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अजीत झा

संपादक, ऑपइंडिया (हिंदी)

जब हुआ मंदिरों का ध्वंस, तब किस दोजख में था सौहार्द? – यह ‘हिंदू’ बनने का वक्त, ‘सेकुलर’ नौटंकी से बचो

क्या UP और केंद्र में BJP की सरकार न होती, तब भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह सब इतना ही आसान होता? 'अच्छा हिंदू' कहेगा कि क्यों नहीं?

भए प्रगट कृपाला: 70 साल पहले आधी रात हुई अलौकिक रोशनी, भाइयों संग प्रकट हुए रामलला

सुबह चार बजे के आसपास रामजन्मभूमि स्थान में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा हो गई। खबर आई कि भगवान प्रकट हो गए हैं। तड़के साढ़े चार बजे घंटे-घड़ियाल बजने लगे, साधु शंखनाद करने लगे और लोग जोर-जोर से गाने लगे, भए प्रगट कृपाला...

एक थे नेहरू, एक हैं मोदी: वे राम को अयोध्या से बेदखल करना चाहते थे, ये भव्य मंदिर की शिला रखेंगे

आजाद भारत में भी राम के खिलाफ साजिशें बंद नहीं हुईं। इसके अगुवा खुद नेहरू थे। लंबे संघर्ष के बाद 5 अगस्त का वो दिन आ रहा है जब पीएम मोदी खुद मंदिर की शिला स्थापित करेंगे।

कामराज प्लान: कॉन्ग्रेस के लिए दवा या फिर पायलट-सिंधिया जैसों को ठिकाने लगाने का फॉर्मूला?

कामराज प्लान। क्या यह राजनीतिक दल को मजबूत करने वाली संजीवनी बूटी है? या फिर कॉन्ग्रेस को परिवार की बपौती बनाने वाली खुराक?

माना, ठाकुर के हाथ नजर नहीं आते, पर ये हाथ न होता तो जय-वीरू आजाद न होते

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस जब सरकार बनाई थी, तब से ही सिंधिया, पायलट और सिंहदेव को लेकर कयास लगने शुरू हो गए थे।

कॉन्ग्रेस गोत्र-मूल के ‘विकास दुबे’: कहानी रघुवर, सुशील और मनु की, शिकार बनीं बॉबी, नैना और जेसिका

विकास दुबे के एनकाउंटर पर राजनीति करने वाली कॉन्ग्रेस और उसके शीर्ष नेतृत्व को खुद से पूछना चाहिए- अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या?

प्रिय राजदीप, पप्पू का नाम सुना है, वो नेपाल भाग गया था, जानते हो उसके साथ क्या हुआ?

विकास दुबे पर कॉन्स्पिरेसी थ्योरी के सरताजों को पप्पू देव के बारे में जानना चाहिए, क्योंकि उनके सूत्र भी उनकी तरह का ही चश्मा पहनते हैं।

भारत यात्रा का नायक, सियासत का चिर युवा चंद्रशेखर; जिनके लिए PM मोदी को कहना पड़ा- हम चूक गए

हवा के विरोध में खड़े होने की सियासत का नाम है चंद्रशेखर। जिन्हें खुद के होने का गुमान हो, उनके सामने तनकर खड़े होने का नाम है चंद्रशेखर।