Homeराजनीतिराहुल गाँधी को लद्दाख आना चाहिए था, हम भी उनके चुटकुलों पर हँस लेते:...

राहुल गाँधी को लद्दाख आना चाहिए था, हम भी उनके चुटकुलों पर हँस लेते: BJP सांसद नामग्याल

पिछले साल लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश घोषित होने के बाद वहाँ पहली बार यह चुनाव हो रहा है। कुल 94 उम्मीदवारों की हार जीत का फैसला 89776 मतदाता करेंगे। मतगणना 26 को होगी और उसी दिन परिणाम भी आ जाएँगे।

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भाजपा सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी पर निशाना साधा है। लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद के चुनाव को लेकर भाजपा सांसद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राहुल गाँधी को चुनाव प्रचार में जरूर आना चाहिए था। इससे लेह के लोगों को चुटकुले सुनकर हँसने का मौका मिल जाता।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार नामग्याल ने कहा, “मैं अनुरोध करता हूँ कि कॉन्ग्रेस को लद्दाख में राहुल गाँधी (चुनाव प्रचार के लिए) को लाना चाहिए था। हमारे लोग भी थोड़ा चुटकुले सुनते, हँसते-खिलखिलाते। नहीं ला पाए। अफसोस की बात है। उन्हें (कॉन्ग्रेस) सोनिया गाँधी को भी लेह भी लाना चाहिए था, हम सुनना चाहते थे कि मैडम जी के क्या विचार हैं?”

वह आगे कहते हैं, “हम भी उनके मुँह से सुनना चाहते हैं कि 70 वर्षों में लद्दाख को एक केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा न दिला पाने के बारे में उनके पास बोलने के लिए क्या बचा है।”

वह कहते हैं कि जब गुलाब नबी आजाद ने 8 जिले बनाए तब भी लद्दाख को एक भी जिला नहीं दिया। यूटी का दर्जा कैसे देते। कॉन्ग्रेस पार्टी के पास न लाने की क्षमता है, न वह लेकर आ सकते हैं और लाने का कोई फायदा है। भाजपा ने जनता को संदेश दिया कि वह लद्दाख के साथ हैं। यहाँ के लोगों के साथ हैं। अलग अलग मंत्रियों ने यहाँ आकर गाँव-गाँव जाकर केवल चुनाव प्रचार नहीं किया बल्कि गाँव के हालात देखे, लोगों की मानसिकता जानने की कोशिश की, इसलिए भाजपा यहाँ अपने नेताओं को ला पाई। वह यहाँ के हालातों को जानेंगे और उनकी बात भी रखेंगे।

पिछले साल लद्दाख को जम्मू कश्मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) घोषित होने के बाद वहाँ पहली बार यह चुनाव हो रहा है। उल्लेखनीय है कि लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद की 26 सीटों पर आज सुबह 8 बजे से मतदान शुरू हुए थे, जो शाम चार बजे तक चले। वहाँ कुल 94 उम्मीदवारों की हार जीत का फैसला 89776 मतदाता करेंगे। मतगणना 26 को होगी और उसी दिन परिणाम भी आ जाएँगे। 

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -