Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयईरानी कमांडर के जनाजे में इकट्ठा हुए 10 लाख लोग: भगदड़ में 48 से...

ईरानी कमांडर के जनाजे में इकट्ठा हुए 10 लाख लोग: भगदड़ में 48 से ज्यादा घायल, 35 की मौत

जनाजे में शीराज से अपने कमांडर को अंतिम विदा देने के लिए केरमान आए लोगों में से एक ने मीडिया को बताया, "हम महान कमांडर को श्रद्धांजलि देने आए हैं।" वहीं, दूसरे ने कहा, "हज कासिम (सुलेमानी) से लोग ना सिर्फ केरमान या ईरान में मोहब्बत करते थे, बल्कि पूरी दुनिया में लोग उनसे मोहब्बत करते थे।"

अमेरिकी ड्रोन हमले में 3 जनवरी को मारे गए ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी के जनाजे में आज 10 लाख लोग जुटे। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान सुलेमानी के गृहराज्य केरमान में सुपुर्द-ए-खाक से पहले ही लोगों में भगदड़ मच गई। जिसके कारण वहाँ 35 लोगों की मौत हो गई। जबकि, 48 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इस खबर की पुष्टि समाचार एजेंसी एपी ने ईरानी टीवी के हवाले से की।

जानकारी के मुताबिक, एक ओर जहाँ रेवोल्यूशनरी गार्ड की विदेशी शाखा के कमांडर के गृह नगर में बहुत काफी बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने आए। वहीं, इतनी ही संख्या में तेहरान, कोम, मशहद और अहवाज में भी लोग सड़कों पर मौजूद थे। बड़ी संख्या में लोग आजादी चौक पर जमा हुए। जहाँ राष्ट्रीय झंडे में लिपटे दो ताबूत रखे गए। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि इनमें एक ताबूत सुलेमानी का और दूसरा ताबूत उनके करीबी सहयोगी ब्रिगेडियर जनरल हुसैन पुरजाफरी का है।

बता दें, जनाजे में शीराज से अपने कमांडर को अंतिम विदा देने के लिए केरमान आए लोगों में से एक ने मीडिया को बताया, “हम महान कमांडर को श्रद्धांजलि देने आए हैं।” वहीं, दूसरे ने कहा, “हज कासिम (सुलेमानी) से लोग ना सिर्फ केरमान या ईरान में मोहब्बत करते थे, बल्कि पूरी दुनिया में लोग उनसे मोहब्बत करते थे।”

गौरतलब है कि कमांडर के जनाजे में कई लाखों लोगों को इकट्ठा देख ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने कई ट्वीट किए। उन्होंने कहा, “क्या डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पूरी जिंदगी में इतनी भीड़ देखी है? क्या तुम अब भी क्षेत्र के बारे में जानकारी के लिए अपने जोकरों पर निर्भर रहोगे? क्या तुम्हें अभी भी लगता है कि तुम इस महान देश और इसके लोगों को तोड़ सकते हो। पश्चिमी एशिया से अमेरिका की शैतानी मौजूदगी का खात्मा शुरू हो गया है। 

बता दें जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या होने के बाद ईरान ने अमेरिका की सभी सेनाओं को आतंकी घोषित कर दिया है। इसके बाद अब ईरान अपने क्षेत्र के आसपास मौजूद अमेरिकी सेना पर कार्रवाई कर सकता है। ईरानी संसद के मुताबिक, अब पश्चिमी एशिया में इन सेनाओं की किसी भी तरह की मदद (खुफिया, तकनीकी, वित्तीय) को आतंक का सहयोग करार दिया जाएगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘काफ़िर’ अब समंदर पार नहीं है.. कैसे 11वीं सदी का क्रूसेड बना नए पेंटागन की विचारधारा? डोनाल्ड ट्रंप और अमरीकी कल्चर वॉर

1095 में पोप अर्बन द्वितीय ने यरूशलम के लिए जिस धर्मयुद्ध का ऐलान किया था, आज डोनाल्ड ट्रंप के नए अमेरिका के पीछे वही विचार काम कर रहा है। ट्रंप के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और उनकी किताब 'The War on Warriors' से समझिए कि कैसे 1000 साल पुराना 'Deus Vult' का सिद्धांत आज अमरीकी राजनीति और कल्चर वॉर को चला रहा है।

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।
- विज्ञापन -