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हमले से पहले रेकी, पुलिस को उलझाया, बैरिकेड लगा रास्ता रोका: जोधपुर में दंगाइयों ने की थी तगड़ी प्लानिंग, तेजाब-सरिया-तलवार सब पहले से थे जमा

जोधपुर पुलिस ने इस बात को स्वीकार किया है कि अगर खुफिया रिपोर्टों का समय पर आकलन ठीक से किया जाता तो हिंसा को शुरुआती चरण में ही दबाया जा सकता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके इंटेलीजेंस इनपुट्स जारी किए गए थे कि अक्षय तृतीया के हिंदू त्योहार पर हिंसा हो सकती है।

करौली (Karoli) के बाद राजस्थान के जोधपुर (Jodhpur, Rajasthan) अक्षय तृतीया (3 मई) के मौके पर हुई हिंसा एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। सामान्य रूप से घरों में नहीं मिलने वाली तेजाब की बोतलें भी अक्षय तृतीया के दिन दंगा करने वालों के हाथों में दिखी थीं। इस दौरान सैकड़ों मुस्लिमों की उन्मादी भीड़ ने लोगों के घरों पर तेजाब की बोतलों से हमले किए थे।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, जोधपुर के जिन पाँच इलाकों में दंगाइयों ने उत्पात मचाया था, जब वहाँ लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया तो पता चला कि ये सब पहले से योजनाबद्ध था। सोनारो का बास मोहल्ले में एक घर के बाहर लगे सीसीटीवी से ये पता चलता है कि पहले दंगाइयों ने मोहल्ले में आकर वहाँ के हालात की रेकी की थी। उसके बाद दंगाइयों की भीड़ ने तलवार, सरिया, लाठी और तेजाब की बोतलें लेकर वहाँ आए और हमला किया। इस दौरान लोगों के घरों पर पथराव और तेजाब फेंका।

सोनारो का बास के रहने वाले स्थानीय नागरिक सूरज प्रकाश कहते हैं कि दंगाई पहले से ही सोनारो का बास में इकट्ठे थे। इन सभी ने पहले से ही तेजाब की बोतलें इकट्ठा कर रखी थी। उन्मादी भीड़ ने मजहबी नारेबाजी करते हुए निहत्थे लोगों पर हमले कर दिए। ईदगाह मस्जिद के पास लगे सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि दंगाइयों ने पहले बचने के लिए पुलिस बैरिकेड्स लगाकर रास्ता रोका और फिर गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इसके बाद वे गलियों में लापता हो गए।

पुलिस ने निपटने को पहले से थी प्लानिंग

दंगाइयों ने पुलिस को उलझाए रखने की बहुत ही सुनियोजित तरीका अपना रखा था। जालौरी गेट पर दंगाई हंगामा करने लगे। इस दौरान पुलिस के करीब 200 जवानों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उनसे भीड़ गए। पुलिस इन्हीं लोगों में उलझ गई और दंगाइयों शहर के भीतरी इलाकों में जाकर आतंक मचाने लगे। कबूतरों चौक, सोनारो का ईदगाह मस्जिद समेत अन्य स्थानों पर जमकर हिंसा की गई।

इसी तरह से घंटाघर पाल हाउस के पास के रहने वाले लोकेश दंगा वाले दिन अपने भाई के साथ पिता के लिए दवा लाने के लिए जालौरी गेट गए थे, लेकिन उनके भाई की पीठ में छुरा घोंप दिया गया। इसमें वो घायल हो गए उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

पुलिस ने इंटेलीजेंस इनपुट को दरकिनार किया

जोधपुर पुलिस ने इस बात को स्वीकार किया है कि अगर खुफिया रिपोर्टों का समय पर आकलन ठीक से किया जाता तो हिंसा को शुरुआती चरण में ही दबाया जा सकता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके इंटेलीजेंस इनपुट्स जारी किए गए थे कि अक्षय तृतीया के हिंदू त्योहार पर हिंसा हो सकती है। हालाँकि, इस मामले में जोधपुर पुलिस ने कोई भी ठोस कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। इसी कारण से इतना बड़ा दंगा हुआ।

गौरतलब है कि 2 मई को देर रात मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी बिस्सा जी की प्रतिमा पर इस्लामी झंडे लगा रहे थे। इसी को लेकर ये विवाद हुआ।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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