लव जिहाद, महिला सुरक्षा और नारी सशक्तीकरण पर छिड़ी बहस के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्र के मौके पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता पर खुलकर अपनी बात रखी। ‘योगी की पाती’ में उन्होंने महिषासुर वध की कथा याद दिलाई और कहा कि नवरात्र केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं है। यह शक्ति, साहस और संकल्प का पर्व है, जो अन्याय के सामने डटकर खड़े होने की सीख देता है।
अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने माँ दुर्गा के अलग-अलग रूपों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि महिषासुर के अत्याचारों से जब तीनों लोक कराह उठे, तब देवताओं की साझा ऊर्जा से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई। उसी शक्ति ने महिषासुर का संहार कर धर्म और न्याय को फिर से स्थापित किया। इसे शक्ति और विजय की उपासना का पर्व बताते हुए योगी ने प्रदेशवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएँ दीं।
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों, महिषासुरमर्दिनी की विजय और शक्ति की आराधना के पावन पर्व शारदीय नवरात्र पर आप सभी को हृदय से मंगलकामनाएं। अहंकार, दुराग्रह, आसक्ति और बढ़ती नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विनम्रता, साहस, शक्ति, संकल्प, न्याय और धर्म की विजय का भाव ही मां के नौ स्वरूपों में निहित है। आज भी जब समाज ऐसी प्रवृत्तियों से संघर्ष करता है, तब नवरात्र हमें स्मरण कराता है कि सज्जनता तभी प्रभावी होती है, जब उसमें शक्ति और संकल्प का सामर्थ्य हो। उत्तर प्रदेश आज आस्था, संस्कृति और परंपरा के पुनर्जागरण का सशक्त केंद्र बन रहा है। इसी चेतना को सार्थक बनाने के लिए बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसर दिए जा रहे हैं। आइए, नवरात्र के इस पावन अवसर पर उपासना एवं उपवास के साथ एक संकल्प यह भी लें कि किसी बहन की सुरक्षा के लिए उसकी आवाज बनेंगे, किसी बालिका की शिक्षा में सहयोग करेंगे और किसी महिला के आत्मनिर्भर बनने की राह में उसका संबल बनेंगे।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 12, 2026
CM ने श्रीराम और माँ जगदंबा की कथा का किया वर्णन
अपनी पाती में CM ने श्रीराम और माँ जगदंबा की साधना के प्रसंग की भी चर्चा की। उन्होंने लिखा कि लंका पर विजय से पहले भगवान राम ने माँ जगदंबा की आराधना की थी। अनुष्ठान में 108 नीलकमल चढ़ाने थे, पर एक कमल कम पड़ गया। तब भगवान राम ने अपना नेत्र अर्पित करने का मन बना लिया। उसी क्षण माँ प्रकट हुईं और उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया।
मुख्यमंत्री ने माँ के इस रूप को ममता और वात्सल्य का प्रतीक बताया। उनके मुताबिक, माँ दुर्गा हमें बुराइयों के सामने साहस और दृढ़ संकल्प के साथ खड़े होने की प्रेरणा देती हैं। अहंकार, दुराचार, आसक्ति और दूसरी नकारात्मक प्रवृत्तियों से लड़ाई को भी पाती में इसी संदेश से जोड़ा गया है।
सीएम योगी का कहना है कि जब समाज इन प्रवृत्तियों से जूझता है, तब नवरात्र याद दिलाता है कि सजगता, शक्ति और संकल्प, तीनों साथ चलें। इसी भावना से समाज को सुरक्षित और सशक्त बनाया जा सकता है।
मिशन शक्ति से महिला PAC बटालियन तक
महिला सुरक्षा के लिए सरकार के उठाए कदमों की भी CM ने चर्चा की। उन्होंने लिखा कि 2020 के शारदीय नवरात्र में मिशन शक्ति अभियान शुरू हुआ था, इसका मकसद महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को जनभागीदारी के साथ जोड़ना था।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस में इस समय करीब 44000 महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं। साथ ही ऊदा देवी पासी, झलकारी बाई कोरी और रानी अवंतीबाई लोधी जैसी वीराँगनाओं के नाम पर तीन महिला PAC बटालियन बनाए जाने का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और स्वयं सहायता समूहों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बेटियों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। पाती के अनुसार, 10 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर एक करोड़ से अधिक महिलाएँ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
युवाओं से खास अपील
सीएम योगी ने युवाओं से कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, किसी महिला या बालिका को मदद चाहिए, तो आगे बढ़कर उसके साथ खड़े हों। चाहे किसी की पढ़ाई में हाथ बँटाना हो या उसे अपने पैरों पर खड़ा होने में सहारा देना हो, इसमें समाज की भागीदारी भी जरूरी है।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्र में शक्ति की उपासना तभी सार्थक होगी, जब महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिले, उन्हें सम्मान मिले और वे खुद के बल पर खड़ी हो सकें। मुख्यमंत्री ने इस सोच को विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प से जोड़ा और कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति जब सुरक्षित, सम्मानित और स्वावलंबी होगी, तभी विकास का लक्ष्य मजबूत होगा।

