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दिल पर पत्थर रखो या पहाड़ आरफा बीबी, पर सच तो यही है कि मंदिरों पर गढ़ी गई हैं मस्जिदें, तुम्हारे पुरखे भी हैं ‘महादेव’

आरफा ने अपने ट्वीट में लिखा, "भारत के मुसलमानों से भारत की सुप्रीम कोर्ट का वादा था अयोध्या सिर्फ़ एक अपवाद होगा। मुसलमानों ने दिल पर पत्थर रखकर अपने देश के अमन-चैन के लिए एक मस्जिद को क़ुर्बान किया। अब संघी अदालतें ‘हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग’ ढूँढने को हरी झंडी दे रही हैं। सुप्रीम कोर्ट का वादा भी झूठा निकला?"

उत्तर प्रदेश के संभल में हिंसा मामले को इस्लामी पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी ने नया मोड़ देकर अपनी हिंदू घृणा एक बार फिर खुलकर दिखाई है। उन्होंने बड़ी चालाकी से अपने ट्वीट में मस्जिद में सर्वे करने गई टीम पर हमले की बात को छिपाते हुए सोशल मीडिया पर ये फैलाया है कि ये हिंसा इसलिए हुई क्योंकि ‘संघी’ अब हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग खोजने लगे हैं और अदालतें भी मस्जिदों का सर्वे कराने के लिए आदेश दे रही हैं।

अपने एक ट्वीट में आरफा खानुम शेरवानी ने अयोध्या इस्लामी कट्टरपंथियों को महान दिखाते हुए उनकी पत्थरबाजी और हिंसा को जायज दिखाने का प्रयास किया है। आरफा ने अपने ट्वीट में लिखा, “भारत के मुसलमानों से भारत की सुप्रीम कोर्ट का वादा था अयोध्या सिर्फ़ एक अपवाद होगा। मुसलमानों ने दिल पर पत्थर रखकर अपने देश के अमन-चैन के लिए एक मस्जिद को क़ुर्बान किया। अब संघी अदालतें ‘हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग’ ढूँढने को हरी झंडी दे रही हैं। सुप्रीम कोर्ट का वादा भी झूठा निकला?”

अपने अगले ट्वीट में आरफा खानुम शेरवानी ने पुलिस को विलेन के तौर पर पेश करते हुए ऐसे दिखाया कि पुलिस बेवजह मुस्लिमों पर बंदूक ताने हुए हैं और मुस्लिम नहीं बल्कि हिंदू जय श्रीराम कह कहकर हमला कर रहे हैं। आरफा ने लिखा, “‘चलाओ बे गोली चलाओ’ संघी जज एक घंटे के भीतर सैंकड़ों साल पुरानी मस्जिदों का ‘सर्वे’ करा ले रहे हैं। क़ानून की किताब नहीं जय श्रीराम के नारों के साथ ‘सर्वे टीम’ मस्जिद की ओर कूच कर रही है। संघी पुलिस गोली चला रही है। क्या यही है हिंसा और नाइंसाफ़ी की ज़मीन पर खड़ा विश्वगुरु?”

इस्लामी पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी के इन दोनों ट्वीटों का तथ्यों से कोई लेना-देना नहीं है, उनका मकसद सिर्फ और सिर्फ एक मजहबी भीड़ के उन्माद का बचाव करना है और अपनी कुंठा निकालना है। वो अपने ट्वीट में ये तो बता रही हैं कि पुलिस ने गोली चलाई, लेकिन ये नहीं बता रहीं कि कैसे भीड़ ने छतों से पत्थरबाजी की और पुलिस पर हमले किए।

देख सकते हैं कि एक तरफ वो ट्वीट में वो ये बता रही हैं मुस्लिमों ने अपनी मस्जिद कुर्बान की, जबकि हकीकत यह है कि अयोध्या रामजन्मभूमि को हिंदुओं ने 30 साल की कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद जीता, किसी मुस्लिम ने उस भूमि को देश में अमन-चैन की खातिर हिंदुओं को नहीं दिया। उस भूमि के लिए कारसेवकों ने अपना बलिदान दिया, अपना खून बहाया, तब जाकर उन्हें वापस उसी स्थान पर अपना मंदिर मिल पाया।

गौरतलब है कि संभल मामले में सिर्फ इस्लामी पत्रकार ही नहीं बल्कि इस्लामी नेता भी हिंसा का आरोप हिंदुओं पर मढ़ने से पीछे नहीं हट रहे हैं। पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ये कहा है कि अगर ये लोग हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग खोजेंगे तो देश और समाज में कोई शांति नहीं रह जाएगी। शायद ऐसे पत्रकार और नेताओं के मुताबिक हिंदुओं को आज के समय में अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करके भी अपने धर्म और धर्मस्थलों के लिए बात नहीं करनी चाहिए और न ही ये बताना चाहिए कि कैसे इस्लामी बर्बरता के चलते हजारों मंदिर ध्वस्त किए गए, उनके मलबे पर मस्जिद खड़े किए गए। इन्हें डर है कि अगर ऐसा होता रहा तो सिर्फ मस्जिदों की दीवारों से हिंदू मंदिर के प्रतीक ही नहीं निकलेंगे बल्कि ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की हकीकत भी सामने आ जाएगी।

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