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जो महिला बन सकतीं हैं देश की पहली ST राष्ट्रपति, जानिए कैसा है उनका गाँव: पूरी तरह डिजिटल है ऊपरबेड़ा, ग्रामीण बोले- यह द्रौपदी मुर्मू की देन

"मेरा गाँव तो डिजिटल है। यहाँ सबका बैंक में खाता है। खेती-बारी के लिए कर्ज घर बैठे ही मिल जाता है। हम लोगों के घर में पानी की पाइपलाइन और शौचालय भी हैं। गरीबों के लिए पीएम आवास है। यह सब द्रौपदी की ही देन है।"

ओडिशा के मयूरभंज जिले में है रायरंगपुर। रायरंगपुर से करीब 25 किमी की दूरी पर है ऊपरबेड़ा। ऊपरबेड़ा उन द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) का गाँव हैं जो एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हैं। इस पद के लिए उनका निर्वाचित होना करीब-करीब तय है। ऐसा हुआ तो वे इस पद पर पहुँचने वाली दूसरी महिला और अनुसूचित जनजाति वर्ग (ST) से आने वाली पहली शख्सियत होंगी।

दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण ने इस गाँव की स्थिति पर रिपोर्ट की है। इसके अनुसार इस गाँव में 300 घर हैं। करीब 6000 की आबादी है। गाँव पूरी तरह डिजिटल है। ग्रामीणों के अनुसार यह विकास द्रौपदी मुर्मू की ही देन है।

द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद से इस गाँव में खुशी का माहौल है। ग्रामीण खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। कुछ लोग अपने गाँव की बेटी को अभी से राष्ट्रपति मान चुके हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, इन दिनों गाँव का बच्चा-बच्चा अलग ही रंग में दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों के लिए यह पल किसी उत्सव से कम नहीं है। मेले जैसा नजारा है। हर चौक-चौराहे पर केवल यही चर्चा हो रही है कि अपने घर की बेटी देश की राष्ट्रपति बनेगी।

स्थानीय लोग द्रोपद्री मुर्मू से बहुत प्यार करते हैं। इसकी वजह द्रौपदी मुर्मू का हर विषम परिस्थितियों में उनके साथ खड़ा होना है। वह अपने गाँव वालों को अपना परिवार समझती हैं। अपने पति और बेटों की मौत के बाद उन्होंने कभी भी खुद को अकेला नहीं समझा। एक महिला जिसके पति और बेटे इस दुनिया में ना रहे तो वह खुद को कमजोर समझने लगती है, लेकिन उन्होंने (मुर्मू) इसे अपनी कमजोरी की जगह ता​​कत बनाया और अपने ससुराल की जमीन शिक्षण संस्थान के नाम दान कर दी। मौजूदा वक्त में इस जमीन पर छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल के साथ-साथ एसएलएस स्कूल के नाम पर शिक्षण संस्थान संचालित हो रहा है, जिसमें करीब 70 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने यहाँ अपने पति और बच्चों की याद में प्रतिमा भी स्थापित कराई है।

रेवती नंदी कहती हैं, “वह मुझे मौसी बुलाती है। अपने घर की बेटी है। जब भी आती है, हम लोगों से मिले बिना नहीं जाती। घर में बैठकर खाना भी खाती है। काफी विनम्र स्वभाव की है हमारी द्रौपदी।” 50 साल की सारोमनि कहती हैं, “मेरा गाँव तो डिजिटल है। यहाँ सबका बैंक में खाता है। खेती-बारी के लिए कर्ज घर बैठे ही मिल जाता है। हम लोगों के घर में पानी की पाइपलाइन और शौचालय भी हैं। गरीबों के लिए पीएम आवास है। यह सब द्रौपदी की ही देन है।”

वहीं सत्यजीत गिरि बताते हैं, “वर्ष 2000 के आसपास हमारे गाँव आने में काफी परेशानी होती थी। द्रौपदी मुर्मू ने 2003 में पुल बनवा दिया। अब गाँव से बाहर जाने में कोई परेशानी नहीं होती है।”

बता दें कि द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पहली महिला राज्यपाल रही हैं। उनका जन्म ओडिशा के आदिवासी जिले मयूरभंज के बैदापोसी गाँव में हुआ था। 1997 में वह रायरंगपुर से बतौर पार्षद जीतीं। इसके बाद उन्हें भारतीय जनता पार्टी की आदिवासी मोर्चा का उपाध्यक्ष बनाया गया। साल 2000 और 2009 में वह रायरंगपुर से विधायक भी चुनी गईं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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