Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षापूर्व IAS शाह फैसल पर और कसा शिकंजा, अब PSA के तहत मुकदमा दर्ज

पूर्व IAS शाह फैसल पर और कसा शिकंजा, अब PSA के तहत मुकदमा दर्ज

शाह फैसल से पहले राज्य के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, पीडीपी नेता और पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती, अली मोहम्मद सागर, सरताज मदनी, हिलाल लोन और नईम अख्तर पर भी पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

पूर्व IAS अधिकारी रहे शाह फैसल पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत कार्रवाई की है। सरकार द्वारा राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद 14 अगस्त को पुलिस ने शाह फैसल को दिल्ली के एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। इसके बाद फैसल को श्रीनगर के एमएलए हॉस्टल में रखा गया था।

पूर्व IAS शाह फैसल पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अब PSA लगाया है। इसके तहत शाह फैसल के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालाँकि अभी तक यह साफ़ नहीं हुआ है कि फैसल को कहाँ रखा जाएगा। बता दें कि IAS की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए शाह फैसल ने जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) का गठन किया, जिसके वह अध्यक्ष भी हैं।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद फैसल ने एक ट्वीट किया था, “राजनीतिक अधिकारों को फिर से पाने के लिए कश्मीर को लंबे, निरंतर और अहिंसक राजनीतिक आंदोलन की जरूरत है।” इसके अलावा शाह फैसल ने एक फेसबुक पोस्ट में केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए लिखा था, “घाटी में पुलिस की कार्रवाई से करीब 80 लाख लोग बंदी के समान रहने को मजबूर हो गए हैं।”

शाह फैसल से पहले राज्य के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, पीडीपी नेता और पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती, अली मोहम्मद सागर, सरताज मदनी, हिलाल लोन और नईम अख्तर पर भी पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। आपको बता दें कि पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर देने के बाद, वहाँ के हालातों को संभालने के लिए घाटी के तमाम दिग्गज नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया गया था।

आपको बता दें कि पब्लिक सेफ्टी एक्ट जम्मू कश्मीर का एक विशेष कानून है। इसे 1978 में फारूक अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला ने ही राज्य में लागू किया था। इस कानून के तहत किसी भी शख्स को अचानक से हिरासत में लिया जा सकता है। इतना ही नहीं इस कानून के प्रावधानों के मुताबिक राज्य सरकार किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ बिना केस चलाए उसे दो साल तक जेल में रख सकती है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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