Homeदेश-समाजहोटल के लिफ्ट में बलात्कार के आरोपित तरुण तेजपाल की मुश्किलें बढ़ीं, 7 अक्टूबर...

होटल के लिफ्ट में बलात्कार के आरोपित तरुण तेजपाल की मुश्किलें बढ़ीं, 7 अक्टूबर से सुनवाई

गोवा पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उसे तरुण तेजपाल के कुछ व्हाट्सएप्प मैसेज और इमेल्स मिले हैं, जिसके आधार पर उन्हें इस मामले में ट्रायल का सामना करना पड़ेगा।

यौन शोषण के आरोपित पत्रकार तरुण तेजपाल मामले में कोर्ट ने सुनवाई के लिए तारीख दे दी है। ख़बर के अनुसार, 7 अक्टूबर से उनके ख़िलाफ़ ट्रायल शुरू किया जाएगा। तरुण तेजपाल पर उनकी ही एक सहयोगी ने यौन शोषण का आरोप दर्ज कराया था। तहलका के संस्थापक संपादक रहे तेजपाल फ़िलहाल जमानत पर बाहर रहे हैं। गोवा डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशन जज क्षमा जोशी ने सुनवाई के लिए अगली तारीख 7 अक्टूबर को मुक़र्रर की है। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट बेंच ने ट्रायल कोर्ट को 6 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने को कहा था।

तरुण तेजपाल ने कोर्ट से दरख्वास्त करते हुए कहा कि अगली तारीख नवंबर में दी जाए, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। 2013 के इस मामले के आरोपित तरुण तेजपाल ने कहा है कि ‘सच्चाई बाहर आएगी।’ तेजपाल ने इस बात की पुष्टि की कि अगले 6 महीने में सुनवाई पूरी हो जाएगी। इसी वर्ष अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ लगे आरोपों को खारिज करने से इनकार कर दिया था। गोवा पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उसे तरुण तेजपाल के कुछ व्हाट्सएप्प मैसेज और इमेल्स मिले हैं, जिसके आधार पर उन्हें इस मामले में ट्रायल का सामना करना पड़ेगा।

पुलिस ने तरुण तेजपाल की उस याचिका का विरोध किया था, जिसमें उन्होंने ख़ुद पर लगे आरोपों को ख़ारिज करने की माँग की थी। गोवा पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि तेजपाल के ख़िलाफ़ ट्रायल चलाने के लिए उसके पास पर्याप्त सबूत हैं। तरुण तेजपाल पर आरोप है कि उन्होंने लिफ्ट में अपनी सहयोगी का बलात्कार किया। उन पर बलात्कार, यौन शोषण और दुर्व्यवहार के मामले दर्ज किए गए थे। पीड़िता के मुताबिक़, तेजपाल ने ‘तहलका’ के वार्षिक कार्यक्रम ‘थिंक फेस्ट’ के दौरान उसका बलात्कार किया।

हालाँकि, तरुण तेजपाल के वकील विकास सिंह ने कहा है कि वरिष्ठ पत्रकार पर लगाए गए आरोप मनगढंत हैं और उनकी छवि को ख़राब करने के लिए लगाए गए हैं। तेजपाल की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज होने के बाद उन्हें नवंबर 2013 में क्राइम ब्रांच ने गिरफ़्तार किया था। मई 2014 के बाद से वह जमानत पर बाहर हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

मिशन समुद्र मंथन से अंडमान में मिला गैस का महाभंडार, मोदी सरकार ने पूर्वी तट पर बनाया ₹1.5 लाख करोड़ का मेगा प्लान: समझें...

अंडमान द्वीप समूह के पास 355 मीटर पानी की गहराई में खोदे गए कुएँ श्री विजयपुरम-3 में प्राकृतिक गैस की उपस्थिति मिली है, ये बड़ी सफलता है।

कॉकरोच जनता पार्टी: ‘क्रांति’ की रील और लोकतंत्र की रियलिटी

कॉकरोच जनता पार्टी, जेपी-अन्ना हजारे आंदोलन और भारतीय लोकतंत्र के संदर्भ में समझिए कि केवल असंतोष ही पर्याप्त क्यों नहीं होता। भारतीय मतदाता क्या देखते हैं?
- विज्ञापन -