में जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तब 403 सीटों वाली विधानसभा में सिर्फ 35 महिलाएँ जीतकर पहुंची थीं। उपचुनाव जोड़ने के बाद भी पॉंच साल में यह संख्या 40 से आगे नहीं बढ़ी।

2017 में योगी सरकार आई तो जीतकर आने वाली महिलाओं की संख्या 42 हुई। पहली बार सदन में महिलाओं की हिस्सेदारी 10 फीसदी के पार गई। 2022 में यह और बढ़कर 47 हो गई। ADR के अनुसार यह यूपी विधानसभा के इतिहास में महिलाओं की सबसे बड़ी संख्या है और कुल सदस्यों का करीब 12 फीसदी। 

उपचुनावों के बाद अब यह आंकड़ा 48 पहुंच गया। ADR की ताजा रिपोर्ट में देश की सभी विधानसभाओं में सबसे ज्यादा महिला विधायक यूपी में ही हैं, जबकि पश्चिम बंगाल 40 के साथ दूसरे नंबर पर है। एक और आंकड़ा गौर करने लायक है। 2022 में चुनी गई 47 महिला विधायकों में समाजवादी पार्टी की सिर्फ 14 थीं।

मंत्रिमंडल में भी फर्क

अखिलेश यादव ने 2012 में 19 कैबिनेट और 28 राज्यमंत्रियों के साथ शपथ ली थी। कैबिनेट स्तर पर किसी भी महिला का नाम नहीं था। राज्यमंत्रियों में ओमवती का नाम आता है और 2015 के फेरबदल में सैयदा शादाब फातिमा को स्वतंत्र प्रभार वाला राज्यमंत्री बनाया गया। पॉंच साल की सरकार में महिला मंत्रियों के नाम गिनती के ही रहे।

योगी सरकार की पहली पारी में पॉंच महिला मंत्री थीं। 2022 में दोबारा सरकार बनी तो 52 मंत्रियों में फिर पॉंच महिलाएँ शामिल हुईं: बेबी रानी मौर्य, गुलाब देवी, प्रतिभा शुक्ला, रजनी तिवारी और विजय लक्ष्मी गौतम। उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जबकि गुलाब देवी को राज्यमंत्री से बढ़ाकर स्वतंत्र प्रभार मिला।

दिलचस्प यह है कि इसी साल मई में खुद अखिलेश यादव ने योगी सरकार के संभावित विस्तार पर सवाल उठाते हुए कैबिनेट में महिलाओं के लिए आरक्षण की मॉंग की थी। यह मॉंग उसी नेता की तरफ से आई, जिनकी अपनी सरकार में महिला मंत्रियों की गिनती उंगलियों पर हो जाती थी।

पुलिस में 10 हजार से 45 हजार

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 तक यूपी पुलिस में करीब 10 हजार महिला कर्मी थीं। आज करीब 45 हजार महिला पुलिसकर्मी सेवा दे रही हैं। पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए 20 फीसदी सीटें आरक्षित हैं।

प्रदेश के हर थाने में महिला हेल्प डेस्क बनी है। यहॉं शिकायत सुनने के लिए अलग कक्ष है और महिला बीट अधिकारी या उपनिरीक्षक स्तर की महिला अफसर बैठती हैं। 1090 वीमेन हेल्पलाइन भी चल रही है। योगी ने कहा कि नारी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है।

योजनाओं का लेखा-जोखा

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से चल रही बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मातृ वंदना योजना और नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र किया और राज्य की योजनाएँ भी गिनाईं। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना में बेटी के जन्म से स्नातक तक की पढ़ाई के लिए अलग-अलग चरणों में ₹25 हजार मिलते हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में शादी के लिए ₹1 लाख की मदद दी जाती है और अब तक 5 लाख से ज्यादा कन्याओं के विवाह इसके जरिए हो चुके हैं।

स्वावलंबन की बात करें तो 54 हजार बीसी सखी ग्राम पंचायतों में बैंकिंग सेवाएँ पहुँचा रही हैं। ड्रोन दीदी और लखपति दीदी जैसे कार्यक्रमों से भी महिलाओं को आगे बढ़ने के मौके मिल रहे हैं। योगी ने कहा कि सरकार बेटियों की शिक्षा, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता के लिए लगातार काम कर रही है।

शक्तिपीठों में उमड़ी भीड़

नवरात्रि में प्रदेश के करीब 45 हजार स्थानों पर दुर्गा पूजा पंडाल सजे हैं। देवी मंदिरों और शक्तिपीठों में भारी भीड़ है। मुख्यमंत्री के मुताबिक मॉं विंध्यवासिनी धाम में कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। रविवार को अकेले एक दिन में 25 लाख से ज्यादा लोगों ने दर्शन-पूजन किया और सोमवार को भी 20 से 25 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

देवीपाटन शक्तिपीठ, सहारनपुर की मॉं शाकंभरी पीठ और सीतापुर के ललिता देवी शक्तिपीठ में भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि दर्शनार्थियों की सुविधा, सुरक्षा और आवागमन के लिए शासन-प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं।

विजयादशमी पर बुराइयों के दहन का संकल्प

मंगलवार को विजयादशमी है। योगी ने इसे अधर्म, असत्य और अन्याय पर धर्म, सत्य और न्याय की जीत का पर्व बताया। उनका कहना था कि रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाते समय नशे, भ्रष्टाचार, अराजकता, असुरक्षा और आतंकवाद जैसी बुराइयों को खत्म करने का संकल्प भी लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में अराजकता और आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है, और समाज की एकता तोड़कर राष्ट्र को कमजोर करने वाली ताकतों को बेनकाब करने का आह्वान किया।

रामलीला और पुतला दहन के आयोजनों की तैयारियॉं पूरी हैं। यातायात प्रबंधन और सुरक्षा के सभी मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहार उत्साह से मनाएँ, लेकिन अनुशासन और सुरक्षा को नजरअंदाज न करें। उन्होंने प्रदेशवासियों को महानवमी की बधाई दी, विजयादशमी की अग्रिम शुभकामनाएँ दीं और मॉं भगवती से सबके सुख-समृद्धि की कामना की।