Friday, October 2, 2020
120 कुल लेख

रवि अग्रहरि

अपने बारे में का बताएँ गुरु, बस बनारसी हूँ, इसी में महादेव की कृपा है! बाकी राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी नामचीन परम्परा का विशेषज्ञ नहीं हूँ!

ग्राउंड रिपोर्ट: नहीं बजा सकते हनुमान चालीसा, घर बेचने/छोड़ने पर मजबूर, मुस्लिम देते हैं धमकी

"...रहना तो हमें ही है। छोड़ कर जाना होगा। 'मकान बिकाऊ है' वाला पोस्टर देख कर वे कहते हुए निकल जाते हैं कि यह मकान तो वही खरीदेंगे।"

‘खड़े-खड़े रेप कर दूँगा, फाड़ कर चार कर दूँगा’ – ‘देवांशी’ को समीर अहमद की धमकी, दिल्ली दंगों वाला इलाका

"अपने कुत्ते को यहाँ पेशाब मत करवाना नहीं तो मैं तुझे फाड़ कर चार कर दूँगा, तेरा यहीं खड़े-खड़े रेप कर दूँगा।" - समीर ने 'देवांशी' को यही कहा था।

मुस्लिम असलम का अपराध हिन्दुओं के नाम: आजतक समेत मेन्स्ट्रीम मीडिया ने नाम छुपाया, गलत शब्द लिखे

बहुत ही बारीकी से कभी प्रतीकात्मक तस्वीर के नाम पर तो कभी सीधे खुल्ले में खेलते हैं कि कौन सी जनता जा रही है तहकीकात करने? अगर बाद में पता भी चला तो क्या हो जाएगा? क्योंकि आजतक कभी इन्हें अपनी इन हरकतों पर कोई बड़ा आउटरेज नहीं झेलना पड़ा।

लव जिहाद में मारी गई एकता: भाभी रेशमा ने किया था नंगा, शाकिब और अब्बू सहित परिवार ने किए थे शरीर के टुकड़े

पीड़िता की माँ सीमा शाकिब का साथ देने वाली उसकी दोनों भाभियों रेशमा और इस्मत से पूछती रहीं, क्या एकता के कपड़ें उतारते हुए, उसे नंगा करते हुए...

पालघर में जूना अखाड़े के संतों की मॉब लिंचिंग, उद्धव की पुलिस मूकदर्शक: अखाड़ा परिषद की कठोर कार्रवाई की माँग

संत कल्पवृक्ष गिरी जी महाराज और महंत सुशील गिरी जी को पालघर थाने के पुलिसकर्मियों ने रोका। फिर पुलिस वालों के सामने ही करीब 200 की भीड़ ने...

भारत की विविधता, संस्कृति, लोक कला, साहित्य को समेटती होली, हर राज्य में अलग रंग

जहाँ ब्रजधाम में राधा और कृष्ण के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं वहीं अवध में राम और सीता के जैसे होली खेलें रघुवीरा अवध में। राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गाई जाने वाली होली का विशेष रंग है।

वह दौर जब होली ईद-ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी हो गई थी

मध्यकालीन भारतीय मंदिरों के भित्तिचित्रों और आकृतियों में होली के सजीव चित्र देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए इसमें 17वीं शताब्दी की मेवाड़ की एक कलाकृति में महाराणा को अपने दरबारियों के साथ चित्रित किया गया है।

राग-विराग-वैराग की नगरी काशी: क्यों खेली जाती है महाश्मशान के चिता भस्म से होली, जोगीरा-बुढ़वा मंगल की परंपरा

सनातन में ऐसी कहानियों का बहुत गूढ़ अर्थ था। प्रतीक रूप से ऐसा माना जाता है कि प्रह्लाद का अर्थ आनन्द होता है। वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका (जलाने की लकड़ी) जलती है और प्रेम तथा उल्लास का प्रतीक प्रह्लाद (आनंद) अक्षुण्ण रहता है।

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