Sunday, September 20, 2020
3 कुल लेख

नवीन नौटियाल

घुमक्कड़ी जिज्ञासा...

कितना खोखला है अवसाद से घिरे व्यक्ति को कहना- प्लीज रीच आउट टू मी

क्या हम अवसाद में घिरे इन्सान से 'प्लीज़ रीच आउट टू मी' की औपचारिकता निभाकर एक बड़ी समस्या को नजरअंदाज तो नहीं कर देते?

जगमगाती दिल्ली: फ्री पॉलिटिक्स के लिए टिहरी जैसी सभ्यताओं का डूबना जरूरी क्यों?

क्या दिल्ली में मुफ्त की बिजली पाने वाले उस दर्द को महसूस कर सकते हैं, जो अपने खेत-खलिहान को आँखों के सामने डूबते देखने में होता है? वह दर्द जो अपने बाप-दादाओं के पुश्तैनी घर और अपने आम के बगीचों को डूबते देखने में होता है?

आखिर इतने कश्मीरी देहरादून पहुँचे कैसे? जानिए क्या है सच

कौन जानता है कि IMA जैसे संस्थानों पर भी ये शांतिदूत नजरें रखे हुए हों और आर्मी की गतिविधियों की सूचना कहीं भेजते हों? देहरादून में ही DRDO और आयुध निर्माण फ़ैक्ट्री भी हैं, जिन्हें बेहद संवेदनशील माना जाता है।

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