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जयन्ती मिश्रा

न शादी की चिंता न शिक्षा की… राष्ट्रीय बालिका दिवस पर जानें मोदी सरकार की वो योजनाएँ जिनसे बेटियों को मिला मान

लड़कियों की भूमिका हर क्षेत्र में सराही जा रही है। लेकिन कई जगह अब भी ऐसा है जहाँ उनका करियर बनना तो दूर उनका जन्म लेना भी बड़ी बात है।

अभी तो अनुष्ठान शुरू हुआ है आरफा और तुम लगी छटपटाने

आरफा खानम शेरवानी जैसों को यह सनद रहे कि अभी उन सैकड़ों देवभूमि की मुक्ति शेष है, जहाँ इस्लामी बर्बरता के निशान आज भी मौजूद हैं।

बीच में छूट गई पढ़ाई या कोर्स नहीं हुआ पूरा… अब चिंता नहीं: जानें मोदी सरकार की ABC योजना, 3 करोड़ छात्र कर चुके...

पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण आपकी पढ़ाई छूटी हो या फिर जल्दी शादी करा देने की वजह से आप शिक्षा पूरा न कर पाएँ हों... अब चिंता करने की जरूरत नहीं है...।

जिन अफगान शरणार्थियों को मुल्क से निकाल रही Pak सरकार, उनके साथ लूटपाट में जुटे पाकिस्तानी: ‘उम्माह’ के पैरोकारों ने 13 बच्चों वाले हबीबुल्ला...

पाकिस्तान ने तालिबान से खतरा दिखाते हुए अफगानिस्तान शरणार्थियों को मुल्क से निकालने का बंदोबस्त किया है और पाकिस्तानी उन्हें प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

बच्चे देखते रहे डूब गई माँ, कोई बेटी की बाइक स्टंटबाजी पर निहाल: REELS और लाइक्स के लिए न खतरों की परवाह, न मंदिरों...

सोशल मीडिया की हुड़क ऐसी है कि लोग अपने शौक पूरा करने के लिए और दिखावे से भरी नकली जिंदगी जीने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।

‘बेटी पढ़ाओ, पर बीवी नहीं’: ज्योति मौर्या नहीं तय करेगी ‘हीरा ठाकुर’ का भविष्य, वे अपने अलोक से समाज में हमेशा फैलाते रहेंगे ज्योति

एक कहानी है हीरा ठाकुर की। एक अलोक मौर्या की। हीरा जब पत्नी को आईएएस बनने में मदद करता है तो उसे श्रेय मिलता है। वहीं आलोक को धोखा मिलता है।

चद्दर में चुम्मा-चाटी से कैमरे पर लिपलाॅक तक पहुँच गया बिग बॉस: मनोरंजन के नाम पर भोंडापन, संस्कृति पर सुनियोजित हमला

एक ऐसी भी क्लिप सामने आई है कि जिसमें जैद हदीद आकांक्षा को जबरदस्ती पकड़कर खींच रहे हैं। इस पर आकांक्षा थोड़ा उनसे दूर होकर कहती भी हैं कि उन्हें ये सब नहीं पसंद इसलिए ऐसे न छुआ जाए। लेकिन जैद हदीद पर खासा फर्क नहीं दिखता।

होली-दीवाली पर ‘ज्ञान’ देने वाले आज कह रहे ‘बकरा हमारा’, बकरीद पर निरीह पशुओं को काटने वाले ‘मोहब्बत की दुकान’ कर रहे आबाद: पत्रकार...

कुर्बानी का अर्थ केक कटिंग नहीं है। उसमें बाकायदा एक जीव का गला रेतकर उसकी खाल को नोचा जाता है। माँस के धारदार चाकू से टुकड़े होते हैं।