Homeदेश-समाजअतीक अहमद की बीवी पर ₹25 हजार का इनाम, उमेश पाल के मर्डर के...

अतीक अहमद की बीवी पर ₹25 हजार का इनाम, उमेश पाल के मर्डर के बाद से है फरार: हत्याकांड की फंडिंग करने वाला लखनऊ का बिल्डर निकला

उमेश पाल की हत्या के तुरंत बाद मीडिया के सामने आकर अपने बेटे और शौहर की बेगुनाही का रोना रोने वाली शाइस्ता अब खुद इस केस में आरोपित है। उसे हत्या में शामिल लोगों के साथ देखा गया। अब उस पर 25 हजार रुपए का इनाम रखा गया है।

उमेश पाल की हत्या के तुरंत बाद अतीक की बीवी शाइस्ता मीडिया के सामने आईं थीं। तब उन्होंने अपने बेटों के गायब होने और अपने शौहर की बेगुनाही संबंधी बयान दिए थे। बाद में शाइस्ता के खिलाफ पुलिस को और सबूत मिलने लगे तो वो अंडरग्राउंड हो गईं। शूटर साबिर के साथ भी अतीक की बीवी हत्या से 5 दिनों पहले देखीं गईं थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब उनकी तलाश करती पुलिस ने शाइस्ता के बारे में कोई भी सटीक जानकारी देने वाले को 25 हजार का इनाम देने का ऐलान किया है। सूचना देने वाले की पहचान भी गुप्त रखी जाएगी।

ED ने तेज की जाँच

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक अतीक अहमद की काली कमाई की जाँच कर रही ED ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय अब तक अतीक की लगभग 8 करोड़ रुपए की सम्पत्ति जब्त कर चुका है। 2 साल पहले ही ED ने अतीक अहमद पर धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था। ED के अलावा उत्तर प्रदेश प्रशासन माफिया की 1163 करोड़ रुपए मूल्य की अलग-अलग संपत्तियों पर कार्रवाई कर चुका है।

लखनऊ के बिल्डर ने किया था फाइनेंस

एक रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ के एक बिल्डर ने उमेश पाल हत्याकांड की फंडिंग की थी। केस में फरार चल रहे मुख्य आरोपित असद द्वारा हत्या के 15 दिन पहले 1 करोड़ 20 लाख रुपए लाए जाने का भी दावा किया जा रहा है। पैसे आने के बाद सदाकत खान की मौजूदगी में मुस्लिम हॉस्टल में पूरी प्लानिंग की गई। बताया गया है कि उमेश पाल के कत्ल से पहले यही रकम सभी शूटरों में बाँटी गई थी। हालाँकि बिल्डर की पहचान अभी सार्वजानिक नहीं की गई है।

पुलिस टीम गुजरात रवाना

जानकारी के मुताबिक उमेश पाल हत्याकांड में नामजद आरोपित अतीक अहमद से पूछताछ करने के लिए UP पुलिस टीम गुजरात की साबरमती जेल रवाना हो गई थी। इस टीम में प्रयागराज पुलिस के अलावा स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) के सदस्य भी शामिल हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

क्या भारत की राजनीति पहली बार पूरी तरह ‘हिन्दू-केंद्रित’ हो गई है?

क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?

कुएँ में कूदने की जगह नहीं बची तो रोने लगीं हिंदू महिलाएँ: जानिए- 1947 में रावलपिंडी के तोहा खालसा में 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने...

जानिए 1947 के रावलपिंडी दंगों में तोहा खालसा की 93 हिंदू महिलाओं के कुएँ में एक साथ कूदकर जान देने की दर्दनाक कहानी।
- विज्ञापन -