Friday, May 14, 2021
33 कुल लेख

चंदन कुमार

परफेक्शन को कैसे इम्प्रूव करें 🙂

…जो कुर्सी के लालच में अंधा होकर PM के बाद CM बना (जी हाँ, भारत का ही नेता था वो)

कहानी की शुरुआत होती है जनक सिंह से, जो आर्मी अफसर थे। 15 अगस्त 1947 - देश तब आजाद हुआ था। कहानी के दूसरे पात्र हैं - मेहर चंद महाजन। यह वकील थे, फिर जज बने। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे। कहानी के तीसरे पात्र वो हैं, जिन पर शीर्षक लिखा गया है।

इलेक्शन है तो मंदिर भी जाना पड़ता है – 582 दिनों का सच अब आया सामने

जामा मस्जिद के शाही इमाम द्वारा किसी खास पार्टी के समर्थन की घोषणा करने से लेकर जनेऊ और शिव-भक्त बनते हुए भारतीय राजनीति ने लंबा सफर तय कर लिया है। इस सफर में मजार पर चढ़ते चादर से लेकर गंगा आरती तक के स्टेशन आए। लेकिन अब जो आया है, वो 'रंगीला' है, 'खूबसूरत' है।

ASAT तकनीक 2012 से ही थी भारत में, कॉन्ग्रेस के लचर नेतृत्व के कारण फाँक रही थी धूल

2012 में DRDO के प्रमुख वीके सारस्वत थे। एक दिन उन्होंने देश को चौंका दिया, यह घोषणा करके कि भारत के पास Low Earth Orbit और Polar Orbit में परिक्रमा करने वाले सैटेलाइट को निष्क्रिय करने लायक ऐंटी सैटलाइट वेपन की सारी तकनीक और उसे बनाने के लिए सारे कल-पूर्जे मौजूद हैं।

एंटी-बिहारी-यूपी भाषण देकर आपने तालियाँ बटोरी लेकिन यह कॉन्ग्रेस की कब्र खोद डालेगी राहुल G

राहुल गाँधी की दादी से लेकर पिताजी तक के राजनीतिक दंभ को बिहार और यूपी ने ही चकनाचूर किया है। लेकिन विदेशी पढ़ाई के कारण शायद राहुल को इन ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी नहीं होगी। सामाजिक समस्याओं का राजनीतिकरण शाह बानो की तरह कहीं कॉन्ग्रेस की कब्र न खोद दे इस बार!

#Ramzan और लोकसभा चुनाव में क्या है कनेक्शन? फेसबुक और ट्विटर पर क्यों मचा हुआ है घमासान?

रमजान पर राजनीति हो रही है। चुनाव आयोग को घेरा जा रहा है। बीजेपी को फायदा दिलाने का आरोप आयोग पर लगाया जा चुका है। आम आदमी पार्टी से लेकर टीएमसी तक बिना वजह रमजान पर राजनीति कर रहे हैं। जो इस पर राजनीति कर रहे हैं उनका (कु)तर्क यह है कि...

राजीव कंधे पर लाए थे कम्प्यूटर, सोनिया ने अभिनंदन को बिठाया था कॉकपिट में

याद रखिए, इस देश में जो भी हुआ वो कॉन्ग्रेस ने ही किया है। वरना आज भी सिर्फ पत्थर ही पत्थर होता। हम पत्थर खाते और पत्थर ही... समझने और कॉन्ग्रेस के आगे सिर झुकाने के बजाय अंड-बंड बोलना बंद कीजिए।

‘बहनोई’ आतंकवादी के लिए BBC हिंदी का उमड़ा प्यार, पत्रकारिता को किया तौबा-तौबा!

पत्रकार रहीमुल्ला ने ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, यह कुछ हद तक समझा जा सकता है लेकिन आप दिल्ली में बैठ कर इसे काट-छांट सकते थे। लेकिन नहीं। 'बहनोई' की इज्जत में लिखे गए शब्दों पर संपादकीय कैंची कैसे?

बाप का, बेटा का… सबका बूथ लूटेगा! कॉन्ग्रेस की ‘आज़ाद’ पॉलिटिक्स का ख़ुलासा

जहाँ की जनता ने पिछली बार उन्हें BJP सांसद के रूप में लोकसभा भेजा था, वहीं की जनता के सामने उन्होंने कॉन्ग्रेसी गुलामी कुबूल करते हुए स्वीकारा कि उनके पिताजी और खुद उनके लिए भी कॉन्ग्रेस के लोगों ने बूथ कब्जा किया था।

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