Homeदेश-समाजवाजे का सहयोगी रियाज काजी नंबर प्लेट की दुकान में प्रवेश करते कैमरे में...

वाजे का सहयोगी रियाज काजी नंबर प्लेट की दुकान में प्रवेश करते कैमरे में कैद, सबूत नष्ट करने का आरोप: रिपोर्ट्स

दुकान के मालिक को एजेंसी द्वारा पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। दुकान मालिक का बयान दर्ज किया गया है। एनआईए और एटीएस सूत्रों का हवाला देते हुए, रिपब्लिक ने कहा कि काजी को वर्तमान में सबूतों को नष्ट करने के आरोप में जाँच की जा रही है।

महाराष्ट्र राज्य को हिलाकर रख देने वाले सचिन वाजे मामले में ताजा घटनाक्रम में उनके करीबी एपीआई रियाज़ काज़ी को सीसीटीवी फुटेज में विक्रोली में नंबर प्लेट की दुकान में प्रवेश करते हुए पाया गया है। रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के अनुसार रियाज काजी ने नष्ट करने के इरादे से दुकान के मालिक से डीवीआर फुटेज माँगा। मालिक के साथ बातचीत के बाद उसे डीवीडी और एक कंप्यूटर ले जाते हुए देखा जा सकता है।

दुकान के मालिक को एजेंसी द्वारा पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। दुकान मालिक का बयान दर्ज किया गया है। एनआईए और एटीएस सूत्रों का हवाला देते हुए, रिपब्लिक ने कहा कि काजी को वर्तमान में सबूतों को नष्ट करने के आरोप में जाँच की जा रही है।

एनआईए और एटीएस दोनों द्वारा रियाज काजी को एंटीलिया बम कांड की जाँच और व्यापारी मनसुख हिरेन की हत्या में अपनी भूमिका जानने के लिए कई बार तलब किया गया है। विक्रोली की एक दुकान पर बनाई गई कई नंबर प्लेट एनआईए द्वारा जब्त की गई कारों से बरामद हुईं हैं। 

इससे पहले, रियाज काजी को ठाणे में सचिन वाजे के आवास परिसर से सीसीटीवी फुटेज एकत्र करते देखा गया था। सूत्रों के मुताबिक, दोनों एजेंसियों को कथित तौर पर रियाज काजी पर शक है कि सचिन वाजे को फर्जी नंबर प्लेट खरीदने और अहम सबूत नष्ट करने में मदद मिली है।

कई सबूत नष्ट किए गए

मनसुख हिरेन की मौत के मामले में मुख्य आरोपित सचिन वाजे ने कथित तौर पर एनआईए के सामने स्वीकार किया है कि उसने पाँच मोबाइल फोन नष्ट कर दिए। अधिकारियों को संदेह है कि वाजे कम से कम 13 मोबाइल फोन का उपयोग कर रहा था।

सचिन वाजे से बरामद बेहिसाब गोलियाँ

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने एक विशेष अदालत को सूचित किया था कि उसने पूर्व सहायक पुलिस निरीक्षक (API) सचिन वाजे के घर से 62 बेहिसाब गोलियाँ बरामद की थी। रिपोर्टों के अनुसार, एनआईए को 30 में से केवल 5 गोलियाँ ऐसी मिलीं जो आधिकारिक तौर पर उसकी सर्विस पिस्टल के लिए आवंटित की गई थीं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -