इतिहास के पन्नों से गुम नाम: सीएम योगी बोले, 9 साल की सजा काटने वाले सेनानी को कालचक्र में भुला दिया गया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रयागराज के तेलियरगंज में स्वतंत्रता सेनानी महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में जेल सिर्फ पंडित जवाहरलाल नेहरू ही नहीं गए थे, बल्कि महाशय मसुरियादीन पासी जैसे अन्य सेनानी भी नौ साल तक जेल में रहे थे।

कार्यक्रम महाशय मसुरियादीन स्मारक इंटर कॉलेज और टीवी कॉलोनी चौराहे के पास आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

‘इतिहास के कालचक्र में भुला दिए गए सेनानी’

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि महाशय मसुरियादीन ने 1932 से 1944 के बीच कुल नौ साल जेल में बिताए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास के कालचक्र में ऐसे महान सेनानियों को सुनियोजित तरीके से भुला दिया गया। सीएम ने जोर देकर कहा कि विरासत और विकास के मार्ग पर चलने वाली डबल इंजन सरकार अपने महापुरुषों के योगदान को कभी नहीं भूल सकती।

उन्होंने कहा कि महापुरुषों का सम्मान किसी एक परिवार की बपौती नहीं है। वंचितों और दलितों के अधिकार के लिए संघर्ष करने वाले हर नायक को समाज में उचित सम्मान मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, “अतीत को सम्मान देंगे तो वर्तमान संवरेगा, और वर्तमान संवरेगा तो भविष्य भी उज्ज्वल होगा।”

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि मसुरियादीन का जन्म 2 अक्टूबर 1911 को हुआ था, यानी उसी दिन, जिस दिन महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पड़ती है। इसके बावजूद इतिहास में उनके योगदान को जगह नहीं मिली। अब भव्य प्रतिमा लगाकर सरकार ने उनकी यादों को फिर से जिंदा करने का काम किया है।

नेहरू के साथ ही पहुंचे थे संसद

मुख्यमंत्री ने बताया कि मसुरियादीन ने अपनी करीब 66-67 साल की जिंदगी में से नौ साल जेल में काटे। जेल के बाहर रहते हुए भी वे आजादी के आंदोलन के लिए लोगों को जागरूक करते रहे। जनता में उनकी इसी साख का नतीजा था कि 1946 में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने। आजाद भारत में 1952 से 1972 के बीच वे चार बार लोकसभा पहुंचे।

योगी ने उल्लेख किया कि 1952 में एक ही सीट से दो सांसद चुने जाते थे। उस चुनाव में पंडित जवाहरलाल नेहरू और मसुरियादीन पासी एक साथ जीतकर संसद पहुंचे थे।

जरायम पेशा कानून के खिलाफ लड़ाई

मुख्यमंत्री के अनुसार, 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों को चुनौती देने वाली कई जातियों को नीचा दिखाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1871 में ‘जरायम पेशा कानून’ बनाया था। पासी समाज समेत कई जातियां इसी श्रेणी में डाल दी गईं। 1952 में संसद पहुंचने के बाद मसुरियादीन ने इस काले कानून के खिलाफ आवाज उठाई।

बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मसुरियादीन पासी ने इसे खत्म कराने की लड़ाई लड़ी, जिसकी बदौलत पासी, सोनकर और दूसरे वंचित समाजों को सम्मान से जीने का मौका मिला। मुख्यमंत्री ने मसुरियादीन की बेटी कमला कुमारी और पोते सचिन कुमार को भरोसा दिलाया कि उनके सम्मान पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मसुरियादीन का सम्मान दरअसल भारत के सभी स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान है।

चौराहे और संस्था का नाम होगा मसुरियादीन के नाम पर

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बड़ी घोषणा भी की। उन्होंने महापौर से कहा कि जिस चौराहे पर प्रतिमा लगी है, उसका नाम महाशय मसुरियादीन पासी के नाम पर रखने का प्रस्ताव भेजें। इसके अलावा प्रयागराज की एक प्रमुख संस्था को भी उनका नाम दिया जाएगा। उस संस्था में उनकी भव्य प्रतिमा भी लगेगी, ताकि मौजूदा और आने वाली पीढ़ियॉं उनसे प्रेरणा ले सकें।

बिजली पासी, मक्का पासी और ऊदा देवी का भी जिक्र

पासी समाज के शौर्य को याद करते हुए सीएम योगी ने कहा कि महाराजा बिजली पासी ने 12वीं सदी में लखनऊ और आसपास के इलाकों में 12 गढ़ (किले) बनवाए थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने साल 2000 में उनकी प्रतिमा लगवाई थी, और अब डबल इंजन सरकार लखनऊ में उनके किले का जीर्णोद्धार करा रही है।

मुख्यमंत्री ने मक्का पासी और वीरॉंगना ऊदा देवी के बलिदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि मक्का पासी के बलिदान के बाद उनकी पत्नी ऊदा देवी ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला और लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं। लखनऊ में बनने वाली महिला पीएसी बटालियन का नाम वीरांगना ऊदा देवी पासी के नाम पर रखा जा रहा है और उनकी भव्य घुड़सवार प्रतिमा भी लगवाई जा रही है।

पोते बोले- कानून खत्म कराने में दादा की बड़ी भूमिका

कार्यक्रम में महाशय मसुरियादीन स्मारक समिति के मंत्री और उनके पोते सचिन कुमार ने कहा कि अंग्रेजी राज में दलित जातियों को जरायम पेशा घोषित कर प्रताड़ित किया गया था, और इस कानून को खत्म करने में उनके दादा की अहम भूमिका रही। उन्होंने वंचित वर्गों को सम्मान दिलाने के प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की।