Homeराजनीतिकर्नाटक परीक्षा में प्रश्न: किसानों का दोस्त कौन- कुमारस्वामी, केंचुआ या येदियुरप्पा?

कर्नाटक परीक्षा में प्रश्न: किसानों का दोस्त कौन- कुमारस्वामी, केंचुआ या येदियुरप्पा?

प्रधानाध्यापक राघवेंद्र ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया कि हमारा संस्थान शिक्षा की गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। हम न तो किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हैं और न ही किसी भी प्रकार के राजनैतिक प्रोपेगंडा में शामिल हैं।

कर्नाटक के एक स्कूल में बच्चों के सामने जब प्रश्नपत्र आया, तब वो हैरान रह गए। उसमे एक ऐसा सवाल पूछा गया था, जिसके विकल्प काफ़ी अजीब थे। प्रश्न पूछा गया था कि किसानों का दोस्त कौन है? विकल्प के रूप में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी, पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और केंचुआ शामिल था। राजनेताओं और केंचुओं के बीच इस तुलना को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर मज़ाक उड़ाया।

राजराजेश्वरी नगर के माउंट कार्नेल हाई स्कूल की आठवीं कक्षा के प्रश्न-पत्र में ये सवाल दिए गए। राजराजेश्वरी नगर दक्षिण-पश्चिम बेंगलुरु में मैसूर रोड पर स्थित है। प्रश्न-पत्र के वायरल होने के बाद इसकी आलोचना भी हुई। कई लोगों ने कहा कि निजी विद्यालयों को प्रश्न-पत्र तैयार करने की छूट देने के कारण ऐसा हो रहा है।

यही नहीं, एक सवाल प्रख्यात क्षेत्रीय लेखक मस्ती वेंकटेश आयंगर से प्यार करने वाली महिला के बारे में था। इस पर भी लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है। इसे आयंगर का अपमान माना जा रहा है। इसी तरह स्कूलों में ऐसे कई अजीब सवाल पूछे जाते हैं और वो वायरल हो जाते हैं।

कन्नड़ विषय की वार्षिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र में ये सवाल किए गए। ताज़ा सूचना के मुताबिक़, स्कूल ने प्रश्न-पत्र तैयार करने के लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति को पद से तुरंत हटा दिया है। प्रधानाध्यापक राघवेंद्र ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया:

“व्हाट्सएप पर मैंने (प्रश्न-पत्र) देखा तो मैं चौंक गया और शर्मिंदा हुआ। मुझे सोमवार देर रात एक दोस्त से यह मिला। मैंने तुरंत उस व्यक्ति को फोन किया और उस पर कार्रवाई की। उसे उसकी नौकरी से बरख़ास्त कर दिया गया है और प्रबंधन को इस बारे में सूचित कर दिया गया। बिना स्कूल के उच्चाधिकारियों को बताए हुए यह ग़लती हुई। हमारा संस्थान शिक्षा की गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। हम न तो किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हैं और न ही किसी भी प्रकार के राजनैतिक प्रोपेगंडा में शामिल हैं। हम ये सुनिश्चित करने में लगे हैं कि भविष्य में ऐसा न हो।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।

59 करोड़ अकाउंट्स, लाखों करोड़ की कैपिटल और आखिरी व्यक्ति तक पहुँचता बैंकिंग सिस्टम… फिर क्यों जनधन योजना से सुभाष गर्ग को लगी मिर्ची?

सुभाष गर्ग ने जनधन योजना के 59 करोड़ खातों पर सवाल उठाए, जानिए जीरो बैलेंस, इनएक्टिव अकाउंट्स और DBT से जुड़ी पूरी कहानी।
- विज्ञापन -